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Ghaziabad News: बूढ़े डॉक्टरों की घिसी अंगुली की रेखाएं, रोशनी बरकरार
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गाजियाबाद। सेवानिवृत्ति के बाद एमएमजी अस्पताल में पुनः सेवाएं दे रहे बुजुर्ग चिकित्सकों के लिए अब तक अंगुली के दबाव से उपस्थिति दर्ज कराना कठिन हो गया था। लंबे समय तक सेवा देने और उम्र बढ़ने के कारण कई चिकित्सकों की अंगुलियों की रेखाएं स्पष्ट नहीं रहीं। इससे उनकी पहचान यंत्र द्वारा नहीं हो पा रही थी। इस समस्या को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने नई व्यवस्था के तहत आंखों के नेत्र पटल के परीक्षण से उपस्थिति दर्ज कराने की सुविधा शुरू की है।
एमएमजी अस्पताल में लगभग 350 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें परिचारिकाएं, कक्ष सहायक, सहायक कर्मचारी और सफाईकर्मी शामिल हैं। इसके साथ ही 35 से अधिक चिकित्सक भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अभी तक सभी कर्मचारियों की उपस्थिति अंगुली के दबाव से दर्ज की जाती थी। इसके लिए प्रशासनिक कार्यालय और आपातकालीन कक्ष के बाहर पहचान यंत्र लगाए गए थे। पिछले कुछ समय से पांच वरिष्ठ चिकित्सकों की शिकायत सामने आई थी कि उनकी अंगुलियों की छाप यंत्र में मेल नहीं खा रही है। इसके कारण उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो पा रही थी और वेतन तैयार करने में भी कठिनाई आ रही थी। मजबूरी में उनके वेतन का निर्धारण हस्तलिखित विवरण के आधार पर किया जा रहा था।
एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि डॉक्टरों, परिचारिकाओं और अन्य कर्मचारियों को हाजिरी के लिए अंगुली दबाने के स्थान पर चेहरा सामने करना होगा। नेत्र पटल की पहचान के आधार पर उपस्थिति अपने आप दर्ज हो जाएगी। इस नई व्यवस्था से उन चिकित्सकों को राहत मिलेगी, जिनकी अंगुलियों की छाप बार-बार असफल हो रही थी। चिकित्सकों और कर्मचारियों की लगातार शिकायतों को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रशासन ने नई पहचान व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया। बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के कार्यालय के बाहर नेत्र पटल पहचान यंत्र स्थापित कर दिया गया है। प्रारंभिक दिनों में पुरानी और नई दोनों व्यवस्थाएं साथ-साथ चलेंगी, ताकि सभी कर्मचारी आसानी से नई प्रक्रिया को समझ सकें। सीएमएस का कहना है कि कुछ समय बाद पूरी तरह से आंखों के नेत्र पटल के आधार पर ही उपस्थिति दर्ज की जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और बुजुर्ग कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी से छुटकारा मिलेगा।
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एमएमजी अस्पताल में लगभग 350 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें परिचारिकाएं, कक्ष सहायक, सहायक कर्मचारी और सफाईकर्मी शामिल हैं। इसके साथ ही 35 से अधिक चिकित्सक भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अभी तक सभी कर्मचारियों की उपस्थिति अंगुली के दबाव से दर्ज की जाती थी। इसके लिए प्रशासनिक कार्यालय और आपातकालीन कक्ष के बाहर पहचान यंत्र लगाए गए थे। पिछले कुछ समय से पांच वरिष्ठ चिकित्सकों की शिकायत सामने आई थी कि उनकी अंगुलियों की छाप यंत्र में मेल नहीं खा रही है। इसके कारण उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो पा रही थी और वेतन तैयार करने में भी कठिनाई आ रही थी। मजबूरी में उनके वेतन का निर्धारण हस्तलिखित विवरण के आधार पर किया जा रहा था।
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एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि डॉक्टरों, परिचारिकाओं और अन्य कर्मचारियों को हाजिरी के लिए अंगुली दबाने के स्थान पर चेहरा सामने करना होगा। नेत्र पटल की पहचान के आधार पर उपस्थिति अपने आप दर्ज हो जाएगी। इस नई व्यवस्था से उन चिकित्सकों को राहत मिलेगी, जिनकी अंगुलियों की छाप बार-बार असफल हो रही थी। चिकित्सकों और कर्मचारियों की लगातार शिकायतों को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रशासन ने नई पहचान व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया। बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के कार्यालय के बाहर नेत्र पटल पहचान यंत्र स्थापित कर दिया गया है। प्रारंभिक दिनों में पुरानी और नई दोनों व्यवस्थाएं साथ-साथ चलेंगी, ताकि सभी कर्मचारी आसानी से नई प्रक्रिया को समझ सकें। सीएमएस का कहना है कि कुछ समय बाद पूरी तरह से आंखों के नेत्र पटल के आधार पर ही उपस्थिति दर्ज की जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और बुजुर्ग कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी से छुटकारा मिलेगा।
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