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जनपद में महज 40 लाख पेड़, होने चाहिए 75 लाख
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Tue, 08 Nov 2016 11:39 PM IST
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कट रहे पेड़
- फोटो : अमर उजाला
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दिवाली के बाद भारी प्रदूषण के हालात सामने आने पर वन विभाग का ध्यान अब पेड़ों की ओर गया है। दरअसल जरूरत के मुकाबले जनपद में पचास फीसदी पेड़ों की संख्या कम है। ऐसे में अब वन विभाग ने पर्यावरणविद और स्कूल फेडरेशन के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
पर्यावरणविद बीपी बघेल ने बताया कि आबादी के हिसाब से जनपद में 75 लाख पौधे होने चाहिए। इसके मुकाबले महज 40 लाख के करीब ही पेड़ हैं। डीएफओ बीपी सिंह ने बताया कि प्रदूषण रोकने में कारगर पेड़ों को काटने के लिए हर रोज चार से पांच आवेदन आते हैं। इस तरह वर्ष भर में लोग डेढ़ से दो हजार पेड़ काटने के लिए आवेदन करते हैं।
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इसके अलावा जो पेड़ लगाए जाते हैं उसमें भी छह से सात प्रतिशत पौधे खत्म हो जाते हैं। बीपी सिंह ने बताया कि हापुड़ से अलग होने के बाद गाजियाबाद में वन क्षेत्र महज 651 हेक्टेयर रह गया है। यह गाजियाबाद की घनी आबादी के बीच बहुत कम है। बता दें कि गत वर्ष वन विभाग द्वारा 46 हजार पौधे लगाए गए थे।
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इनमें से 3 हजार के करीब पौधे नहीं पनप सके थे। ऐसे ही इस बार जुलाई में 80 हजार पौधे लगाए गए हैं। अगस्त में सर्वे के दौरान इनमें से 994 पौधे सूखे हुए पाए गए जिनके स्थान पर दूसरे पौधे लगाए गए।पर्यावरणविद बीपी बघेल ने बताया कि एक आदमी चौबीस घंटे में जितना ऑक्सीजन लेता है, उसकी पूर्ति चार पेड़ों द्वारा की जाती है।
इसके बावजूद प्रति वर्ष दस हजार से अधिक पेड़ सरकारी योजनाओं और लोगों के व्यक्तिगत स्वार्थ की भेंट चढ़ जाते हैं। वर्तमान में भी इस्टर्न पैरीफेरल वे के लिए एनएच 24 पर 22 हजार पेड़ काटे जाने के आदेश हैं। ऐसे में लोग पौधरोपण के प्रति जागरूक नहीं हुए तो पांच वर्ष बाद ही विकट स्थिति होगी।
इस बार दिवाली के बाद बढ़े प्रदूषण से चेते वन विभाग के अधिकारी अब स्कूल फेडरेशन और आरडब्ल्यूए के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाएगा। इस अभियान के जरिए लोगों को न सिर्फ पेड़ लगाने बल्कि उसकी सुरक्षा और अपनी ओर से अन्य सावधानी बरतने के प्रति जागरूक किया जाएगा।
अभियान के तहत हाल ही में लोगों को जिस प्रदूषण से जूझना पड़ा है, उसकी विडियो दिखाई जाएगी। इसके साथ ही यह भी बताया जाएगा कि यदि स्थिति यही रही तो आने वाले वर्षों में लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत होगी।
पौधे कटवाने के आवेदन में लिखे जाते हैं ये कारण
- मकान के पास बने पेड़ से जान का खतरा।
- जान-माल की हानि हुई तो वन विभाग लेगा जिम्मेदारी।
- बिजली के तार को लगाने में हो रही असुविधा
- पेड़ की वजह से कार पार्किंग की होती है समस्या मौसम साफ होने के साथ ही बुधवार से बच्चे स्कूल जाएंगे। मंगलवार को दिन पर धूप रही और स्मॉग नहीं दिखा, इससे लोगों को राहत मिली। बीते दिनों प्रदूषण की वजह से बिगड़े पर्यावरण में कक्षा दो तक के विद्यार्थियों की छुट्टी डीएम द्वारा घोषित कर दी गई थी।
बीएसए लालजी यादव ने बताया कि मंगलवार को मौसम पूरी तरह साफ दिखा, ऐसे में इस अवकाश को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।दूसरी ओर मौसम वैज्ञानिक रंजीत सिंह ने बताया कि हवा के चलने से स्मॉग बिखर गया है, जिससे मौसम खुला है। 13 नवंबर के बाद बादल छाने और बारिश होने की संभावना है।
अनुमान के मुताबिक यदि बारिश हुई तो यह मौसम के लिए लाभदायी साबित होगी। उन्होंने कहा कि अब सामान्य लोगों को मास्क लगाने की जरूरत नहीं है, जो लोग सांस की बीमारी से पीड़ित हैं उन लोगों को एहतियात के तौर पर मास्क लगाना होगा।
संभागीय परिवहन विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक विभाग में 2015-16 में पंजीकृत होने वाले वाहनों में पेट्रोल के 60819 वाहन थे जबकि डीजल के 11433 वाहन और सीएनजी के 5736 वाहन ही रजिस्टर्ड हुए। वहीं अप्रैल 2016 से अक्तूबर के अंत तक पेट्रोल वाहन 35496 वाहन रजिस्टर्ड हुए हैं।
डीजल वाहन 5596 और सीएनजी वाहन 3727 वाहन ही रजिस्टर्ड हो पाए हैं।दूसरी ओर विभाग में 15 वर्ष पुराने डीजल वाहन 6349 है। एनजीटी के आदेश के बाद ऐसे वाहनों का रजिस्ट्रेशन रिनुवल बंद है। अभी तक करीब 525 वाहनों के रजिस्ट्रेशन कैंसल किए जा चुके हैं। बाकी वाहन या तो एनसीआर की सीमा के बाहर बेच दिए गए या इनके परमिट कैंसल के कार्य किए जा रहे हैं।