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Ghaziabad News: मौसम बदलते ही बढ़ा माइग्रेन का दर्द, महिलाओं में ज्यादा परेशानी
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गाजियाबाद। मौसम में बदलाव का असर माइग्रेन मरीजों पर दिखने लगा है। तापमान में उतार-चढ़ाव, वायुदाब में बदलाव और तेज धूप से सिरदर्द की शिकायत बढ़ गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में करीब 25 फीसदी महिलाएं सिरदर्द और माइग्रेन की शिकायत लेकर आ रही हैं। रोजाना 40 से 45 महिलाएं इसी परेशानी के साथ पहुंच रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार मौसम बदलने के दौरान तापमान और वायुदाब में अचानक बदलाव संवेदनशील लोगों में माइग्रेन अटैक ट्रिगर कर सकता है। अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्थ उपाध्याय ने बताया कि संजय गांधी पीजीआई लखनऊ के न्यूरोलॉजी विभाग ने 182 माइग्रेन मरीजों पर अध्ययन किया था, जिसमें 131 महिलाएं थीं। इसमें 10.1 फीसदी मरीजों ने मौसम में बदलाव को ट्रिगर बताया। तनाव, उपवास, शारीरिक थकान और नींद की कमी भी प्रमुख ट्रिगर पाए गए। यह अध्ययन पेन मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुआ था। महिलाओं में मौसम को ट्रिगर के रूप में पुरुषों की तुलना में ज्यादा रिपोर्ट किया गया। हार्मोनल बदलाव भी माइग्रेन की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ा सकते हैं।
संजय नगर संयुक्त अस्पताल के वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएन सिंह ने बताया कि तापमान में अचानक बदलाव से शरीर के तापमान नियंत्रण की क्षमता प्रभावित होती है। तेज धूप, गर्मी, ठंडी हवा और पानी की कमी भी सिरदर्द बढ़ा सकती है। मरीजों को पर्याप्त पानी पीना चाहिए और तेज धूप में सीधे निकलने से बचना चाहिए। एमएमजी अस्पताल के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. सैय्यद जोहर अली नकवी ने बताया कि गर्दन और कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव भी दर्द बढ़ा सकता है। लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर पर झुककर बैठने से परेशानी बढ़ती है। हल्की एक्सरसाइज, गर्दन-कंधों की स्ट्रेचिंग और पर्याप्त आराम से तनाव कम किया जा सकता है।
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ऐसे करें बचाव
पर्याप्त पानी पीते रहें। नींद का समय नियमित रखें और खाना न छोड़ें। तेज धूप, ज्यादा गर्मी या ठंड से बचें। सिरदर्द की डायरी बनाकर मौसम, नींद, खानपान और दर्द के बीच संबंध नोट करें, इससे ट्रिगर की पहचान आसान होगी। हर मौसम परिवर्तन को माइग्रेन का सीधा कारण मानना सही नहीं है, ट्रिगर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है।
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विशेषज्ञों के अनुसार मौसम बदलने के दौरान तापमान और वायुदाब में अचानक बदलाव संवेदनशील लोगों में माइग्रेन अटैक ट्रिगर कर सकता है। अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्थ उपाध्याय ने बताया कि संजय गांधी पीजीआई लखनऊ के न्यूरोलॉजी विभाग ने 182 माइग्रेन मरीजों पर अध्ययन किया था, जिसमें 131 महिलाएं थीं। इसमें 10.1 फीसदी मरीजों ने मौसम में बदलाव को ट्रिगर बताया। तनाव, उपवास, शारीरिक थकान और नींद की कमी भी प्रमुख ट्रिगर पाए गए। यह अध्ययन पेन मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुआ था। महिलाओं में मौसम को ट्रिगर के रूप में पुरुषों की तुलना में ज्यादा रिपोर्ट किया गया। हार्मोनल बदलाव भी माइग्रेन की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ा सकते हैं।
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संजय नगर संयुक्त अस्पताल के वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएन सिंह ने बताया कि तापमान में अचानक बदलाव से शरीर के तापमान नियंत्रण की क्षमता प्रभावित होती है। तेज धूप, गर्मी, ठंडी हवा और पानी की कमी भी सिरदर्द बढ़ा सकती है। मरीजों को पर्याप्त पानी पीना चाहिए और तेज धूप में सीधे निकलने से बचना चाहिए। एमएमजी अस्पताल के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. सैय्यद जोहर अली नकवी ने बताया कि गर्दन और कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव भी दर्द बढ़ा सकता है। लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर पर झुककर बैठने से परेशानी बढ़ती है। हल्की एक्सरसाइज, गर्दन-कंधों की स्ट्रेचिंग और पर्याप्त आराम से तनाव कम किया जा सकता है।
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ऐसे करें बचाव
पर्याप्त पानी पीते रहें। नींद का समय नियमित रखें और खाना न छोड़ें। तेज धूप, ज्यादा गर्मी या ठंड से बचें। सिरदर्द की डायरी बनाकर मौसम, नींद, खानपान और दर्द के बीच संबंध नोट करें, इससे ट्रिगर की पहचान आसान होगी। हर मौसम परिवर्तन को माइग्रेन का सीधा कारण मानना सही नहीं है, ट्रिगर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है।