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नोटबंदी ने लगाई नेताजी के खर्चे पर लगाम
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sat, 11 Feb 2017 01:21 AM IST
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चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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गाजियाबाद। चुनाव आयोग का डर कहें या नोटबंदी का असर, चुनाव मैदान में एक भी प्रत्याशी चुनाव आयोग की ओर से तय खर्च सीमा तक नहीं पहुंच सका। अधिकतर प्रत्याशी आयोग की तय धनराशि का एक चौथाई भी खर्च नहीं कर सके। हालांकि अभी तक प्रत्याशियों के खर्चे में बड़ी रैलियों के खर्च नहीं जोड़े गए हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मायावती, राहुल गांधी और अखिलेश यादव की रैली का खर्चा अभी प्रत्याशियों के खाते में जुड़ना बाकी है। बताया जा रहा है कि रैलियों के खर्च जुड़ने के बाद भी प्रत्याशियों का खर्च 28 लाख का आंकड़ा पार नहीं करेगा।
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हालांकि इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि इस बार चुनाव आयोग ने तय साफ कर दिया था कि कोई भी प्रत्याशी 20 हजार से ज्यादा का नगद लेने देन नहीं कर सकेगा। इससे ज्यादा का लेनदेन ऑनलाइन या चेक के माध्यम से ही किया जा सकेगा।
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मोदीनगर विधानसभा के सुदेश शर्मा और मंजू शिवाच को छोड़ दें तो अन्य सभी प्रत्याशियों के खर्च सात से नौ लाख रुपये तक ही सीमित रहे हैं। सुदेश शर्मा ने सबसे ज्यादा साढ़े 16 लाख और भाजपा प्रत्याशी मंजू शिवाच ने चौदह लाख रुपये खर्च किए हैं। जिला प्रशासन की कोषाध्यक्ष लक्ष्मी मिश्रा ने बताया कि अब बड़ी रैलियों का खर्चा जुटाया जा रहा है और उन्हें प्रत्याशियों के खर्चे में जोड़ा जाएगा।