{"_id":"6ad293734ed67723f80e8415","slug":"instead-of-compensation-farmers-will-now-fight-for-their-land-ghaziabad-news-c-198-1-gbd1023-25487-2026-10-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: मुआवजे की बजाय अब अपनी जमीन के लिए लड़ेंगे किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: मुआवजे की बजाय अब अपनी जमीन के लिए लड़ेंगे किसान
विज्ञापन
विज्ञापन
साहिबाबाद। कनावनी गांव के किसानों ने जीडीए अधिकारियों पर बातचीत बंद करने का आरोप लगाया है। नाराज किसानों ने कहा कि उन्हें जीडीए वीसी से अब कोई उम्मीद नहीं रही, ऐसे में वह लोग अब मुआवजे की बजाय अपनी जमीन वापस लेने की लड़ाई लड़ेंगे। उनको धरने पर बैठे हुए 64 दिन हो गए हैं,लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है। शुकव्रार को मुख्यमंत्री के आने की सूचना से किसानों को उम्मीद थी कि वह उनकी बात सुनने पहुंचेंगे, जैसे ही कार्यक्रम रद्द हुआ किसानों में मायूसी छा गई।
किसान नेता कैलाश नागर ने बताया कि आज धरने का 64वां दिन है। उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधियों से लगातार निवेदन किया है कि वे मुख्यमंत्री से किसानों की बात कहें। किसानों की अब एक ही मांग है कि वे जमीन लेकर ही उठेंगे, अन्यथा प्राण त्याग देंगे। किसानों ने आरोप लगाया कि जीडीए ने उनसे बात करना बंद कर दिया है। किसानों का आरोप है कि अब उनकी लड़ाई मुआवजे के बजाय जमीन के लिए है। प्रशासन पर गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का सहारा लेकर बातों को घुमा रहा है। किसानों के अनुसार, सरकार एडवोकेट जनरल और अटॉर्नी जनरल पर पैसा खर्च कर रही है, जबकि किसानों को अपनी जेब से कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे सड़क से लेकर अदालत तक की लड़ाई लड़ेंगे।
किसान नेता कैलाश नागर ने बताया कि आज धरने का 64वां दिन है। उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधियों से लगातार निवेदन किया है कि वे मुख्यमंत्री से किसानों की बात कहें। किसानों की अब एक ही मांग है कि वे जमीन लेकर ही उठेंगे, अन्यथा प्राण त्याग देंगे। किसानों ने आरोप लगाया कि जीडीए ने उनसे बात करना बंद कर दिया है। किसानों का आरोप है कि अब उनकी लड़ाई मुआवजे के बजाय जमीन के लिए है। प्रशासन पर गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का सहारा लेकर बातों को घुमा रहा है। किसानों के अनुसार, सरकार एडवोकेट जनरल और अटॉर्नी जनरल पर पैसा खर्च कर रही है, जबकि किसानों को अपनी जेब से कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे सड़क से लेकर अदालत तक की लड़ाई लड़ेंगे।
विज्ञापन