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मुगल शासनकाल में बनी थी गुलधर जामा मस्जिद
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Thu, 16 Jun 2016 12:58 AM IST
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400 साल पुरानी बताई जा रही है यह मस्जिद
- फोटो : अमर उजाला
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सबसे पुरानी मस्जिदों के इतिहास के आइने में आज आपको रूबरू करा रहे हैं मुगल शासनकाल में बनी गुलधर जामा मस्जिद से। पीढ़ियां दर पीढ़ियां सुनते आए लोग बताते हैं कि यह मस्जिद 400 साल से भी पुरानी है।
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यह मस्जिद गुलधर गांव में रेलवे स्टेशन के पास है। बुजुर्ग बताते हैं कि शुरू में यह महज 40-50 गज में बनी थी, बाकी एरिया खाली पड़ा था। मस्जिद के आसपास इक्का-दुक्का मकान थे। बाकी दूर-दूर तक आबादी नहीं थी।
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जैसे-जैसे लोग यहां बसते गए, वैसे-वैसे मस्जिद का भी विस्तार होता गया। बरामदा, फर्श और एक कमरा बनाया गया। वुजू के लिए पानी की टंकी लगवाई गई। अब यह करीब 600 गज में है। मस्जिद में ही एक छोटा सा मदरसा है, जिसमें 25 बच्चे अरबी और उर्दू की तालीम लेते हैं।
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इस मस्जिद में ईद की नमाज भी होती है, जिसमें 500-600 लोग नमाज अदा करते हैं। मस्जिद के पेश इमाम मोहम्मद यूनुस हैं, जो मुजफ्फरनगर के रहने वाले हैं। वह पिछले आठ सालों से यहां इमामत कर रहे हैं।
वह बताते हैं कि मस्जिद तामीर होने के दौरान यहां की आबादी कितनी थी, इस बारे में किसी को पुख्ता तौर पर पता नहीं है। फिलहाल भी मस्जिद के आसपास मुस्लिम आबादी ज्यादा नहीं है, महज 25-30 घर ही हैं, जिनमें करीब 200 लोग रहते हैं।
हालांकि नजदीक ही औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण पांचों नमाजों में मस्जिद गुलजार रहती है। खासतौर पर जुमे केदिन औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों में काम करने वाले कर्मचारी काफी तादाद में नमाज पढ़ने आते हैं।
जुमे के दिन नमाजियों की तादाद 300-400 हो जाती है। नायब शहर काजी हकीम के.जेड बुखारी का कहना है कि गुलधर वाली इस जामा मस्जिद का इतिहास बहुत पुराना है, जो मुगल काल से जुड़ता है। वह भी बुजुर्गों से इसके बारे में सुनते आए हैं।