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अब शुरू होगी मास्टर प्लान 2041 की तैयारी

Mon, 26 Sep 2016 01:33 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद Updated Mon, 26 Sep 2016 01:33 AM IST
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Preparation of the Master Plan 2041 will start now
अन्य - फोटो : अमर उजाला

गाजियाबाद मास्टर प्लान 2021 के दिन लदने वाले हैं। बढ़ती आबादी और विकास की नई योजनाओं के मद्देनजर जीडीए का फोकस अब मास्टर प्लान 2041 पर है। 27 सितंबर को प्रस्तावित जीडीए बोर्ड बैठक में मास्टर प्लान 2041 बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव लाया जाएगा।

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बैठक में इस पर मंथन होगा कि यह प्लान नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग से बनवाया जाए या एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से।जीडीए सूत्रों ने बताया कि 1997 में मास्टर प्लान 2021 बनना शुरू हुआ था और यह शासन से 2005 में स्वीकृत होकर आया था।
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पिछले अनुभव को देखते हुए जीडीए ने अभी से मास्टर प्लान 2041 को बनाने की तैयारी शुरू कर देने का निर्णय लिया है। सूत्रों ने बताया कि जब मास्टर प्लान 2021 बना था, तब मेट्रो, एलिवेटेड रोड, एनएच-24 का चौड़ीकरण जैसी बड़ी परियोजनाएं नहीं आईं थीं। ट्रांजिट ओरियेंटेड डेवलपमेंट की परिकल्पना नहीं थी।
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मास्टर प्लान 2041 में नई-पुरानी योजनाओं को शामिल करके उनके अनुसार विकास का खाका खींचा जाएगा।सूत्रों ने बताया कि मास्टर प्लान 2021 को समय से पूरा होने दिया जाएगा।

इसमें कोई बदलाव नहीं होगा लेकिन बोर्ड बैठक में इस पर चर्चा होगी कि मास्टर प्लान का स्वरूप लचीला होना चाहिए ताकि बीस वर्ष की अवधि में जब विकास की कोई नई योजना आए तो उसके अनुसार बदलाव करने की भी गुंजाइश हो। जैसे कि मेट्रो आएगी तो मेट्रो के ट्रैफिक के अनुसार रोड होनी चाहिए लेकिन मास्टर प्लान 2021 में मेट्रो के मुताबिक रोड नहीं है।

ऐसे में विकास प्रभावित होता है इसलिए मास्टर प्लान केलिए दूरदर्शी नजर चाहिए। बोर्ड बैठक में इस पर मंथन होगा कि इस बार मास्टर प्लान के लिए नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग या एनसीआरपीबी में से किसे चुना जाए।

ऐसे बनता है मास्टर प्लान
एनसीआरपीबी सूत्रों ने बताया कि मास्टर प्लान बनाने के लिए सबसे पहले सेटेलाइट इमेज तैयार होता है। फिर इमेज का जमीनी स्तर पर वेरिफिकेशन होता है। एक सर्वे रिपोर्ट तैयार की जाती है जिसमें यह दर्शाया जाता है कि विकास के लिए कितनी जमीन बची है और इस पर कितने भवन, सड़क, पार्क, हरित क्षेत्र निर्मित किए जा सकते हैं।

साथ ही हर साल बढ़ने वाली जनसंख्या का ग्राफ तैयार होता है। जनसंख्या के हिसाब से विकास की योजनाएं तय की जाती हैं। फिर पूरी रिपोर्ट बोर्ड को भेजी जाती है। बोर्ड से पास होकर रिपोर्ट जीडीए पहुंचती है। जीडीए की एक कमेटी इस पर आपत्ति व सुझाव लोगों से मांगती है। कमेटी अपनी संस्तुति के साथ रिपोर्ट शासन को भेजती है।


अंतिम निर्णय शासन लेता है। इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम तीन साल लगता है।

हापुड़ का मास्टर प्लान शासन के पास लंबित
2011 में हापुड़ के जिला बनने के बाद एनसीआर पीबी ने करीब साढे़ तीन साल में इसका मास्टर प्लान तैयार किया था। सूत्रों ने बताया कि अगस्त 15 में मास्टर प्लान शासन को भेज दिया गया था लेकिन यह अभी शासन के पास ही लंबित है।

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