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Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   Posing as an officer and promising to get a contract, he was cheated of Rs 30 lakhs.

Ghaziabad News: खुद को अधिकारी बता ठेका दिलाने का दिया भरोसा, ठग लिए 30 लाख

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 09 Sep 2024 04:00 AM IST
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Posing as an officer and promising to get a contract, he was cheated of Rs 30 lakhs.
गाजियाबाद। बाराबंकी नगर पालिका में ठेका दिलाने के नाम पर राजनगर के आशुतोष शर्मा से 30 लाख की ठगी हो गई। आरोपी ने खुद को पालिका में नगर स्वास्थ्य अधिकारी बताकर उनको झांसे में लिया। पुलिस ने फिलहाल दो लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्जकर जांच शुरू कर दी है।
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आशुतोष शर्मा ने बताया कि वह ठेकेदारी करते हैं। उनके पास एक पुराने परिचित राजू बिष्ट आए थे। उसने दावा किया कि उसकी बाराबंकी में एक अधिकारी से अच्छी जान पहचान है। वह उनको ठेका दिलवा सकता है। वह उसको लेकर बाराबंकी गए, वहां पर एक कमरे में व्यक्ति बैठा मिला, जिसने खुद का नाम विपिन शुक्ला बताया। उसने दावा किया कि वह नगर स्वास्थ्य अधिकारी है और कूड़ा संग्रह कार्य का नोडल है। उसने नगर पालिका में काम दिलाने का भरोसा दिया। कहा कि नगर पालिका में विद्युत खंभे लगाए जाने हैं। जैम पोर्टल पर तुम इसके लिए आवेदन कर दो। उन्होंने पोर्टल पर आवेदन कर अपने रेट दे दिए फिर उनको पता चला कि उनकी बजाय ठेका किसी और के नाम छूट गया है।
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इसी बीच विपिन शुक्ला का फोन आया। उसने कहा कि उनका रेट सबसे कम है इसलिए चेयरमैन और ईओ से उसकी बात हो गई है। ठेका उसको ही मिल जाएगा। ठेका मिलने की बात कन्फर्म करते हुए उसने कहा कि खंभे सप्लाई करने वाली एक कंपनी के अधिकारी उसके जानकार हैं। तुम परेशान मत होना, भुगतान कर देना, खंभे वह उपलब्ध करा देंगे। उसकी बातों में आकर उन्होंने रुपये ट्रांसफर कर दिए।
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डस्टबिन के ठेके का भी दिया झांसा :
फिर उसने कहा कि डस्टबिन सप्लाई करने का ठेका भी उनको मिल गया है। पहले की तरह उसने कहा कि डस्टबिन सप्लाई करने वाली एक कंपनी के बड़े अधिकारी उनके जानकार हैं। भुगतान उनके खाते में कर दें और डस्टबिन आसानी से सस्ते में आ जाएंगे। उसकी बातों में आकर उन्होंने दोनों खातों में करीब 18 लाख और 12 लाख रुपये नकद दे दिए। दोनों कार्य के आदेश भी उसने उनके व्हाट्सएप पर भेज दिए। इससे उनको विश्वास हो गया लेकिन एक दिन नगरपालिका में जाने पर पता चला कि उनके नाम कोई भी कार्य आदेश जारी नहीं हुआ है। जो कार्य आदेश भेजे गए थे, वह फर्जी हैं।
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कोट
आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले में जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- राजेश कुमार, डीसीपी
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