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Ghaziabad News: मोबाइल फोन, लैपटॉप और घंटों बैठने की आदत रीढ़ पर पड़ रही भारी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2026 02:45 AM IST
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Mobile phones, laptops, and the habit of sitting for hours are taking a heavy toll on the spine.

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गाजियाबाद। बदलती जीवनशैली, घंटों मोबाइल फोन और लैपटॉप का इस्तेमाल, ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करना और शारीरिक गतिविधियों में कमी लोगों की रीढ़ की सेहत को प्रभावित कर रही है। कमर दर्द और गर्दन में अकड़न जैसी समस्याएं अब केवल अधिक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं हैं। युवा, विद्यार्थी, डिलीवरी कर्मी, कैब चालक और लंबे समय तक डेस्क पर काम करने वाले लोग भी इन परेशानियों का सामना कर रहे हैं। जिला एमएमजी अस्पताल में रोजाना 120 से 140 लोग फिजियोथेरेपी और इलाज के लिए आ रहे हैं। विश्व स्पाइन दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने रीढ़ की सेहत के प्रति जागरूक रहने और समय रहते सावधानी बरतने की सलाह दी।



स्पाइन विशेषज्ञ डॉ. अजय पवार का कहना है कि रीढ़ की हड्डी शरीर को सहारा देने के साथ चलने-फिरने और दैनिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना, मोबाइल फोन देखते समय गर्दन झुकाकर रखना और गलत पोश्चर में काम करना मांसपेशियों पर दबाव बढ़ा सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि की कमी और काम के दौरान पर्याप्त अंतराल न लेना भी परेशानी बढ़ा सकता है। युवाओं को दर्द को सामान्य थकान मानकर लगातार नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि दर्द लंबे समय तक बना रहे या उसके साथ हाथ-पैर में कमजोरी, सुन्नपन जैसी परेशानी हो तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
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एक ही मुद्रा में देर तक बैठने से बचें



एमएमजी अस्पताल के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. सैय्यद जोहर अली नकवी ने बताया कि रीढ़ को स्वस्थ रखने के लिए बैठने, खड़े होने और काम करने के तरीके पर ध्यान देना जरूरी है। कंप्यूटर स्क्रीन आंखों के स्तर के आसपास होनी चाहिए और बैठते समय पीठ को उचित सहारा मिलना चाहिए। लगातार बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठकर चलना और नियमित रूप से व्यायाम करना लाभकारी हो सकता है। बच्चों के स्कूल बैग का वजन और उसे उठाने का तरीका भी ध्यान देने योग्य है। वहीं, बाइक और कैब चलाने वाले लोगों को भी लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहने से बचना चाहिए।
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डॉ. नकवी ने बताया कि अध्ययनों में भी कम उम्र में कमर दर्द की समस्या सामने आई है। दिल्ली के एक मेडिकल कॉलेज में 17 से 25 वर्ष के 160 विद्यार्थियों पर किए गए अध्ययन में 47.5 प्रतिशत विद्यार्थियों ने पिछले एक वर्ष के दौरान कमर दर्द होने की जानकारी दी थी। अध्ययन में गलत बैठने की मुद्रा और पढ़ाई की आदतों का भी संबंध सामने आया। यह अध्ययन वर्ष 2013 में प्रकाशित हुआ था। यह स्थिति शारीरिक श्रम की कमी के कारण भी हो रही है।




इलाज के बजाय पोश्चर पर दें ध्यान



संयुक्त जिला अस्पताल के अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएन सिंह का कहना है कि रीढ़ की सेहत बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम, सही पोश्चर, काम के बीच छोटे अंतराल और संतुलित दिनचर्या जरूरी है। लगातार दर्द होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। स्पाइन डे का उद्देश्य लोगों को रीढ़ से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूक करना और समय रहते बचाव के लिए प्रेरित करना है।
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