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Ghaziabad News: स्मार्टवॉच के इशारों पर भाग रही जिंदगी, थक रहा शरीर

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2026 12:19 AM IST
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Life racing to the beat of the smartwatch, the body growing weary.
गाजियाबाद। कलाई पर बंधी स्मार्टवॉच और मोबाइल फोन में मौजूद फिटनेस एप लोगों की दिनचर्या तय कर रहे हैं। रोजाना स्टेप्स और कैलोरी बर्न का लक्ष्य पूरा करने की होड़ में लोग शरीर की क्षमता और उसके संकेतों को नजरअंदाज कर रहे हैं। आप भी अगर इस फेहरिस्त में शामिल हैं तो सावधान हो जाइये, क्योंकि इससे मांसपेशियों में खिंचाव, घुटनों की चोट, एड़ी और कंधों के दर्द जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
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जिला (एमएमजी) और संयुक्त जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग में रोजाना ऐसे आठ से 10 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिन्होंने फिटनेस एप पर दिख रहे आंकड़ों के दबाव में जरूरत से ज्यादा व्यायाम किया। इनमें युवाओं के साथ मध्यम आयु वर्ग के लोग व कामकाजी महिलाएं भी शामिल हैं।
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संयुक्त जिला अस्पताल के वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएन सिंह बताते हैं कि लोग शरीर के प्राकृतिक संकेतों को नजरअंदाज कर रहे हैं। कई बार शरीर पूरी तरह थक चुका होता है, लेकिन स्मार्टवॉच का वाइब्रेशन और अधूरा लक्ष्य उन्हें अतिरिक्त मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है। इसका सबसे अधिक असर हड्डियों और मांसपेशियों को जोड़ने वाले हिस्सों पर पड़ता है, जहां सूजन से लेकर स्थायी क्षति तक की स्थिति बन सकती है।
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केस-1
हाल ही में 45 वर्षीय एक कॉरपोरेट प्रबंधक ने सप्ताहभर का कैलोरी लक्ष्य पूरा करने के लिए रविवार को एक साथ 15 किलोमीटर दौड़ लगा दी। अत्यधिक दबाव के कारण उनके घुटने का एसीएल लिगामेंट फट गया और सर्जरी की नौबत आ गई।

केस-2
राजनगर की 38 वर्षीय एक कामकाजी महिला ने रोजाना 12 हजार कदम चलने का लक्ष्य तय किया। करीब सात हजार कदम चलने के बाद पैरों में दर्द और सूजन शुरू हो जाती थी, लेकिन लक्ष्य पूरा करने की जिद में वह लगातार चलती रहीं। अब उन्हें घुटने की टोपी के नीचे होने वाली सूजन (कोंड्रोमलेशिया पटेली) का इलाज कराना पड़ रहा है।
केस-3
क्रॉसिंग रिपब्लिक के 25 वर्षीय एक युवक ने जिम में बिना वार्म-अप और स्ट्रेचिंग किए केवल कैलोरी बर्न का लक्ष्य पूरा करने के लिए भारी कार्डियो व्यायाम शुरू कर दिया। पर्याप्त रिकवरी नहीं मिलने से उसकी पीठ और जांघ की मांसपेशियों में गंभीर खिंचाव आ गया और कई दिनों तक बिस्तर पर आराम करना पड़ा।
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रिकवरी को भी दें उतनी ही अहमियत एमएमजी अस्पताल के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. सैय्यद जोहर अली नकवी कहते हैं कि चिकित्सा विज्ञान का पहला सिद्धांत है कि अपने शरीर की सुनें। दर्द और थकान शरीर के चेतावनी संकेत हैं। शरीर पांच हजार कदम चलने के बाद थक रहा है तो वहीं रुकना चाहिए और धीरे-धीरे लक्ष्य बढ़ाना चाहिए। केवल कार्डियो पर ध्यान देने के बजाय स्ट्रेचिंग, फ्लेक्सिबिलिटी, पर्याप्त पानी, संतुलित आहार और रिकवरी को भी समान महत्व देना चाहिए।

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उपकरण गतिविधियों का अनुमान लगाते हैं, स्वास्थ्य का नहीं
फिटनेस एप और स्मार्टवॉच ने लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक तो बनाया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन पर दिखने वाले आंकड़ों को अंतिम सच मानना खतरनाक हो सकता है। ये उपकरण केवल गतिविधियों का अनुमान लगाते हैं, जबकि व्यक्ति की उम्र, वजन, पुरानी बीमारियां, हड्डियों और जोड़ों की स्थिति का आकलन नहीं कर पाते। ऐसे में केवल लक्ष्य पूरा करने की जिद कई बार शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा देती है।
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ये सावधानियां बरतें
-स्टेप्स और कैलोरी का लक्ष्य धीरे-धीरे बढ़ाएं।
-दर्द या अत्यधिक थकान होने पर तुरंत व्यायाम रोक दें।
-वर्कआउट से पहले वार्म-अप और बाद में स्ट्रेचिंग जरूर करें।
-सप्ताह में कम से कम एक-दो दिन शरीर को रिकवरी का समय दें।
-कोई बीमारी या जोड़ों की समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लेकर ही व्यायाम करें।
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