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पितृपक्ष शुरू, शुभ कार्यों पर लगा ब्रेक
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Thu, 15 Sep 2016 11:52 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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पितृपक्ष आज (शुक्रवार) से शुरू हो रहा है। इससे शुभ कार्यों पर पूरी तरह ब्रेक लग जाएगा। साथ ही नई चीजों की खरीदारी भी बंद हो जाएगी। इससे बाजारों में भी रौनक खत्म हो जाएगी। खास बात यह है कि इस बार 15 दिनों का ही पितृपक्ष होगा।
पंडितों के अनुसार पंचमी और षष्ठी तिथि का क्षय होने के कारण इस बार 16 की जगह 15 दिनोें का ही पितृपक्ष रहेगा। शुक्रवार की सुबह से जल अर्पित किया जाएगा। इसी के साथ मंदिरों में दान पुण्य और पूजा पाठ भी शुरू हो जाएगा।
पंडित गिरीश मिश्रा ने बताया कि उदया तिथि के अनुसार सूर्य उदय होने की तिथि के हिसाब से ही पितृ तर्पण की तिथि मानी जाती है। पितृपक्ष में पंचमी और षष्ठी तिथि एक साथ होने के कारण एक दिन की कमी आई है।
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ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि तिथियों के क्षय होने एवं बढ़ने के कारण इस तरह का बदलाव आता रहता है। मान्यता है कि इन दिनों में पूर्वज धरती पर आते हैं। पितृ पक्ष में नदी, तालाब एवं पोखरों में पितरों की शांति के लिए तर्पण होगा।
ऐसे करें तर्पण
तर्पण योग्य ब्राह्मण के मार्गदर्शन में करना चाहिए। तालाब, नदी या अपने घर में व्यवस्था अनुसार जवा, तिल, कुशा, गंगाजल, वस्त्र आदि सामग्री के द्वारा पितरों की शांति, ऋषियों एवं सूर्य को प्रसन्न करने के लिए तर्पण किया जाता है।
बाजारों में नहीं दिखेगी रौनक
पितृपक्ष के दौरान ज्यादातर लोग नए सामान की खरीदारी से बचते हैं। ऐसे में लोगों ने बृहस्पतिवार को ही लोगों ने खरीदारी की। दुकानदार मुकेश ने बताया कि 15 दिन तक ऑफ सीजन रहता है। अब तो रौनक नवरात्रों में ही लौटेगी। मजबूरी में ही लोग खरीदारी करने आते हैं।
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पंडितों के अनुसार पंचमी और षष्ठी तिथि का क्षय होने के कारण इस बार 16 की जगह 15 दिनोें का ही पितृपक्ष रहेगा। शुक्रवार की सुबह से जल अर्पित किया जाएगा। इसी के साथ मंदिरों में दान पुण्य और पूजा पाठ भी शुरू हो जाएगा।
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पंडित गिरीश मिश्रा ने बताया कि उदया तिथि के अनुसार सूर्य उदय होने की तिथि के हिसाब से ही पितृ तर्पण की तिथि मानी जाती है। पितृपक्ष में पंचमी और षष्ठी तिथि एक साथ होने के कारण एक दिन की कमी आई है।
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ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि तिथियों के क्षय होने एवं बढ़ने के कारण इस तरह का बदलाव आता रहता है। मान्यता है कि इन दिनों में पूर्वज धरती पर आते हैं। पितृ पक्ष में नदी, तालाब एवं पोखरों में पितरों की शांति के लिए तर्पण होगा।
ऐसे करें तर्पण
तर्पण योग्य ब्राह्मण के मार्गदर्शन में करना चाहिए। तालाब, नदी या अपने घर में व्यवस्था अनुसार जवा, तिल, कुशा, गंगाजल, वस्त्र आदि सामग्री के द्वारा पितरों की शांति, ऋषियों एवं सूर्य को प्रसन्न करने के लिए तर्पण किया जाता है।
बाजारों में नहीं दिखेगी रौनक
पितृपक्ष के दौरान ज्यादातर लोग नए सामान की खरीदारी से बचते हैं। ऐसे में लोगों ने बृहस्पतिवार को ही लोगों ने खरीदारी की। दुकानदार मुकेश ने बताया कि 15 दिन तक ऑफ सीजन रहता है। अब तो रौनक नवरात्रों में ही लौटेगी। मजबूरी में ही लोग खरीदारी करने आते हैं।