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करहेड़ा: 546 करोड़ की सीवर परियोजना अंतिम चरण में, दिसंबर तक नगर निगम को होगी स्थानांतरित
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गाजियाबाद। करहेड़ा क्षेत्र की 2 लाख से अधिक आबादी को जल्द ही गंदे पानी और जलभराव से राहत मिलने वाली है। जल निगम की 546 करोड़ रुपये की सीवर परियोजना का कार्य अंतिम चरण में है, जिसे दिसंबर तक नगर निगम को स्थानांतरित कर दिया जाएगा। नगर निगम को स्थानांतरित करने से पहले ही घरों को सीवर पाइपलाइन से जोड़ने का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसी प्रक्रिया के तहत फिलहाल घरों को सीवर लाइन से जोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है।
200 किलोमीटर पाइपलाइन और 67 एमएलडी का विशाल ट्रीटमेंट प्लांट :
इस वृहद सीवर परियोजना के तहत करहेड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चार प्रमुख वार्डों में करीब 200 किलोमीटर लंबी सीवर पाइपलाइन बिछाई गई है। इसके साथ ही गंदे पानी के वैज्ञानिक निस्तारण और पुनर्प्रयोग के लिए 67 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) की क्षमता वाला अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी बनकर तैयार हो चुका है। यह प्लांट रोजाना 67 एमएलडी गंदे पानी को शुद्ध करने का काम करेगा। लगभग तीन साल पहले शुरू हुई इस परियोजना के पूरा होने से स्थानीय लोगों को न केवल गंदे पानी की निकासी से मुक्ति मिलेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जल शोधन की दिशा में भी बड़ा फायदा पहुंचेगा।
वर्षों से गंदे पानी और जलभराव से परेशान थे क्षेत्रवासी
करहेड़ा क्षेत्र की घनी आबादी लंबे समय से गंदे पानी की निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण भारी परेशानी झेल रही है। अब तक थोड़ी सी भी बूंदाबांदी होने पर सड़कों और गलियों में जलभराव की स्थिति बन जाती थी। घरों से निकलने वाला इस्तेमाल किया हुआ पानी नालियों से ओवरफ्लो होकर रास्तों और मुख्य मार्गों पर बहने लगता था। इससे न केवल बदबू और गंदगी फैलती थी, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी हमेशा बना रहता था। स्थानीय लोग काफी समय से जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से इस समस्या से निजात दिलाने की गुहार लगा रहे थे।
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गुणवत्ता और टेस्टिंग पर पूरा जोर: सहायक अभियंता : जल निगम के सहायक अभियंता संजय कुमार ने बताया कि सीवर लाइन बिछाने के बाद अब पूरे तंत्र की टेस्टिंग (परीक्षण) का काम तेजी से चलाया जा रहा है ताकि संचालन के दौरान किसी प्रकार का लीकेज या अवरोध न आए। उन्होंने कहा कि पूरी परियोजना को गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराने के लिए कार्यदाई संस्था की कड़ी निगरानी कराई जा रही है और समय-समय पर जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। नगर निगम को स्थानांतरित करने से पहले ही सभी घरों को सीवर पाइपलाइन से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, जिससे हस्तांतरण के बाद क्षेत्रवासियों को तुरंत इस समस्या से राहत मिल सके।
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200 किलोमीटर पाइपलाइन और 67 एमएलडी का विशाल ट्रीटमेंट प्लांट :
इस वृहद सीवर परियोजना के तहत करहेड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चार प्रमुख वार्डों में करीब 200 किलोमीटर लंबी सीवर पाइपलाइन बिछाई गई है। इसके साथ ही गंदे पानी के वैज्ञानिक निस्तारण और पुनर्प्रयोग के लिए 67 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) की क्षमता वाला अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी बनकर तैयार हो चुका है। यह प्लांट रोजाना 67 एमएलडी गंदे पानी को शुद्ध करने का काम करेगा। लगभग तीन साल पहले शुरू हुई इस परियोजना के पूरा होने से स्थानीय लोगों को न केवल गंदे पानी की निकासी से मुक्ति मिलेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जल शोधन की दिशा में भी बड़ा फायदा पहुंचेगा।
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वर्षों से गंदे पानी और जलभराव से परेशान थे क्षेत्रवासी
करहेड़ा क्षेत्र की घनी आबादी लंबे समय से गंदे पानी की निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण भारी परेशानी झेल रही है। अब तक थोड़ी सी भी बूंदाबांदी होने पर सड़कों और गलियों में जलभराव की स्थिति बन जाती थी। घरों से निकलने वाला इस्तेमाल किया हुआ पानी नालियों से ओवरफ्लो होकर रास्तों और मुख्य मार्गों पर बहने लगता था। इससे न केवल बदबू और गंदगी फैलती थी, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी हमेशा बना रहता था। स्थानीय लोग काफी समय से जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से इस समस्या से निजात दिलाने की गुहार लगा रहे थे।
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गुणवत्ता और टेस्टिंग पर पूरा जोर: सहायक अभियंता : जल निगम के सहायक अभियंता संजय कुमार ने बताया कि सीवर लाइन बिछाने के बाद अब पूरे तंत्र की टेस्टिंग (परीक्षण) का काम तेजी से चलाया जा रहा है ताकि संचालन के दौरान किसी प्रकार का लीकेज या अवरोध न आए। उन्होंने कहा कि पूरी परियोजना को गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराने के लिए कार्यदाई संस्था की कड़ी निगरानी कराई जा रही है और समय-समय पर जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। नगर निगम को स्थानांतरित करने से पहले ही सभी घरों को सीवर पाइपलाइन से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, जिससे हस्तांतरण के बाद क्षेत्रवासियों को तुरंत इस समस्या से राहत मिल सके।