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Ghaziabad News: डिजिटल वाॅलेट में एक करोड़ दिखा चिकित्सक से 67.90 लाख रुपये ठगे
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संवाद न्यूज एजेंसी
गाजियाबाद। शेयर ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच देकर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। इस बार साइबर अपराधियों ने इंदिरापुरम की डाॅक्टर मीतू शर्मा से 67.90 लाख रुपये ठग लिए हैं। उन्हें फंसाने के लिए लालच का जाल बिछाया गया। उनसे कहा गया कि 120 फीसदी का मुनाफा होगा। जालसाजों ने एप के डिजिटल वाॅलेट में एक करोड़ दिखा भी दिए लेकिन यह रकम सिर्फ दिखाने के लिए ही थी। जब मीतू इसे निकाल नहीं पाई तो उन्हें ठगी का अहसास हुआ लेकिन तब तक उनका खाता खाली हो चुका था।
साइबर थाने में उनकी ओर से दर्ज एफआईआर में बताया गया है कि जुलाई में उनके पास व्हाट्स एप काॅल आई। इस पर उनसे शेयर ट्रेडिंग करने पर मोटे मुनाफे का लालच दिया गया। वह राजी हो गईं तो उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ लिया गया। ग्रुप में पहले शेयर ट्रेडिंग के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें लगा कि ग्रुप में शेयर ट्रेडिंग के विशेषज्ञ हैं।
इनमें से ही एक ने उनसे संपर्क किया। खुद को दिल्ली आईआईटी से पढ़ाई करने वाला बताते हुए उसने कहा कि वह न्यूयार्क में रहता है। यहां के शेयर मार्केट में भारत के मुकाबले बहुत ज्यादा कमाई है। डाॅक्टर मीतू का कहना है कि उसके कहने पर उन्होंने डाईवा सिक्योरिटी नाम का एप इंस्टॉल कर लिया। इसके बाद उनसे छोटी सी रकम निवेश कराई गई। इसके बदले 100 फीसदी मुनाफा दिया गया।
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ऐसा उनका भरोसा जीतने के लिए किया गया। इसका मकसद उनसे बड़ी रकम की ठगी करना था। अगले चरण में उनसे डाॅलर में रकम निवेश करने के लिए कहा गया और 67.90 लाख रुपये खाते में जमा करा लिए। एप के डिजिटल वाॅलेट में एक करोड़ नजर आ रहे थे। उन्होंने रकम निकालने की कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली। पूछने पर जवाब में कई नियम और शर्ते बता दी गईं। जालसाजों का लालच बढ़ता जा रहा था। उन्हें लग रहा था कि वह और रकम ठग सकते हैं।
रकम जमा नहीं कराई तो धमकाने लगे
अगले चरण में उनके नाम 2.60 करोड़ रुपये का आईपीओ जारी होने बताया गया। रकम जमा कराने के लिए कहा गया। डाॅक्टर का कहना है कि इतनी ज्यादा रकम उनके पास नहीं थी, इसलिए जमा नहीं कराई। इसके बाद ठगों ने दबाव बनाने के लिए कई मैसेज किए। काॅल करके धमकी दीं। 1.30 करोड़ का ऋण देने का लालच दिया लेकिन उन्होंने रकम जमा नहीं कराई। इस पर उन्हें कई दिन तक फोन पर परेशान किया गया। तब उन्हें अहसास हुआ कि वह ठग गिरोह का शिकार हो गई हैं। उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस से की और केस दर्ज कराया।
एडीसीपी अपराध सच्चिदानंद ने बताया कि जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई है। उनकी जानकारी निकलवाई जा रही है। ठगी गई रकम को फ्रीज कराने के लिए टीम लगी हैं।
दुबई, यूएई से चल रहे गिरोह
शेयर ट्रेडिंग के नाम पर और डिजिटल अरेस्ट करके ठगी करने वाले गिरोह दुबई, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कंबोडिया और थाईलैंड से चल रहे हैं। ऐसे मामलों की जांच के दौरान पुलिस को गिरोह की लोकेशन मिली है। ये गिरोह सिम और बैंक खाते भारत के लोगों के ही इस्तेमाल करते हैं। खाते और सिम खरीद लेते हैं।
10 करोड़ रुपये वापस कराए
ठगी होने के बाद जितनी जल्दी आप शिकायत दर्ज करा देंगे, उतनी ही संभावना ठगी गई रकम वापस मिलने की होगी। साइबर अपराध थाना खुलने के बाद पुलिस ठगी गई रकम को फ्रीज कराने पर जोर दे रही है। पुलिस ने 80 मामलों के पीड़ितों को 10 करोड़ रुपये वापस करा दिए हैं। रकम वापसी के बाद साइबर अपराधियों की पहचान की कोशिश शुरू होती है।
इन बातों का रखें ध्यान
- शेयर ट्रेडिंग के लिए अधिकारिक डीमेट अकाउंट का इस्तेमाल करें।
किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
किसी भी अनजान टेलीग्राम ग्रुप में न जुड़े।
किसी भी अनजान या लालच वाली कॉल के झांसे में न आएं।
इंटरनेट से कस्टमर केयर नंबर न निकालें। कंपनी की अधिकारिक वेबसाइट से ही नंबर लें।
आपके किसी परिचित पर केस दर्ज हो जाने की बात कहकर कोई डराए तो पुलिस को बताएं।
किसी भी संदिग्ध एप को इंस्टॉल न करें।
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गाजियाबाद। शेयर ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच देकर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। इस बार साइबर अपराधियों ने इंदिरापुरम की डाॅक्टर मीतू शर्मा से 67.90 लाख रुपये ठग लिए हैं। उन्हें फंसाने के लिए लालच का जाल बिछाया गया। उनसे कहा गया कि 120 फीसदी का मुनाफा होगा। जालसाजों ने एप के डिजिटल वाॅलेट में एक करोड़ दिखा भी दिए लेकिन यह रकम सिर्फ दिखाने के लिए ही थी। जब मीतू इसे निकाल नहीं पाई तो उन्हें ठगी का अहसास हुआ लेकिन तब तक उनका खाता खाली हो चुका था।
साइबर थाने में उनकी ओर से दर्ज एफआईआर में बताया गया है कि जुलाई में उनके पास व्हाट्स एप काॅल आई। इस पर उनसे शेयर ट्रेडिंग करने पर मोटे मुनाफे का लालच दिया गया। वह राजी हो गईं तो उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ लिया गया। ग्रुप में पहले शेयर ट्रेडिंग के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें लगा कि ग्रुप में शेयर ट्रेडिंग के विशेषज्ञ हैं।
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इनमें से ही एक ने उनसे संपर्क किया। खुद को दिल्ली आईआईटी से पढ़ाई करने वाला बताते हुए उसने कहा कि वह न्यूयार्क में रहता है। यहां के शेयर मार्केट में भारत के मुकाबले बहुत ज्यादा कमाई है। डाॅक्टर मीतू का कहना है कि उसके कहने पर उन्होंने डाईवा सिक्योरिटी नाम का एप इंस्टॉल कर लिया। इसके बाद उनसे छोटी सी रकम निवेश कराई गई। इसके बदले 100 फीसदी मुनाफा दिया गया।
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ऐसा उनका भरोसा जीतने के लिए किया गया। इसका मकसद उनसे बड़ी रकम की ठगी करना था। अगले चरण में उनसे डाॅलर में रकम निवेश करने के लिए कहा गया और 67.90 लाख रुपये खाते में जमा करा लिए। एप के डिजिटल वाॅलेट में एक करोड़ नजर आ रहे थे। उन्होंने रकम निकालने की कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली। पूछने पर जवाब में कई नियम और शर्ते बता दी गईं। जालसाजों का लालच बढ़ता जा रहा था। उन्हें लग रहा था कि वह और रकम ठग सकते हैं।
रकम जमा नहीं कराई तो धमकाने लगे
अगले चरण में उनके नाम 2.60 करोड़ रुपये का आईपीओ जारी होने बताया गया। रकम जमा कराने के लिए कहा गया। डाॅक्टर का कहना है कि इतनी ज्यादा रकम उनके पास नहीं थी, इसलिए जमा नहीं कराई। इसके बाद ठगों ने दबाव बनाने के लिए कई मैसेज किए। काॅल करके धमकी दीं। 1.30 करोड़ का ऋण देने का लालच दिया लेकिन उन्होंने रकम जमा नहीं कराई। इस पर उन्हें कई दिन तक फोन पर परेशान किया गया। तब उन्हें अहसास हुआ कि वह ठग गिरोह का शिकार हो गई हैं। उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस से की और केस दर्ज कराया।
एडीसीपी अपराध सच्चिदानंद ने बताया कि जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई है। उनकी जानकारी निकलवाई जा रही है। ठगी गई रकम को फ्रीज कराने के लिए टीम लगी हैं।
दुबई, यूएई से चल रहे गिरोह
शेयर ट्रेडिंग के नाम पर और डिजिटल अरेस्ट करके ठगी करने वाले गिरोह दुबई, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कंबोडिया और थाईलैंड से चल रहे हैं। ऐसे मामलों की जांच के दौरान पुलिस को गिरोह की लोकेशन मिली है। ये गिरोह सिम और बैंक खाते भारत के लोगों के ही इस्तेमाल करते हैं। खाते और सिम खरीद लेते हैं।
10 करोड़ रुपये वापस कराए
ठगी होने के बाद जितनी जल्दी आप शिकायत दर्ज करा देंगे, उतनी ही संभावना ठगी गई रकम वापस मिलने की होगी। साइबर अपराध थाना खुलने के बाद पुलिस ठगी गई रकम को फ्रीज कराने पर जोर दे रही है। पुलिस ने 80 मामलों के पीड़ितों को 10 करोड़ रुपये वापस करा दिए हैं। रकम वापसी के बाद साइबर अपराधियों की पहचान की कोशिश शुरू होती है।
इन बातों का रखें ध्यान
- शेयर ट्रेडिंग के लिए अधिकारिक डीमेट अकाउंट का इस्तेमाल करें।
किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
किसी भी अनजान टेलीग्राम ग्रुप में न जुड़े।
किसी भी अनजान या लालच वाली कॉल के झांसे में न आएं।
इंटरनेट से कस्टमर केयर नंबर न निकालें। कंपनी की अधिकारिक वेबसाइट से ही नंबर लें।
आपके किसी परिचित पर केस दर्ज हो जाने की बात कहकर कोई डराए तो पुलिस को बताएं।
किसी भी संदिग्ध एप को इंस्टॉल न करें।