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Ghaziabad News: प्रोजेक्ट हैंडलर पर 18 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप
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गाजियाबाद। वेव सिटी क्षेत्र स्थित राइज ऑर्गेनिक होम्स सोसाइटी में फ्लैट के इंटीरियर का काम कराने के नाम पर करीब 18 लाख रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत पुलिस से की गई है। महिला ने होमलेन से जुड़े प्रोजेक्ट हैंडलर पर धोखाधड़ी, रकम के दुरुपयोग और फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें असली बताकर इस्तेमाल करने समेत कई आरोप लगाए हैं। मामले में मनीषा दुबे ने वेव सिटी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
एसीपी वेव सिटी प्रियाश्री पाल ने बताया कि मनीषा दुबे के मुताबिक वह मार्च 2026 में फ्लैट का इंटीरियर वर्क कराने के लिए सेक्टर-4, नोएडा स्थित होमलेन कार्यालय गई थीं। वहां उनकी मुलाकात ऋषभ अग्रवाल से हुई। आरोप है कि ऋषभ ने खुद को प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी संभालने वाला व्यक्ति बताया और 45 दिन में काम पूरा कर 15 जून तक फ्लैट सौंपने का आश्वासन दिया। साथ ही प्रीमियम ब्रांडेड सामग्री लगाने और प्रत्येक सामान के खरीद बिल, टैक्स इनवॉयस व वारंटी दस्तावेज देने की बात कही।
आरोप है कि अप्रैल से आरोपी ने सामग्री खरीदने, ठेकेदारों को भुगतान करने और काम आगे बढ़ाने के नाम पर लगातार रकम मांगी। भरोसे में आकर मनीषा ने बैंक ट्रांसफर, यूपीआई और अन्य माध्यमों से करीब 18 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। खर्च और खरीद से संबंधित बिल मांगने पर आरोपी ने काम पूरा होने के बाद सभी दस्तावेज देने की बात कही।
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15 जून तक काम पूरा नहीं हुआ तो आरोपी ने अलग-अलग कारण बताकर समय बढ़ाया और 18 जुलाई तक काम पूरा करने का भरोसा दिया। इसके बाद उसने काम बंद कर दिया और साइट पर आना भी छोड़ दिया। एसीपी ने बताया कि जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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एसीपी वेव सिटी प्रियाश्री पाल ने बताया कि मनीषा दुबे के मुताबिक वह मार्च 2026 में फ्लैट का इंटीरियर वर्क कराने के लिए सेक्टर-4, नोएडा स्थित होमलेन कार्यालय गई थीं। वहां उनकी मुलाकात ऋषभ अग्रवाल से हुई। आरोप है कि ऋषभ ने खुद को प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी संभालने वाला व्यक्ति बताया और 45 दिन में काम पूरा कर 15 जून तक फ्लैट सौंपने का आश्वासन दिया। साथ ही प्रीमियम ब्रांडेड सामग्री लगाने और प्रत्येक सामान के खरीद बिल, टैक्स इनवॉयस व वारंटी दस्तावेज देने की बात कही।
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आरोप है कि अप्रैल से आरोपी ने सामग्री खरीदने, ठेकेदारों को भुगतान करने और काम आगे बढ़ाने के नाम पर लगातार रकम मांगी। भरोसे में आकर मनीषा ने बैंक ट्रांसफर, यूपीआई और अन्य माध्यमों से करीब 18 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। खर्च और खरीद से संबंधित बिल मांगने पर आरोपी ने काम पूरा होने के बाद सभी दस्तावेज देने की बात कही।
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15 जून तक काम पूरा नहीं हुआ तो आरोपी ने अलग-अलग कारण बताकर समय बढ़ाया और 18 जुलाई तक काम पूरा करने का भरोसा दिया। इसके बाद उसने काम बंद कर दिया और साइट पर आना भी छोड़ दिया। एसीपी ने बताया कि जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।