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नेता जी! व्यापारियों को अपराध और भ्रष्टाचार से चाहिए मुक्ति
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
Updated Sun, 05 Feb 2017 12:38 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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जाम, सुरक्षा, सरकारी भ्रष्टाचार, डासना टोल ब्रिज पर अवैध उगाही, अतिक्रमण, साफ पानी, टूटी सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाएं पाने के लिए जूझ रहे व्यापारी अब चुप नहीं बैठेंगे। अगला विधायक वही होगा जो इन समस्याओं का खात्मा करेगा। व्यापारियों के बीच हर वक्त उपलब्ध रहेगा।
उनकी हर समस्या को पुरजोर तरीके से शासन और प्रशासन के बीच उठाएगा। अमर उजाला ने संवाद के जरिए व्यापारियों को एक मंच दिया, जिसमें उन्होंने बेबाक तरीके से अपनी समस्याएं और सुझाव रखे।
वर्ष 1976 को जिला बनने के बाद औद्योगिक नगरी गाजियाबाद की सूरत बदलती चली गई। शासन-प्रशासन की बेरुखी, जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण समस्याएं खत्म होने के बजाए बढ़ती ही गई। आज प्रदेश को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले गाजियाबाद का व्यापारी वर्ग खुद बुनियादी सुविधाएं पाने के लिए तरस रहा है।
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व्यापारियों का सबसे प्रमुख मुद्दा सुरक्षा को लेकर है। आए दिन होने वाली आपराधिक घटनाएं, लूटपाट से आजिज व्यापारी जब सुरक्षा के लिए पुलिस के पास जाता है तो उसे वहां भी ठगा ही जाता है। पुलिस भी घटना खोलने बजाए उलटे व्यापारी से ही अवैध उगाही करने लग जाती है।
यही काम वाणिज्य कर अधिकारी भी करते हैं। नगर निगम हो या बिजली विभाग हर जगह व्यापारियों को सॉफ्ट टारगेट पर रखा जाता है। विभिन्न व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने अपनी प्रमुख समस्याएं और सुझाव अमर उजाला संवाद में रखे।
- प्रमुख समस्याएं
खराब कानून व्यवस्था, लाइनपार क्षेत्र के बाजारों के साथ शहर के प्रमुख बाजारों में टूटी सड़कें, बरसात के दिनों में जलभराव, बिजली कटौती, बाजारों में शौचालय और साफ पानी की कमी, डासना टोल ब्रिज पर हो रही अवैध उगाही। यदि ये समस्याएं खत्म हो जाएं तो व्यापारी दोगुनी ताकत से व्यापार करेगा और प्रदेश को राजस्व देगा।
- बोले व्यापारी
- महानगर में सुरक्षा जीरो है। यहां के अधिकारी नोएडा जाकर काम करते हैं। इसका मतलब है कि अधिकारी यहां काम ही नहीं करना चाहता। अधिकारी सिर्फ भ्रष्टाचार करके जेब भरने का काम करते हैं। - राजदेव त्यगी
- विकास कागजों में होता है। बसंत रोड पिछले ढाई वर्ष से टूटी पड़ी है। मेयर और न ही नगर आयुक्त ने इस ओर ध्यान दिया। विधायक हो या मेयर उसे निष्पक्ष होकर विकास करना चाहिए। - गोपीचंद
- विधायक पढ़ा लिखा हो। शहर के लोगों का दुख दर्द जाने। 30 वर्ष पहले जनपद में बड़ी इंडस्ट्रीज थीं, लेकिन वह आज यहां से पलायन कर गईं। स्थिति न सुधारी गई तो और बदतर हो जाएगी। - अशोक चावला
- व्यापारियों की समस्याएं जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी दोनों सुनें। इन्हीं के प्रयासों से शहर की सूरत बदली जा सकती है।- दीपक अग्रवाल
- जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं की जानकारी होनी चाहिए। यदि बाहरी व्यक्ति विधायक या एमपी बनता है तो उसे गंभीरता से नहीं लेगा। - अशोक शर्मा
- कानून व्यवस्था और सरकारी भ्रष्टाचार खत्म हो जाए तो गाजियाबाद चमक सकता है। विधायक बेखौफ विधानसभा में इन मुद्दों को उठाए, प्रशासन को सख्त करे तभी बात बनेगी।- धनेश सिंघल
- शहर में जाम का प्रमुख कारण है कि यहां ट्रांसपोर्ट नगर नहीं है। वाहन सड़कों पर खड़े रहते हैं। पुलिस प्रशासन उगाही में लगा रहता है। ट्रैफिक का मूवमेंट नहीें होता। इस व्यवस्था को बदलना होगा। -संजय गोयल
- नेता जनता के बीच का होना चाहिए। इससे कई फायदे होंगे। वह जीतकर लखनऊ या दिल्ली जाकर हमेशा के लिए नहीं बैठेगा। क्षेत्र के विकास और समस्याओं को खत्म करने के लिए भी काम करेगा। - अरुण शर्मा
- व्यापारी को जाति-धर्म और पार्टी नीति को छोड़कर अपना विधायक चुनना चाहिए। इसके लिए हमें जागरूक होना पड़ेगा।- प्रवीन बत्रा
- अधिकारी लखनऊ में रिश्वत देकर गाजियाबाद पोस्टिंग कराते हैं। इसके बाद वह खुद उगाही और व्यापारियों का उत्पीड़न कर भ्रष्टाचार करते हैं। व्यापारियों के हित के लिए व्यापारिक आयोग बनना चाहिए।-अशोक भारतीय
- पुलिस जब भैंस ढूंढ सकती है तो बदमाशों को क्यों नहीं। व्यापारी हमेशा टारगेट पर रहता है। इसलिए वह पीसा जाता है। जनप्रतिनिधियों को सबको साथ लेकर शहर को सुंदर बनाने की कोशिश करनी चाहिए।- गुलशन भांबरी
- व्यापार करने के लिए अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत है। व्यापार पलायन तभी करता है जब उसे असुरक्षा की भावना और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाती। इस सूरत को बदलना होगा। -प्रीतम लाल
- विधायक का काम कानून व्यवस्था बनाना, व्यापारियों के साथ आम जनता की समस्याएं सुनना और उसका निराकरण कराना। बीते वर्षों में ऐसा कुछ नहीं हुआ। डंडे के बल पर ही काम होता है। - तिलक राज अरोड़ा
- व्यापारी वर्ग एकजुट होगा तभी हम अपनी बात जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचा पाएंगे और मांगे पूरी होंगी। - सतेंद्र चौधरी
- व्यापारियों को दबाव बनाना पड़ेगा कि विधायक, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी दो माह में एक बार व्यापारियों के साथ बैठक करे और उनकी समस्याएं सुने। - गौरव शर्मा
- विधायक ऐसा हो जो व्यापारिक आयोग बनाने के लिए सकारात्मक कदम उठाए। राजस्व देने वाला वर्ग ही बेसहारा होगा तो कैसे काम होगा। - उदम सिंह
- समस्याएं तभी खत्म होगी जब विधायक अपने विवेक से प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के बीच सामंजस्य बैठाए और उनकी मांगें पूरी करवाए।- अभिषेक ठाकुर
- सरकारी भ्रष्टाचार खत्म करे ऐसा विधायक चाहिए। इसी की वजह से विकास की राह रुकती है। अधिकारी मनमाने तरीके से काम करते हैं। - डा. रघुराज चौधरी
इन व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने लिया भाग
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल, संयुक्त व्यापार मंडल, युवा उद्योग व्यापार मंडल, गाजियाबाद केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन, महानगर उद्योग व्यापार मंडल और गाजियाबाद केमिस्ट एसोसिएशन।
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उनकी हर समस्या को पुरजोर तरीके से शासन और प्रशासन के बीच उठाएगा। अमर उजाला ने संवाद के जरिए व्यापारियों को एक मंच दिया, जिसमें उन्होंने बेबाक तरीके से अपनी समस्याएं और सुझाव रखे।
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वर्ष 1976 को जिला बनने के बाद औद्योगिक नगरी गाजियाबाद की सूरत बदलती चली गई। शासन-प्रशासन की बेरुखी, जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण समस्याएं खत्म होने के बजाए बढ़ती ही गई। आज प्रदेश को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले गाजियाबाद का व्यापारी वर्ग खुद बुनियादी सुविधाएं पाने के लिए तरस रहा है।
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व्यापारियों का सबसे प्रमुख मुद्दा सुरक्षा को लेकर है। आए दिन होने वाली आपराधिक घटनाएं, लूटपाट से आजिज व्यापारी जब सुरक्षा के लिए पुलिस के पास जाता है तो उसे वहां भी ठगा ही जाता है। पुलिस भी घटना खोलने बजाए उलटे व्यापारी से ही अवैध उगाही करने लग जाती है।
यही काम वाणिज्य कर अधिकारी भी करते हैं। नगर निगम हो या बिजली विभाग हर जगह व्यापारियों को सॉफ्ट टारगेट पर रखा जाता है। विभिन्न व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने अपनी प्रमुख समस्याएं और सुझाव अमर उजाला संवाद में रखे।
- प्रमुख समस्याएं
खराब कानून व्यवस्था, लाइनपार क्षेत्र के बाजारों के साथ शहर के प्रमुख बाजारों में टूटी सड़कें, बरसात के दिनों में जलभराव, बिजली कटौती, बाजारों में शौचालय और साफ पानी की कमी, डासना टोल ब्रिज पर हो रही अवैध उगाही। यदि ये समस्याएं खत्म हो जाएं तो व्यापारी दोगुनी ताकत से व्यापार करेगा और प्रदेश को राजस्व देगा।
- बोले व्यापारी
- महानगर में सुरक्षा जीरो है। यहां के अधिकारी नोएडा जाकर काम करते हैं। इसका मतलब है कि अधिकारी यहां काम ही नहीं करना चाहता। अधिकारी सिर्फ भ्रष्टाचार करके जेब भरने का काम करते हैं। - राजदेव त्यगी
- विकास कागजों में होता है। बसंत रोड पिछले ढाई वर्ष से टूटी पड़ी है। मेयर और न ही नगर आयुक्त ने इस ओर ध्यान दिया। विधायक हो या मेयर उसे निष्पक्ष होकर विकास करना चाहिए। - गोपीचंद
- विधायक पढ़ा लिखा हो। शहर के लोगों का दुख दर्द जाने। 30 वर्ष पहले जनपद में बड़ी इंडस्ट्रीज थीं, लेकिन वह आज यहां से पलायन कर गईं। स्थिति न सुधारी गई तो और बदतर हो जाएगी। - अशोक चावला
- व्यापारियों की समस्याएं जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी दोनों सुनें। इन्हीं के प्रयासों से शहर की सूरत बदली जा सकती है।- दीपक अग्रवाल
- जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं की जानकारी होनी चाहिए। यदि बाहरी व्यक्ति विधायक या एमपी बनता है तो उसे गंभीरता से नहीं लेगा। - अशोक शर्मा
- कानून व्यवस्था और सरकारी भ्रष्टाचार खत्म हो जाए तो गाजियाबाद चमक सकता है। विधायक बेखौफ विधानसभा में इन मुद्दों को उठाए, प्रशासन को सख्त करे तभी बात बनेगी।- धनेश सिंघल
- शहर में जाम का प्रमुख कारण है कि यहां ट्रांसपोर्ट नगर नहीं है। वाहन सड़कों पर खड़े रहते हैं। पुलिस प्रशासन उगाही में लगा रहता है। ट्रैफिक का मूवमेंट नहीें होता। इस व्यवस्था को बदलना होगा। -संजय गोयल
- नेता जनता के बीच का होना चाहिए। इससे कई फायदे होंगे। वह जीतकर लखनऊ या दिल्ली जाकर हमेशा के लिए नहीं बैठेगा। क्षेत्र के विकास और समस्याओं को खत्म करने के लिए भी काम करेगा। - अरुण शर्मा
- व्यापारी को जाति-धर्म और पार्टी नीति को छोड़कर अपना विधायक चुनना चाहिए। इसके लिए हमें जागरूक होना पड़ेगा।- प्रवीन बत्रा
- अधिकारी लखनऊ में रिश्वत देकर गाजियाबाद पोस्टिंग कराते हैं। इसके बाद वह खुद उगाही और व्यापारियों का उत्पीड़न कर भ्रष्टाचार करते हैं। व्यापारियों के हित के लिए व्यापारिक आयोग बनना चाहिए।-अशोक भारतीय
- पुलिस जब भैंस ढूंढ सकती है तो बदमाशों को क्यों नहीं। व्यापारी हमेशा टारगेट पर रहता है। इसलिए वह पीसा जाता है। जनप्रतिनिधियों को सबको साथ लेकर शहर को सुंदर बनाने की कोशिश करनी चाहिए।- गुलशन भांबरी
- व्यापार करने के लिए अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत है। व्यापार पलायन तभी करता है जब उसे असुरक्षा की भावना और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाती। इस सूरत को बदलना होगा। -प्रीतम लाल
- विधायक का काम कानून व्यवस्था बनाना, व्यापारियों के साथ आम जनता की समस्याएं सुनना और उसका निराकरण कराना। बीते वर्षों में ऐसा कुछ नहीं हुआ। डंडे के बल पर ही काम होता है। - तिलक राज अरोड़ा
- व्यापारी वर्ग एकजुट होगा तभी हम अपनी बात जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचा पाएंगे और मांगे पूरी होंगी। - सतेंद्र चौधरी
- व्यापारियों को दबाव बनाना पड़ेगा कि विधायक, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी दो माह में एक बार व्यापारियों के साथ बैठक करे और उनकी समस्याएं सुने। - गौरव शर्मा
- विधायक ऐसा हो जो व्यापारिक आयोग बनाने के लिए सकारात्मक कदम उठाए। राजस्व देने वाला वर्ग ही बेसहारा होगा तो कैसे काम होगा। - उदम सिंह
- समस्याएं तभी खत्म होगी जब विधायक अपने विवेक से प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के बीच सामंजस्य बैठाए और उनकी मांगें पूरी करवाए।- अभिषेक ठाकुर
- सरकारी भ्रष्टाचार खत्म करे ऐसा विधायक चाहिए। इसी की वजह से विकास की राह रुकती है। अधिकारी मनमाने तरीके से काम करते हैं। - डा. रघुराज चौधरी
इन व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने लिया भाग
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल, संयुक्त व्यापार मंडल, युवा उद्योग व्यापार मंडल, गाजियाबाद केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन, महानगर उद्योग व्यापार मंडल और गाजियाबाद केमिस्ट एसोसिएशन।