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Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   Lekhpal Surendra Kaushik removed in connection with the encroachment of municipal land; explanation sought from the Property Superintendent

Ghaziabad News: निगम की जमीनों पर कब्जे के मामले में लेखपाल सुरेंद्र कौशिक हटाए गए, संपत्ति अधीक्षक से मांगा स्पष्टीकरण

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2026 12:56 AM IST
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Lekhpal Surendra Kaushik removed in connection with the encroachment of municipal land; explanation sought from the Property Superintendent
गाजियाबाद। नगर निगम की संपत्ति पर अवैध कब्जे के मामले में महापौर सुनीता दयाल की शिकायत के बाद निगम के लेखपाल सुरेंद्र कौशिक को हटा दिया गया। उन्होंने निगम का मोबाइल और सिम भी जमा करा दिया है। वहीं, सपंत्ति अधीक्षक रमाशंकर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी हो सकती है। इस कार्रवाई से निगम के अधिकारी-कर्मचारियों में अफरा-तफरी का माहौल है। राजस्व और कर निरीक्षकों के तबादले के बाद दो सप्ताह में यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है।
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महापौर सुनीता दयाल ने 21 अगस्त को कैला भट्ठा में मौके पर पहुंचकर हाजी खलील पर नगर निगम की सपंत्ति पर कब्जा करने का आरोप लगाया था। महापौर इस दौरान निगम की सपंत्ति विभाग टीम से काफी नाराज दिखीं। उन्होंने आरोप लगाया था कि निगम की करोड़ों की संपत्ति पर खलील ने कब्जा कर लिया। इसके बावजूद लेखपाल और संपत्ति अधीक्षक केवल नोटिस देने तक सीमित रहे। महापौर ने बताया कि मौके पर पहुंचकर कब्जेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जब वह मौके पर पहुंची तो दोनों वहां से निकल गए। जबकि, निगम की संपत्ति को बचाने की उनकी पूरी जिम्मेदारी है। इससे पहले भी निगम की संपत्ति पर अवैध कब्जे के मामले में दोनों पर आरोपियों से मिलीभगत के आरोप लग चुके हैं।
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महापौर के खिलाफ हाजी खलील पक्ष कोर्ट पहुंच गया और उन पर आरोप लगाया कि स्थगनादेश पारित होने के बाद भी उनकी दुकानों और डेरी पर ताला लगाया गया। इसके बाद महापौर ने इनके खिलाफ मुख्यमंत्री से शिकायत करने की बात कही। महापौर 25 अगस्त को मुख्यमंत्री से मिलने के लिए लखनऊ गई थीं। इसके बाद चर्चा तेज हो गई कि उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की है। महापौर ने बताया कि सुरेंद्र कौशिक को हटा दिया गया है। संपत्ति अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगना कोई कार्रवाई नहीं है। उनको निलंबित करके मामले की जांच कराए जाने की जरूरत है।
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-काम संपत्ति विभाग का, मुद्दे उठा रहीं महापौर :
निगम की संपत्ति पर अवैध कब्जे के मामले लगातार महापौर उठा रही हैं। मोहन नगर में तो एक प्रॉपर्टी डीलर ने फर्जी दस्तावेजों के बल पर जीडीए से नक्शा भी पास करा लिया और कुछ ही दिन में बहुमंजिला इमारत भी खड़ी कर दी। इसका निर्माण महापौर ने रुकवाया। अर्थला में भी महापौर ने कब्जे कब्जा रुकवाया था। जबकि, यह पूरा काम निगम के संपत्ति विभाग की जिम्मेदारी है। इसी को लेकर महापौर लगातार संपत्ति विभाग के अफसरों की कार्यशैली से नाराज चल रही हैं।

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