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Ghaziabad News: पीपीएस के पूर्व पति ने युवती का वेतन रोका, केस दर्ज
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कौशांबी। यूपी पुलिस की एक पीपीएस अधिकारी के पूर्व पति ने नोएडा की युवती को अपने ऑफिस में नौकरी देकर चार महीने का वेतन नहीं दिया। आरोपी ने युवती को मुलाकात में खुद को ज्वाइंट कमिश्नर बताकर नौकरी दी थी। फिर पीपीएस अधिकारी के खाते से शुरुआती तीन महीने का वेतन देकर बाकी पैसे देने से मना कर दिया। कौशांबी थाने में आरोपी पर नामजद मुकदमा हुआ है। नोएडा सेक्टर-62 के गलेरियश पीजी में रहने वाली वैशाली यादव ने शिकायत दी कि जयपुरिया एंकलेव के युवक ने खुद को ज्वाइंट कमिश्नर बताया था लेकिन उसने कहा कि वह किसी कारण से बर्खास्त चल रहा है। इसके बाद उसने कौशांबी के एक टावर में एक्स्ट्रा क्लब नाम से कंपनी खोली जिसमें उन्हें भी ऑफिस के काम के लिए रखा गया। युवक ने उन्हें नौकरी के लिए 25 हजार रुपये वेतन देने का आश्वासन दिया। अब उनका आरोप है कि आरोपी ने तीन महीने तक पीपीएस अधिकारी के खाते से वेतन दिया लेकिन अगले चार महीने तक पैसे नहीं दिए। उन्होंने वेतन मांगा तो गाली गलौज करके जान से मारने की धमकी दी। इंदिरापुरम एसीपी स्वतंत्र कुमार सिंह का कहना है कि आरोपी रोहित राज को पुराने मामले में गिरफ्तार कर चुके हैं। आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ होगी।
पीपीएस अधिकारी भी करा चुकी हैं आरोपी पर मुकदमा:
पीपीएस अधिकारी ने पुलिस को मुकदमा दर्ज कराया कि 2018 में मेट्रोमोनियल साइट पर आरोपी से जान-पहचान हुई थी। उसने आइआरएस अधिकारी बताकर नजदीकी बढ़ाई थी। युवक खुद को रांची में आयकर उपायुक्त के रूप तैनात बताता था लेकिन जब सच्चाई पता चली तो उनके पैरों तले जमीन निकल गई। वह अपने नाम जैसे एक आईआरएस अधिकारी, जो बिहार में तैनात हैं के नाम का गलत इस्तेमाल करता था। आरोपी ने उनके नाम पर लोन लिया और उनके फर्जी हस्ताक्षर कर 15 लाख रुपये खाते से भी निकाले थे। इसके अलावा प्लाट खरीदने के बहाने अपने और पिता के खातों में कई लाख रुपये ट्रांसफर कराए। उन्होंने तीन साल पहले आरोपी से तलाक ले लिया। उसके बाद पुलिस विभाग में उनके नाम का इस्तेमाल कर लाेगों से धोखाधड़ी करने लगा था। ब्यूरो
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पीपीएस अधिकारी भी करा चुकी हैं आरोपी पर मुकदमा:
पीपीएस अधिकारी ने पुलिस को मुकदमा दर्ज कराया कि 2018 में मेट्रोमोनियल साइट पर आरोपी से जान-पहचान हुई थी। उसने आइआरएस अधिकारी बताकर नजदीकी बढ़ाई थी। युवक खुद को रांची में आयकर उपायुक्त के रूप तैनात बताता था लेकिन जब सच्चाई पता चली तो उनके पैरों तले जमीन निकल गई। वह अपने नाम जैसे एक आईआरएस अधिकारी, जो बिहार में तैनात हैं के नाम का गलत इस्तेमाल करता था। आरोपी ने उनके नाम पर लोन लिया और उनके फर्जी हस्ताक्षर कर 15 लाख रुपये खाते से भी निकाले थे। इसके अलावा प्लाट खरीदने के बहाने अपने और पिता के खातों में कई लाख रुपये ट्रांसफर कराए। उन्होंने तीन साल पहले आरोपी से तलाक ले लिया। उसके बाद पुलिस विभाग में उनके नाम का इस्तेमाल कर लाेगों से धोखाधड़ी करने लगा था। ब्यूरो
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