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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 25 जिलों से 40 हजार ट्रैक्टर यूपी गेट से दिल्ली में प्रवेश करेगा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 15 Jan 2021 12:42 AM IST
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kisan andolan up gate
यूपी गेट पर धरने पर बैठे किसान। - फोटो : GHAZIABAD City
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 25 जिलों से 40 हजार ट्रैक्टर यूपी गेट से दिल्ली में करेंगे प्रवेश
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साहिबाबाद। भारतीय किसान यूनियन ने 26 जनवरी को दिल्ली की परेड में ट्रैक्टर के साथ शामिल होने को लेकर जमकर तैयारी की है। किसान नेताओं का दावा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 25 जिलों से 40 हजार ट्रैक्टर यूपी गेट पर 24 जनवरी तक पहुंच जाएंगे। 26 जनवरी की सुबह किसान तमाम ट्रैक्टरों के साथ दिल्ली के लिए कूच करेंगे। सबसे आगे के ट्रैक्टरों में पुलिस की बैरिकेड को उठाने की हुक भी लगाई जा रही है। वहीं पहली कतार के ट्रैक्टर पर बैठे किसान खुद को तिरंगे में लपेटे रखेंगे ताकि टकराव की स्थिति बनने पर पुलिस को कोई कार्रवाई करने से पहले तिरंगे के मान सम्मान के बारे में पहले सोचना पडे़।
भाकियू नेताओं ने बताया कि ट्रैक्टर रैली को लेकर प्रदेश के 75 जनपदों में प्रभारी नियुक्त कर दिए गए हैं। प्रति जनपद को एक हजार ट्रैक्टर के साथ दिल्ली में प्रवेश का टारगेट दिया गया है। इनमें से सबसे अधिक ट्रैक्टर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 25 जनपदों से आएंगे। ताजा स्थिति यह है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से करीब 40 हजार ट्रैक्टर तैयार हो चुके हैं जो 24 जनवरी तक यूपी गेट पहुंच जाएंगे, बाकी ट्रैक्टर अपनी नजदीक की सीमाओं से सीधे दिल्ली में प्रवेश करेंगे। भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष राजवीर सिंह ने बताया कि मेरठ, अलीगढ़, आगरा, सहारनपुर, मुरादाबाद और बरेली मंडलों से 40 हजार ट्रैक्टरों के यूपी गेट पर आने की सूचना मिली है। इन मंडलों से इससे भी अधिक ट्रैक्टर आने की पूरी संभावना है। गांव-गांव में ट्रैक्टर रैली में शामिल होने को लेकर किसानों के बीच काफी उत्साह है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश से भारी संख्या में किसान ट्रैक्टर रैली में शामिल होने को लेकर मन बनाए बैठे हैं।
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आत्मा ने मान को झकझोरा
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी से भूपेंद्र सिंह मान के हटने पर किसान नेताओं का कहना है कि मान की आत्मा ने उन्हें झकझोर दिया। मान को यह लगा कि यह महज किसान आंदोलन नहीं पूरे देश की जनभावना है, लिहाजा उन्होंने कमेटी से खुद को दूर कर लिया। राकेश टिकैत ने कहा कि इसी भावना से कमेटी के अन्य सदस्यों को भी प्रभावित होना चाहिए। यह संघर्ष अकेले अन्नदाताओं का नहीं है बल्कि इसमें पूूरे समाज का समावेश है। कृषि विशेषज्ञों को सिर्फ सरकार नहीं, पूरे समाज का हित सोचना चाहिए।
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