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Ghaziabad News: आठ साल पुराने पॉक्सो मामले में पति, सास-ससुर समेत तीन आरोपी बरी
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गाजियाबाद। इंदिरापुरम थाना क्षेत्र में 2018 में दर्ज किशोरी को भगाने और दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी आकाश जैन उर्फ बिजेंद्र, उसके पिता लक्ष्मी ठाकुर और मां सुनीता को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
मामले में पीड़िता की मां ने आरोप लगाया था कि उनकी नाबालिग बेटी को आकाश जैन और अन्य आरोपी बहला-फुसलाकर अपने साथ ले ले गए। शिकायत में छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी लगाए थे। इसी तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।
सुनवाई के दौरान मामले ने नया मोड़ ले लिया। पीड़िता की मां अपने पहले दिए गए बयान से मुकर गई और अदालत में बताया कि उसकी बेटी की जन्मतिथि वर्ष 2000 की है। वहीं पीड़िता ने भी अदालत में स्पष्ट कहा कि घटना के समय वह 18 वर्ष की थी और अपनी इच्छा से आकाश जैन के साथ गई थी। उसने बताया कि उसके परिजन उसकी शादी किसी अन्य युवक से कराना चाहते थे, जबकि वह आकाश से विवाह करना चाहती थी। पीड़िता ने अदालत को बताया कि उसने 9 फरवरी 2018 को आर्य समाज मंदिर में आकाश जैन से विवाह किया और बाद में विवाह का विधिवत पंजीकरण भी कराया। तब से दोनों पति-पत्नी के रूप में साथ रह रहे हैं। दंपति की एक बेटी भी है और अब दोनों परिवार इस विवाह को स्वीकार कर चुके हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता और उसकी मां के बयानों में अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं मिला। उपलब्ध साक्ष्य आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
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मामले में पीड़िता की मां ने आरोप लगाया था कि उनकी नाबालिग बेटी को आकाश जैन और अन्य आरोपी बहला-फुसलाकर अपने साथ ले ले गए। शिकायत में छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी लगाए थे। इसी तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।
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सुनवाई के दौरान मामले ने नया मोड़ ले लिया। पीड़िता की मां अपने पहले दिए गए बयान से मुकर गई और अदालत में बताया कि उसकी बेटी की जन्मतिथि वर्ष 2000 की है। वहीं पीड़िता ने भी अदालत में स्पष्ट कहा कि घटना के समय वह 18 वर्ष की थी और अपनी इच्छा से आकाश जैन के साथ गई थी। उसने बताया कि उसके परिजन उसकी शादी किसी अन्य युवक से कराना चाहते थे, जबकि वह आकाश से विवाह करना चाहती थी। पीड़िता ने अदालत को बताया कि उसने 9 फरवरी 2018 को आर्य समाज मंदिर में आकाश जैन से विवाह किया और बाद में विवाह का विधिवत पंजीकरण भी कराया। तब से दोनों पति-पत्नी के रूप में साथ रह रहे हैं। दंपति की एक बेटी भी है और अब दोनों परिवार इस विवाह को स्वीकार कर चुके हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता और उसकी मां के बयानों में अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं मिला। उपलब्ध साक्ष्य आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
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