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दंपती के वैवाहिक विवाद में नया मोड़: पत्नी ने मांगा एक करोड़ गुजारा भत्ता, आठ साल पहले की थी लव मैरिज

Tue, 28 Apr 2026 11:04 PM IST
Akash Dubey माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद
माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद Published by: Akash Dubey Updated Tue, 28 Apr 2026 11:04 PM IST
सार

इंदिरापुरम में उच्च शिक्षित दंपती का वैवाहिक विवाद समझौते तक नहीं पहुंचा। पति के साथ रहने से इन्कार पर महिला ने एक करोड़ रुपये गुजारा भत्ता मांगा है।

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Marital Dispute of Couple wife demands Rs one crore as alimony
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI Generated

विस्तार

गाजियाबाद के इंदिरापुरम में उच्च शिक्षित एक दंपती के बीच चल रहा वैवाहिक विवाद अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां समझौते की संभावनाएं कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं। मध्यस्थता केंद्र में काउंसलिंग के कई दौर के बावजूद दोनों में सहमति नहीं बन सकी। हालिया काउंसलिंग में पति के साथ रखने से इन्कार करने के बाद महिला ने एक करोड़ रुपये गुजारा भत्ता की मांग रख दी है। इससे मामला और संवेदनशील हो गया है। दोनों ने आठ वर्ष पूर्व प्रेम विवाह किया था।

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जानकारी के अनुसार दोनों की मुलाकात एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी के दौरान हुई थी। धीरे-धीरे यह मुलाकात प्रेम में बदली और वर्ष 2018 में परिवार की सहमति से दोनों ने विवाह कर लिया। शादी के कुछ दिन बाद रिश्तों में तनाव बढ़ने लगा। पति का आरोप है कि पत्नी अन्य युवकों के संपर्क में है, इससे वैवाहिक जीवन प्रभावित हुआ है। वहीं, पत्नी का कहना है कि पति उस पर बेवजह शक करता है और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है। 

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इन आरोपों के चलते दोनों के बीच दूरी बढ़ती गई और एक वर्ष से दोनों अलग रह रहे हैं। महिला ने पति के खिलाफ उत्पीड़न का मामला भी दर्ज कराया है। वर्तमान में यह मामला मध्यस्थता केंद्र में विचाराधीन है, जहां दोनों पक्षों की काउंसलिंग कराई जा रही है। हालांकि हाल की में हुई बैठक में पति ने स्पष्ट कर दिया कि वह पत्नी को साथ नहीं रखना चाहता। इसके बाद पत्नी ने गुजारा भत्ता के रूप में एक करोड़ रुपये की राशि मांग ली है।

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संवाद की कमी से बढ़ रहा अविश्वास
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में संवाद की कमी और आपसी अविश्वास संबंधों को कमजोर कर देता है। एमएमजी अस्पताल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ चंदा यादव का कहना है कि समय रहते आपसी बातचीत और पेशेवर काउंसलिंग से कई रिश्तों को टूटने से बचाया जा सकता है, लेकिन जब विवाद लंबा खिंच जाता है तो समाधान कठिन हो जाता है।

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