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Ghaziabad News: लाइसेंस लिया दूध से पनीर बनाने का, मौके पर मिला सोयाबीन का चूरा
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गाजियाबाद। एसीपी प्रियाश्रीपाल ने शुक्रवार रात को डूंडाहेडा में छापा मारकर नकली पनीर बनाने की फैक्टरी पकड़ी। इस दौरान मौके से भारी मात्रा में सोयाबीन का चूरा बरामद हुआ। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो पता चला कि आरोपी ने दूध से पनीर बनाने का लाइसेंस लिया था और वह सोयाबीन से पनीर बना रहा था। सोयाबीन के कट्टों और क्रेट में छपकली और चूहे घूमते मिले।
एसीपी प्रियाश्रीपाल ने बताया कि डूंडाहेडा में शांतिनगर प्लांट के पास हर्षित त्यागी की अधबनी दुकानों के पीछे पनीर की अवैध फैक्टरी संचालित होने का इनपुट मिला। पुलिसबल के साथ मौके पर पहुंचे तो वहां छह सात लोग मिले। इनमें स्वेतांक त्यागी मिला, जो फैक्ट्री संचालक रजनीश का बेटा है। उससे पूछताछ होने पर संदेह हुआ तो मौके पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को बुलाया गया।
उन्होंने सैंपल लेकर जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला को भेजे। जांच करने पर सामने आया कि आरोपी ने करीब दो साल पहले खाद्य सुरक्षा विभाग से लाइसेंस जारी कराया था। इसमें उसने दूध से बनी सामग्री बनाने का आवेदन किया था। वहां सोयाबीन के चूरे का इस्तेमाल किया जा रहा था। फैक्टरी में भारी गंदगी थी और बनी अधबनी सामग्री में छिपकली और चूहे घूम रहे थे। उसको खाने से बड़ी बीमारी फैलने की भी संभावना बन जाती है।
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गौतमबुद्धनगर का क्षेत्र, जिले में कैसे जारी हुआ लाइसेंस : लंबे समय से फैक्ट्री संचालित हो रही थी, लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग को इसकी भनक नहीं थी। खास बात यह है कि जहां पर फैक्टरी चल रही थी, वह क्षेत्र गौतमबुद्धनगर में आता है। लाइसेंस चिपियाना बुजुर्ग के पते पर जारी किया गया। ऐसे में लाइसेंस गाजियाबाद से जारी कर दिया गया। इसकी जांच करने की किसी ने जरूरत नहीं समझी। विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर इस कार्रवाई और लाइसेंस जारी होने से सवाल खड़े हुए हैं।
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एसीपी प्रियाश्रीपाल ने बताया कि डूंडाहेडा में शांतिनगर प्लांट के पास हर्षित त्यागी की अधबनी दुकानों के पीछे पनीर की अवैध फैक्टरी संचालित होने का इनपुट मिला। पुलिसबल के साथ मौके पर पहुंचे तो वहां छह सात लोग मिले। इनमें स्वेतांक त्यागी मिला, जो फैक्ट्री संचालक रजनीश का बेटा है। उससे पूछताछ होने पर संदेह हुआ तो मौके पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को बुलाया गया।
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उन्होंने सैंपल लेकर जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला को भेजे। जांच करने पर सामने आया कि आरोपी ने करीब दो साल पहले खाद्य सुरक्षा विभाग से लाइसेंस जारी कराया था। इसमें उसने दूध से बनी सामग्री बनाने का आवेदन किया था। वहां सोयाबीन के चूरे का इस्तेमाल किया जा रहा था। फैक्टरी में भारी गंदगी थी और बनी अधबनी सामग्री में छिपकली और चूहे घूम रहे थे। उसको खाने से बड़ी बीमारी फैलने की भी संभावना बन जाती है।
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गौतमबुद्धनगर का क्षेत्र, जिले में कैसे जारी हुआ लाइसेंस : लंबे समय से फैक्ट्री संचालित हो रही थी, लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग को इसकी भनक नहीं थी। खास बात यह है कि जहां पर फैक्टरी चल रही थी, वह क्षेत्र गौतमबुद्धनगर में आता है। लाइसेंस चिपियाना बुजुर्ग के पते पर जारी किया गया। ऐसे में लाइसेंस गाजियाबाद से जारी कर दिया गया। इसकी जांच करने की किसी ने जरूरत नहीं समझी। विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर इस कार्रवाई और लाइसेंस जारी होने से सवाल खड़े हुए हैं।
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