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मां ने मांगी बेटे की इच्छामृत्यु: 12 साल से बिस्तर पर है हरीश, इलाज में मकान तक बिक गया; अब नहीं देख पा रही

Thu, 15 Jan 2026 07:18 PM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजियाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजियाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 15 Jan 2026 07:18 PM IST
सार

31 वर्षीय हरीश राणा पिछले 12 साल से कोमा में है। हरीश अब न वह बोल सकता है, न चल। इलाज, उम्मीद और इंतजार के लंबे सफर के बाद अब उनके माता-पिता अदालत से यही कह रहे हैं कि अगर बेटे को सम्मानपूर्वक जीवन नहीं मिल सका, तो कम से कम इच्छामृत्यु तो मिल जाए।

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Mother in Ghaziabad seeks euthanasia for son from Supreme Court
पीड़त हरीश व उनके माता-पिता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज अंपायर में रहने वाले 31 वर्षीय हरीश राणा की सांसें तो चल रहीं, लेकिन वह 2013 से बिस्तर पर हैं। क्वाड्रिप्लेजिया बीमारी से पीड़ित हरीश 100 प्रतिशत दिव्यांग हैं और उनका शरीर निष्क्रिय है। हरीश की मां निर्मला देवी ने बेटे को इच्छा मृत्यु के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई, लेकिन 8 जुलाई को कोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी थी। थक हार कर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जहां आज कुछ अलग निर्णय आने की उम्मीद है।

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रक्षाबंधन के दिन चौथी मंजिल से गिर गया था हरीश
पिता अशोक राणा ने बताया कि वर्ष 2013 में रक्षाबंधन के दिन बेटा पीजी की चौथी मंजिल से गिर गया था। जिससे सिर और कमर में गंभीर चोट आई थी। उस समय ऐसा बिल्कुल नहीं लगा था कि अब वह कभी उठ नहीं पाएगा। 12 साल से बेटे का इलाज कराने के साथ उनकी सेवा में लगे हैं। बेटे का इलाज पीजीआई चंडीगढ़, एम्स, आरएमएल, एलएनजेपी और अपोलो जैसे तमाम अस्पतालों में करा चुके हैं, लेकिन हरीश को कोई फायदा नहीं हुआ।

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इलाज में बिक गया तीन मंजिला मकान
अशोक राणा ने बताया कि दिल्ली महावीर एंक्लेव में उनका तीन मंजिला मकान था, जो सितंबर 2021 में बेच दिया। अब और इलाज कराने की आर्थिक क्षमता नहीं रही। उम्र ढल रही है। हमेशा बेटे के साथ नहीं रह सकते। बेटे के लिए मौत मांगना आसान नहीं है, लेकिन हर दिन उसकी मौत नहीं देख पाते।

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सरकार ले जिम्मेदारी या दे इच्छामृत्यु
उनका कहना है कि अब वह सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाएंगे। जहां से उन्हें उम्मीद है कि जरूर मदद मिलेगी। सरकार उनके बेटे के इलाज एवं देखरेख की जिम्मेदारी ले या वह चाहते हैं कि उनके बेटे को इच्छा मृत्यु दी जाए। हरीश के शरीर के जो अंग काम कर रहे हैं उनको दान कर दूसरों को नया जीवन दिया जाए।

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