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अफसरों को भी नहीं पता अधूरे शौचालयों का सच

Thu, 28 Apr 2016 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Thu, 28 Apr 2016 12:23 AM IST
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Officers do not even know half the truth toilets
toilet - फोटो : अमर उजाला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन का सपना आखिर कैसे सच होगा, जब अफसर ही इसके लिए गंभीर नहीं हैं। जिला एमएमजी और संयुक्त जिला अस्पताल में दिव्यांगों के लिए बनाए जाने वाले शौचालय डेढ़ साल से अधूरे ही पडे़ हैं। खास बात यह है कि अधिकारियों को यह भी जानकारी नहीं है कि इनका निर्माण कौन सा विभाग करा रहा है।

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एमएमजी अस्पताल और संयुक्त जिला अस्पताल में दिव्यांगों के लिए शौचालयों का निर्माण शुरू हुआ था। पांच-पांच लाख की लागत से बनने वाले यह दोनों ही शौचालय करीब डेढ़ साल से अधूरे पडे़ हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो केंद्र सरकार की योजना के तहत कार्यदायी संस्था सिप्डा ने इनका निर्माण शुरू कराया था, जबकि समाज कल्याण विभाग देखरेख कर रहा था। समाज कल्याण अधिकारी परितोष श्रीवास्तव व विकलांग कल्याण अधिकारी संगीता सिंह का कहना है कि उनके विभाग द्वारा इन शौचालयों का निर्माण नहीं कराया गया है।
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इनका निर्माण कौन करा रहा है, इसकी भी जानकारी उन्हें नहीं है। बता दें कि नि:शक्त जनों की सुविधा के लिए अस्पतालों में पांच-पांच लाख की लागत से यह शौचालय बनाए जाने थे। इनमें सीढ़ियों के बजाए रैंप बनाया जा रहा था। सिर्फ पचास फीसदी ही बजट मिलने के कारण इनका निर्माण अधूरा रह गया।

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