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Ghaziabad News: नगर निगम ने की वेव सिटी पर संपत्ति कर लगाने की तैयारी
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गाजियाबाद। वेव सिटी की आवासीय और गैर आवासीय संपत्तियों पर कर लगाने की तैयारी नगर निगम ने शुरू कर दी है। इस संबंध में जल्द ही शासनादेश जारी होने के आसार हैं। शासन से औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद वेव सिटी से नगर निगम को शुरुआत में करीब 10 करोड़ रुपया राजस्व मिलने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि अगले महीने से संपत्ति कर के बिल जारी होने से शुरू हो जाएंगे।
दरअसल, हाईटेक टाउनशिप वेव सिटी का हस्तांतरण होने तक स्थानीय निकाय की ओर से जल कर, गृह कर, सीवरेज कर की वसूली नहीं किए जाने के प्रावधान को समाप्त/संशोधन करने के अनुरोध के मामले में शासन की ओर से समिति सुनवाई कर रही थी। गाजियाबाद नगर निगम की तरफ से नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक और मुख्य कर अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा समिति की बैठकों में सम्मिलित होकर मजबूती से पक्ष रख रहे थे।
टाउनशिप हस्तांतरित होने तक कर वसूलने के प्रावधान को समाप्त करने के पुराने शासनादेश में सुधार करने के लिए कई दौर की बैठकों के बाद नगर निगम को कामयाबी मिली है। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने बताया कि इंदिरापुरम और क्रॉसिंग रिपब्लिक का हस्तांतरण अब तक नगर निगम को नहीं हुआ है लेकिन इन दोनों ही जगह संपत्ति कर नगर निगम वसूल रहा है। ऐसे ही अब वेव सिटी में भी संपत्ति कर लगाया जाएगा। शासन स्तर पर फैसला हो चुका है। शासनादेश इसी माह जारी हो जाएगा और अगले महीने से बिल जारी किए जाएंगे।
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क्या है मामला
दरअसल, साल 2007 में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने हाईटेक टाउनशिप नीति का निर्धारण करने का शासनादेश जारी किया था। विकासकर्ता कंपनियों को साल 2011 से सात वर्ष की अवधि के लिए हस्तांतरण होने तक स्थानीय निकाय की ओर से जल कर, गृह कर, सीवरेज कर आदि से छूट का प्रावधान किया गया था। साल 2016 में अवधि दस साल तक कर दी गई। इसके बाद साल 2021 में एक बार फिर पांच वर्ष की अवधि बढ़ाने का प्रावधान कर दिया गया।
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महापौर के पत्राचार के बाद कवायद शुरू
28 नवंबर 2023 को महापौर सुनीता दयाल ने वेव सिटी का संपत्ति कर जमा न होने और कचरा निस्तारण न होने का मामला नगर विकास मंत्री के समक्ष उठाया था। पत्र के माध्यम से महापौर ने बताया था कि वेव सिटी में भवनों के निर्माण से करोड़ों रुपये की आय विकासकर्ता अर्जित कर रहा है। पांच हजार भवनों का कचरा वेव सिटी के बाहर डाला जा रहा है, जिसका निस्तारण नगर निगम को करना पड़ रहा है। नगर निकाय को हस्तांतरण होने तक कर नहीं लगाए जाने के प्रावधान को समाप्त किया जाना चाहिए।
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यूनानी अस्पताल से वसूला तीन करोड़ का कर
मुख्य संपत्ति कर अधिकारी ने बताया कि सरकारी विभागों से कर वसूलने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। पहले बिल भेजे गए थे। भुगतान नहीं होने पर नोटिस भेजे जा रहे हैं। इसी कड़ी में यूनानी अस्पताल से करीब तीन करोड़ रुपया संपत्ति कर वसूला गया है।
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दरअसल, हाईटेक टाउनशिप वेव सिटी का हस्तांतरण होने तक स्थानीय निकाय की ओर से जल कर, गृह कर, सीवरेज कर की वसूली नहीं किए जाने के प्रावधान को समाप्त/संशोधन करने के अनुरोध के मामले में शासन की ओर से समिति सुनवाई कर रही थी। गाजियाबाद नगर निगम की तरफ से नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक और मुख्य कर अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा समिति की बैठकों में सम्मिलित होकर मजबूती से पक्ष रख रहे थे।
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टाउनशिप हस्तांतरित होने तक कर वसूलने के प्रावधान को समाप्त करने के पुराने शासनादेश में सुधार करने के लिए कई दौर की बैठकों के बाद नगर निगम को कामयाबी मिली है। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने बताया कि इंदिरापुरम और क्रॉसिंग रिपब्लिक का हस्तांतरण अब तक नगर निगम को नहीं हुआ है लेकिन इन दोनों ही जगह संपत्ति कर नगर निगम वसूल रहा है। ऐसे ही अब वेव सिटी में भी संपत्ति कर लगाया जाएगा। शासन स्तर पर फैसला हो चुका है। शासनादेश इसी माह जारी हो जाएगा और अगले महीने से बिल जारी किए जाएंगे।
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क्या है मामला
दरअसल, साल 2007 में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने हाईटेक टाउनशिप नीति का निर्धारण करने का शासनादेश जारी किया था। विकासकर्ता कंपनियों को साल 2011 से सात वर्ष की अवधि के लिए हस्तांतरण होने तक स्थानीय निकाय की ओर से जल कर, गृह कर, सीवरेज कर आदि से छूट का प्रावधान किया गया था। साल 2016 में अवधि दस साल तक कर दी गई। इसके बाद साल 2021 में एक बार फिर पांच वर्ष की अवधि बढ़ाने का प्रावधान कर दिया गया।
महापौर के पत्राचार के बाद कवायद शुरू
28 नवंबर 2023 को महापौर सुनीता दयाल ने वेव सिटी का संपत्ति कर जमा न होने और कचरा निस्तारण न होने का मामला नगर विकास मंत्री के समक्ष उठाया था। पत्र के माध्यम से महापौर ने बताया था कि वेव सिटी में भवनों के निर्माण से करोड़ों रुपये की आय विकासकर्ता अर्जित कर रहा है। पांच हजार भवनों का कचरा वेव सिटी के बाहर डाला जा रहा है, जिसका निस्तारण नगर निगम को करना पड़ रहा है। नगर निकाय को हस्तांतरण होने तक कर नहीं लगाए जाने के प्रावधान को समाप्त किया जाना चाहिए।
यूनानी अस्पताल से वसूला तीन करोड़ का कर
मुख्य संपत्ति कर अधिकारी ने बताया कि सरकारी विभागों से कर वसूलने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। पहले बिल भेजे गए थे। भुगतान नहीं होने पर नोटिस भेजे जा रहे हैं। इसी कड़ी में यूनानी अस्पताल से करीब तीन करोड़ रुपया संपत्ति कर वसूला गया है।