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Ghaziabad News: मंत्री का करीबी बताकर डीएम पर बनाया ठेका देने का दबाव, गिरफ्तार
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गाजियाबाद। डीएम राकेश कुमार सिंह के कार्यालय से बुधवार को तीन शातिरों को गिरफ्तार किया गया। वह खुद को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह का करीबी बताकर डीएम पर अपने एक परिचित कारोबारी को सरकारी कार्यालयों में लगने वाली टाइल्स का ठेका देने का दबाव बना रहे थे। मामले में संजयनगर निवासी टाइल्स कारोबारी संतोष कुमार ने ही तीनों के खिलाफ कविनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने आरोपियों की कार और मोबाइल कब्जे मेें ले लिए।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान कुंवर ज्योतिरादित्य निवासी महाराजगंज, जौनपुर, सूरज वर्मा निवासी ग्वाल टोली कानपुर व महेश मौर्य निवासी सिविल लाइन कानपुर के रूप में हुई। पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वह पहले भी कई जिलों में बड़े अधिकारियों से मिलकर कई लोगों के काम करा चुके हैं। एसीपी कविनगर अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि तीनों को कलक्ट्रेट परिसर से गिरफ्तार कर उनके खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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ठेका नहीं मिला तो मंत्री जी होंगे नाराज
संतोष कुमार ने बताया कि किसी करीबी के माध्यम से उनकी मुलाकात ज्योतिरादित्य, सूरज और महेश से हुई थी। तीनों ने उनके पास आना जाना शुरू कर दिया। आराेपियों ने कहा कि वह उनको सरकारी कार्यालयों में लगने वाली टाइल्स का ठेका दिलवा सकते हैं। अपना रुतबा बढ़ाने के लिए उन्होंने डीएम को फोन किया और खुद को मंत्री का करीबी बताते हुए उनसे मिलने का समय मांगा। डीएम उस समय अपने कार्यालय में थे, डीएम ने उनको वहीं मिलने के लिए बुलाया। डीएम से मिलते ही ज्योतिरादित्य ने कहा कि जिला मुख्यालय और सरकारी कार्यालयों में जितना भी टाइल्स लगाने का काम होता है, उसका ठेका संतोष को मिलना चाहिए। डीएम ने मना किया तो कहने लगा कि वह मंत्री का रिश्तेदार है और सूरज व महेश उनके बहुत करीबियों में से हैं। अगर ठेका नहीं मिला तो मंत्री जी नाराज होंगे। इस पर डीएम ने मौके पर पुलिस बुला और तीनों काे पुलिस हिरासत में दे दिया।
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मोटा पैसा ऐंठने की थी योजना
संतोष ने बताया कि आरोपी उनको अपनी लंबी पहुंच बताकर उनसे मोटा पैसा ऐंठने के चक्कर में थे। उन्होंने कहा था कि जब तक वह उनको अधिकारी के पास लेकर नहीं जाएंगे, तब तब उनको इसका विश्वास नहीं होगा। इसी चक्कर में आरोपियों ने डीएम को फोन मिला दिया और उनको साथ लेकर चले गए। आरोपियों ने रौब दिखाने के लिए बार-बार हूटर भी बजाया था।
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शक होने पर डीएम ने मंत्री को कर ली कॉल और हो गया खुलासा
डीएम राकेश कुमार सिंह के पास आए तीनों ठगों ने न सिर्फ उन पर ठेका देने का दबाव बनाया, बल्कि अपने मोबाइल से किसी व्यक्ति से बात कराई। उन्होंने डीएम को कहा कि कॉल पर मंत्री जी खुद हैं। डीएम ने बात की तो उस व्यक्ति ने भी ठेका दिए जाने की सिफारिश की। इसके बाद वह तीनों लोग जाने लगे। डीएम ने बताया कि शक होने पर उन्होंने तीनों को वापस बुलाया और मंत्री का नंबर मांगा। जो नंबर उन्होंने दिया वह स्विच ऑफ था। इसके बाद उन्होंने मंत्री को दूसरे नंबर पर फोन लगाया और बताया कि उन्होंने जिन व्यक्तियों को भेजा है, उनका काम नहीं हो सकता है। इस पर मंत्री ने कहा कि उन्होंने किसी व्यक्ति को वहां नहीं भेजा। इसके बाद पूरा माजरा उनकी समझ में आ गया और पुलिसकर्मियों को बुलाकर उनकी गाड़ी भी चेक कराई। ठगों ने अपनी गाड़ी में हूटर भी लगा रखा था, ताकि सड़क पर वह रौब झाड़ सके।
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गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान कुंवर ज्योतिरादित्य निवासी महाराजगंज, जौनपुर, सूरज वर्मा निवासी ग्वाल टोली कानपुर व महेश मौर्य निवासी सिविल लाइन कानपुर के रूप में हुई। पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वह पहले भी कई जिलों में बड़े अधिकारियों से मिलकर कई लोगों के काम करा चुके हैं। एसीपी कविनगर अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि तीनों को कलक्ट्रेट परिसर से गिरफ्तार कर उनके खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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ठेका नहीं मिला तो मंत्री जी होंगे नाराज
संतोष कुमार ने बताया कि किसी करीबी के माध्यम से उनकी मुलाकात ज्योतिरादित्य, सूरज और महेश से हुई थी। तीनों ने उनके पास आना जाना शुरू कर दिया। आराेपियों ने कहा कि वह उनको सरकारी कार्यालयों में लगने वाली टाइल्स का ठेका दिलवा सकते हैं। अपना रुतबा बढ़ाने के लिए उन्होंने डीएम को फोन किया और खुद को मंत्री का करीबी बताते हुए उनसे मिलने का समय मांगा। डीएम उस समय अपने कार्यालय में थे, डीएम ने उनको वहीं मिलने के लिए बुलाया। डीएम से मिलते ही ज्योतिरादित्य ने कहा कि जिला मुख्यालय और सरकारी कार्यालयों में जितना भी टाइल्स लगाने का काम होता है, उसका ठेका संतोष को मिलना चाहिए। डीएम ने मना किया तो कहने लगा कि वह मंत्री का रिश्तेदार है और सूरज व महेश उनके बहुत करीबियों में से हैं। अगर ठेका नहीं मिला तो मंत्री जी नाराज होंगे। इस पर डीएम ने मौके पर पुलिस बुला और तीनों काे पुलिस हिरासत में दे दिया।
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मोटा पैसा ऐंठने की थी योजना
संतोष ने बताया कि आरोपी उनको अपनी लंबी पहुंच बताकर उनसे मोटा पैसा ऐंठने के चक्कर में थे। उन्होंने कहा था कि जब तक वह उनको अधिकारी के पास लेकर नहीं जाएंगे, तब तब उनको इसका विश्वास नहीं होगा। इसी चक्कर में आरोपियों ने डीएम को फोन मिला दिया और उनको साथ लेकर चले गए। आरोपियों ने रौब दिखाने के लिए बार-बार हूटर भी बजाया था।
शक होने पर डीएम ने मंत्री को कर ली कॉल और हो गया खुलासा
डीएम राकेश कुमार सिंह के पास आए तीनों ठगों ने न सिर्फ उन पर ठेका देने का दबाव बनाया, बल्कि अपने मोबाइल से किसी व्यक्ति से बात कराई। उन्होंने डीएम को कहा कि कॉल पर मंत्री जी खुद हैं। डीएम ने बात की तो उस व्यक्ति ने भी ठेका दिए जाने की सिफारिश की। इसके बाद वह तीनों लोग जाने लगे। डीएम ने बताया कि शक होने पर उन्होंने तीनों को वापस बुलाया और मंत्री का नंबर मांगा। जो नंबर उन्होंने दिया वह स्विच ऑफ था। इसके बाद उन्होंने मंत्री को दूसरे नंबर पर फोन लगाया और बताया कि उन्होंने जिन व्यक्तियों को भेजा है, उनका काम नहीं हो सकता है। इस पर मंत्री ने कहा कि उन्होंने किसी व्यक्ति को वहां नहीं भेजा। इसके बाद पूरा माजरा उनकी समझ में आ गया और पुलिसकर्मियों को बुलाकर उनकी गाड़ी भी चेक कराई। ठगों ने अपनी गाड़ी में हूटर भी लगा रखा था, ताकि सड़क पर वह रौब झाड़ सके।