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Ghaziabad News: नहीं मिल रही एलपीजी, दो की जगह एक शिफ्ट चल रहीं फैक्टरियां
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गाजियाबाद। ईरान और इस्रायल के युद्ध की वजह से शुरू हुआ एलपीजी संकट अब उद्योगों पर गहराता जा रहा है। हालात यह हैं कि दो शिफ्टों में चलने वाली फैक्टरियां अब एक शिफ्ट में चल रही हैं। सबसे ज्यादा लोहे-स्टील को मोल्ड करने वाली, ढलाई करने वाली फेब्रिकेशन की फर्मों पर असर पड़ा है। उद्यमियों के मुताबिक करीब एक हजार करोड़ के ऑर्डर फंसे हुए हैं। एलपीजी संकट की वजह से ऑर्डर समय से पूरे नहीं हो रहे हैं।
जिले में फेब्रिकेशन से संबंधित करीब 4000 इकाइयां हैं। बीएस रोड औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष आरोड़ा का कहना है कि फर्निस से चलने वाली फैक्टरियों में भट्ठी को गरम करने के लिए एलपीजी की जरूरत होती है। कॉमर्शियल एलपीजी महंगी होने के बावजूद गैस सिलिंडर की किल्लत बनी हुई है। हालात यह हैं कि ज्यादातर फैक्टरियां बंदी की कगार पर पहुंच गई हैं।
श्रमिकों के बढ़े वेतन और एलपीजी संकट से दोहरी मार
गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन के अध्यक्ष अरुण शर्मा का कहना है कि सरकार ने श्रमिकों का वेतन बढ़ा दिया यह अच्छी बात है लेकिन एलपीजी के संकट से जूझ रहीं फैक्टरियों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। एलपीजी संकट से जूझ रहीं इंजीनियरिंग टूल्स बनाने वाली फैक्टरियों और फेब्रिकेशन की फैक्टरियों में काम आधा हो गया है। ऐसे में उद्यमियों पर दोहरी मार पड़ रही है। जिस फैक्टरी में 10 कॉमर्शियल गैस सिलिंडर लगते थे उन्हें अब बड़ी मुश्किल से दो सिलिंडर तक ही मिल पा रहे हैं।
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जिले में फेब्रिकेशन से संबंधित करीब 4000 इकाइयां हैं। बीएस रोड औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष आरोड़ा का कहना है कि फर्निस से चलने वाली फैक्टरियों में भट्ठी को गरम करने के लिए एलपीजी की जरूरत होती है। कॉमर्शियल एलपीजी महंगी होने के बावजूद गैस सिलिंडर की किल्लत बनी हुई है। हालात यह हैं कि ज्यादातर फैक्टरियां बंदी की कगार पर पहुंच गई हैं।
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श्रमिकों के बढ़े वेतन और एलपीजी संकट से दोहरी मार
गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन के अध्यक्ष अरुण शर्मा का कहना है कि सरकार ने श्रमिकों का वेतन बढ़ा दिया यह अच्छी बात है लेकिन एलपीजी के संकट से जूझ रहीं फैक्टरियों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। एलपीजी संकट से जूझ रहीं इंजीनियरिंग टूल्स बनाने वाली फैक्टरियों और फेब्रिकेशन की फैक्टरियों में काम आधा हो गया है। ऐसे में उद्यमियों पर दोहरी मार पड़ रही है। जिस फैक्टरी में 10 कॉमर्शियल गैस सिलिंडर लगते थे उन्हें अब बड़ी मुश्किल से दो सिलिंडर तक ही मिल पा रहे हैं।
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