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Ghaziabad News: स्वाइन फ्लू की जांच के लिए लैब टेक्नीशियन को दिया प्रशिक्षण
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गाजियाबाद। स्वाइन फ्लू व लेप्रोसी की जांच और उपचार को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सोमवार को सीएमओ कार्यालय में स्वाइन फ्लू व लेप्रोसी रोग के संबंध में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की लैब में कार्यरत लैब टेक्नीशियन को जांच की प्रक्रिया और सावधानियों की जानकारी दी गई।
कार्यशाला में नोडल अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता, डॉ. राजेश तेवतिया, डॉ. निहारिका केसरवानी, डॉ. शिवी अग्रवाल, माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. सुरुचि सैनी और डॉ. सुरभि दीक्षित ने प्रशिक्षण दिया। डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि लेप्रोसी की जांच के लिए जिला एमएमजी अस्पताल में संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेने के लिए कलेक्शन सेंटर बनाया जाएगा।
स्वाइन फ्लू के मरीजों को तीन वर्गों में बांटकर जांच और उपचार की प्रक्रिया समझाई गई। टाइप-ए में लक्षणों के आधार पर उपचार किया जाएगा। टाइप-बी में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों और को-मॉर्बिड बीमारी से ग्रसित मरीजों की जांच की जाएगी। टाइप-सी में अति गंभीर श्रेणी के मरीजों की जांच होगी। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर मरीज को अस्पताल में भर्ती कर उपचार किया जाएगा।
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कार्यशाला में स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए हाथों की नियमित सफाई, मास्क के इस्तेमाल और आसपास साफ-सफाई रखने के बारे में भी जानकारी दी गई। वहीं, माइक्रोबायोलॉजिस्ट ने लैब टेक्नीशियन को लेप्रोसी की जांच की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया।
कार्यशाला में नोडल अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता, डॉ. राजेश तेवतिया, डॉ. निहारिका केसरवानी, डॉ. शिवी अग्रवाल, माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. सुरुचि सैनी और डॉ. सुरभि दीक्षित ने प्रशिक्षण दिया। डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि लेप्रोसी की जांच के लिए जिला एमएमजी अस्पताल में संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेने के लिए कलेक्शन सेंटर बनाया जाएगा।
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स्वाइन फ्लू के मरीजों को तीन वर्गों में बांटकर जांच और उपचार की प्रक्रिया समझाई गई। टाइप-ए में लक्षणों के आधार पर उपचार किया जाएगा। टाइप-बी में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों और को-मॉर्बिड बीमारी से ग्रसित मरीजों की जांच की जाएगी। टाइप-सी में अति गंभीर श्रेणी के मरीजों की जांच होगी। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर मरीज को अस्पताल में भर्ती कर उपचार किया जाएगा।
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कार्यशाला में स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए हाथों की नियमित सफाई, मास्क के इस्तेमाल और आसपास साफ-सफाई रखने के बारे में भी जानकारी दी गई। वहीं, माइक्रोबायोलॉजिस्ट ने लैब टेक्नीशियन को लेप्रोसी की जांच की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया।