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Ghaziabad News: निगम के गृहकर में तीन गुना तक वृद्धि का विरोध, बताया नियमों का उल्लंघन

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 19 May 2025 01:02 AM IST
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Opposition to three-fold increase in corporation's house tax, said to be violation of rules
गाजियाबाद। कोरवा-यूपी के शीर्ष पदाधिकारियों की शनिवार देर शाम को एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। जिसमें गनगर निगम की ओर से गृहकर में तीन गुना तक की वृद्धि का विरोध किया गया और इसे नियमों का उल्लंघन बताते हुए वापस लेने की मांग की गई।
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इस मौके पर कोरवा-यूपी के मुख्य संरक्षक कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि हमेशा नगर निगम की ओर से गृह कर में प्रत्येक दो वर्ष के बाद दस प्रतिशत की वृद्धि होती रही है। अब अचानक गृह कर में करीब तीन गुना तक वृद्धि बिलकुल स्वीकार्य नहीं की जाएगी। गाजियाबाद नगर निगम के पास न तो पैसे की कमी है, न ही पैसा कमाने के साधनों की, ऊपर से संपत्तियों के पंजीकरण में गाजियाबाद प्रदेश में अव्वल है। वर्तमान में न तो पीने के पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, न कूड़ा निस्तारण और न ही अतिक्रमण हटाया जा रहा है। निगम हर काम में फेल साबित हो रहा है लेकिन पैसे वसूलने में अव्वल हो रहा है। ऐसे में गृह कर में अनावश्यक वृद्धि असहनीय है।
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कोरवा-यूपी के अध्यक्ष डॉ. पवन कौशिक ने बताया कि उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद नगर निगम में करों की दरें सबसे ज्यादा यानी 4.00 रुपये प्रति वर्ग फुट है, जबकि अन्य शहरों में यह 2.50 रुपये से भी कम है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार पूर्व करों में वृद्धि दोगुने से अधिक नहीं हो सकती।
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संस्था के मुख्य सलाहकार ने बताया कि गाजियाबाद नगर निगम की ओर से वर्ष 2023-2024 में संपत्ति करों की वर्तमान दरों में दस प्रतिशत की वृद्धि की जा चुकी है, जो वर्ष 2024-2025 (31.03.2025) तक लागू है। इस अवधि में अन्य किसी भी प्रकार की वृद्धि किया जाना नगर निगम अधिनियम के विपरीत है।
डीएम सर्किल दाम से टैक्स लेना सरासर गलत : पूर्व पार्षद
बैठक में निगम के पूर्व पार्षद राजेन्द्र त्यागी बतौर विशेष अतिथि उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि नगर निगम द्वारा डीएम सर्कल रेट आधारित गृह कर में वृद्धि नगर निगम नियमों का घोर उल्लघंन है। उन्होंने बाकायदा नियमों की संख्या, नगर निगम की बैठकों का विवरण और उत्तर प्रदेश शासन के आदेशों का मनमाने तरीके से लागू करने का उल्लेख करते हुए नगर निगम के गृह कर वृद्धि के आदेश को वापस लेने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने यह भी बताया की डीएम सर्कल रेट की बजाय किराये की वर्तमान न्यूनतम दर को भी आधार बनाया जा सकता था। उत्तर प्रदेश से अवस्थापना निधि के रूप में अतिरिक्त धन राशि ली जा सकती थी। सरकारी प्रतिष्ठानों से संपत्ति कर वसूला जा सकता था।
नियम के विरुद्ध है
महासचिव जय दीक्षित ने कहा की यदि भवन दस वर्ष से अधिक पुराना नहीं है तो 25 प्रतिशत कम और यदि वह दस वर्ष से अधिक किंतु बीस वर्ष से कम पुराना है तो 32.5 प्रतिशत तक और यदि वह बीस वर्ष से अधिक पुराना है तो 40% तक गृह कर होना चाहिए परंतु ऐसा नहीं किया गया है। यह नियमों का घोर उल्लंघन है। प्रशासनिक महासचिव कैलाश चंद्र शर्मा ने बताया कि अगर कवर्ड एरिया का रेट एक रुपये प्रति वर्ग फुट है तो कारपेट एरिया का रेट 0.80 पैसे प्रति वर्ग फुट होना चाहिए लेकिन नगर निगम के अधिकारी बहुत ज्यादा वसूल रहे हैं।

गौरव बंसल ने बताया कि लोगों को पिछले गृह कर के मुकाबले तीन गुना ज्यादा बिल मिल रहा है, यह लोगों की जेब पर बड़ा भार है। सभी सदस्यों ने कह कि हम गृह कर तब जमा करेंगे, जब नगर निगम अपने वर्तमान आदेश पर पुन: विचार करेगा। इस अवसर पर जय दीक्षित (शालीमार गार्डन डाॅ. आर के आर्या (विजय नगर), पीएस सिंह (नोएडा), आलोक सिंह (लखनऊ), एडवोकेट अंशु त्यागी (वसुंधरा), मुलेन्द्र शर्मा (ग्रेटर नोएडा), विनोद जिंदल (कविनगर), डॉ. मधु सिंह (नोएडा), नेम पाल चौधरी (प्रताप विहार), राज कुमार त्यागी (राजनगर एक्सटेंशन) आदि मौजूद रहे।
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