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Ghaziabad News: आठ करोड़ मिलें तो तीन महीने में पूरा हो जाए महामाया स्टेडियम का काम
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गाजियाबाद। महामाया स्पोर्ट्स स्टेडियम में खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने का सपना फिलहाल बजट की फाइलों में अटका है। करीब 16 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए अब तक दो किस्तों में आठ करोड़ रुपये ही मिल पाए हैं। पहली किस्त में तीन करोड़ और दूसरी में पांच करोड़ रुपये आए थे। बाकी आठ करोड़ रुपये कब आएंगे, इसका इंतजार कार्यदायी संस्था यूपी सिडको को भी है और स्टेडियम में रोज अभ्यास करने आने वाले खिलाड़ियों को भी।
स्टेडियम में सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक, लॉन टेनिस कोर्ट, स्विमिंग पूल, बास्केटबाल कोर्ट और मल्टीपरपज हॉल बनाए जा रहे हैं। पुराने बैडमिंटन हॉल का भी कायाकल्प होना है। सिंथेटिक ट्रैक और बाउंड्रीवाल का काम राजकीय निर्माण निगम के जिम्मे है, जबकि बाकी निर्माण यूपी सिडको करा रहा है। परियोजना को 26 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन बजट के अभाव के कारण तय समयसीमा में काम पूरा नहीं हो सका। इसके बाद निर्माण पूरा करने के लिए दिसंबर तक का समय निर्धारित किया गया। यूपी सिडको अभियंता हिमांशु सिंह ने कहा कि अक्तूबर आधा बीत चुका है और शेष धनराशि का कोई अता-पता नहीं। ऐसे में दिसंबर की समयसीमा भी पूरी हो पाएगी, इस पर अधिकारी खुद आश्वस्त नहीं दिखते। हिमांशु सिंह ने बताया कि पैसा आते ही रुका हुआ कार्य रफ्तार पकड़ लेगा। उनका दावा है कि अगर बजट समय से मिल जाए तो छह महीने का काम तीन महीने में भी निपटाया जा सकता है। फिलहाल तैयारी यही है कि जैसे ही शेष आठ करोड़ जारी हों, सभी मोर्चों पर एक साथ काम शुरू कर दिया जाए।
लॉन टेनिस कोर्ट बनकर तैयार, बस फिनिशिंग बाकी
स्टेडियम में लॉन टेनिस कोर्ट समेत कुछ सुविधाओं का काम लगभग पूरा हो चुका है। थोड़ी-बहुत फिनिशिंग रह गई है। इसके बाद कोर्ट खिलाड़ियों के लिए खोल दिया जाएगा। अभी शहर के टेनिस खिलाड़ियों को निजी क्लबों पर निर्भर रहना पड़ता है। कोर्ट शुरू होने से उन्हें कम खर्च में अभ्यास की जगह मिल सकेगी।
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बैडमिंटन हॉल से लेकर स्विमिंग पूल तक, सब अधूरा
परियोजना में बैडमिंटन हॉल का नवीनीकरण, मल्टीपरपज हॉल, बास्केटबाल कोर्ट, लॉन टेनिस कोर्ट और स्विमिंग पूल के काम शामिल हैं। पुरानी सुविधाओं को सुधारने के साथ नई सुविधाएं भी जोड़ी जानी है लेकिन पैसा टुकड़ों में मिलने से काम भी टुकड़ों में हो रहा है। इसके कारण खिलाड़ी आज भी इस आस में बैठे हैं कि उन्हें सुविधाएं कब मिल पाएंगी।
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स्टेडियम में सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक, लॉन टेनिस कोर्ट, स्विमिंग पूल, बास्केटबाल कोर्ट और मल्टीपरपज हॉल बनाए जा रहे हैं। पुराने बैडमिंटन हॉल का भी कायाकल्प होना है। सिंथेटिक ट्रैक और बाउंड्रीवाल का काम राजकीय निर्माण निगम के जिम्मे है, जबकि बाकी निर्माण यूपी सिडको करा रहा है। परियोजना को 26 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन बजट के अभाव के कारण तय समयसीमा में काम पूरा नहीं हो सका। इसके बाद निर्माण पूरा करने के लिए दिसंबर तक का समय निर्धारित किया गया। यूपी सिडको अभियंता हिमांशु सिंह ने कहा कि अक्तूबर आधा बीत चुका है और शेष धनराशि का कोई अता-पता नहीं। ऐसे में दिसंबर की समयसीमा भी पूरी हो पाएगी, इस पर अधिकारी खुद आश्वस्त नहीं दिखते। हिमांशु सिंह ने बताया कि पैसा आते ही रुका हुआ कार्य रफ्तार पकड़ लेगा। उनका दावा है कि अगर बजट समय से मिल जाए तो छह महीने का काम तीन महीने में भी निपटाया जा सकता है। फिलहाल तैयारी यही है कि जैसे ही शेष आठ करोड़ जारी हों, सभी मोर्चों पर एक साथ काम शुरू कर दिया जाए।
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लॉन टेनिस कोर्ट बनकर तैयार, बस फिनिशिंग बाकी
स्टेडियम में लॉन टेनिस कोर्ट समेत कुछ सुविधाओं का काम लगभग पूरा हो चुका है। थोड़ी-बहुत फिनिशिंग रह गई है। इसके बाद कोर्ट खिलाड़ियों के लिए खोल दिया जाएगा। अभी शहर के टेनिस खिलाड़ियों को निजी क्लबों पर निर्भर रहना पड़ता है। कोर्ट शुरू होने से उन्हें कम खर्च में अभ्यास की जगह मिल सकेगी।
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बैडमिंटन हॉल से लेकर स्विमिंग पूल तक, सब अधूरा
परियोजना में बैडमिंटन हॉल का नवीनीकरण, मल्टीपरपज हॉल, बास्केटबाल कोर्ट, लॉन टेनिस कोर्ट और स्विमिंग पूल के काम शामिल हैं। पुरानी सुविधाओं को सुधारने के साथ नई सुविधाएं भी जोड़ी जानी है लेकिन पैसा टुकड़ों में मिलने से काम भी टुकड़ों में हो रहा है। इसके कारण खिलाड़ी आज भी इस आस में बैठे हैं कि उन्हें सुविधाएं कब मिल पाएंगी।