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Ghaziabad News: गाजियाबाद-दिल्ली की सीमा से सटे होटल बने साइबर ठगों के ठिकाने

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 02 Jun 2025 12:39 AM IST
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Hotels near Ghaziabad-Delhi border have become hideouts of cyber thugs
गाजियाबाद। ऑनलाइन फ्रॉड करने वालों ने दिल्ली-गाजियाबाद की सीमा से सटे होटलों को ठिकाना बनाया है। जामताड़ा, नूह, झांसी और राजस्थान के साइबर ठग इन्हीं होटलों को सीबीआई और पुलिस कार्यालय बताकर सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल अरेस्ट कर रहे हैं। इसका खुलासा होटलों से दिल्ली पुलिस की पकड़ में आए तीन साइबर ठगों ने किया है।
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इस खुलासे के बाद गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) से एनसीआर क्षेत्र के नोएडा, गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद के होटलों में गोपनीय तरीके से चेकिंग शुरू कर दी है। क्राइम ब्रांच और साइबर टीम ने दिल्ली-गाजियाबाद सीमाओं से सटे लोनी, इंद्रापुरम, कौशांबी, खोड़ा और क्रॉसिंग रिपब्लिक के होटलों को चिह्नित कर लिए हैं।
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एडीसीपी अपराध पीयूष कुमार सिंह के मुताबिक जिले की सीमा से सटे क्षेत्र में साइबर ठगों के सक्रिय होने की लोकेशन एनसीआरपी और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आईफॉरसी) द्वारा प्राप्त हुई है। तीन टीमें गठित कर लोकेशन पर निगरानी की जा रही है। जानकारी ये भी मिली है कि साइबर ठग होटलों में एक सप्ताह के लिए कमरा बुक करते हैं। होटल मालिक को फर्जी आईडी उपलब्ध कराते हैं और व्यापार के चलते अन्य लोगों से वार्ता के नाम पर दो या तीन कमरे बुक करते हैं। इन्हीं होटलों के कमरों में सीबीआई, क्राइम ब्रांच और पुलिस कार्यालय के बोर्ड और फ्लैक्स लगाकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर लेते हैं। होटलों के कमरों का लुकअप सरकारी कार्यालयों जैसे तैयार किया जाता है ताकि डिजिटल अरेस्ट पीड़ित को किसी भी प्रकार की भनक न लग सके।
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लोकेशन के आधार पर सक्रिय हुई सर्विलांस

एडीसीपी अपराध के मुताबिक जिले के बाहरी छोर क्षेत्र की लोकेशन राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) द्वारा भेजी गई है। क्राइम ब्रांच और सर्विलांस की टीम ने इन स्थानों को चिह्नित कर लिया है। इस क्षेत्र के सात होटलों पर टीम की निगरानी बढ़ गई है। सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही पुलिस साइबर ठगों को पकड़ने में कामयाब होगी।

34 लोग हो चुके हैं डिजिटल अरेस्ट

पिछले डेढ़ वर्षों में जिले के 34 लोग डिजिटल अरेस्ट हो चुके हैं और इनसे 18 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि ठगी जा चुकी है। हैरत कर देने वाली बात ये है कि इनमें से अधिकांश सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, चिकित्सक और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। इतना ही नहीं ऐसे ही होटलों से छह पीड़ितों को सेक्सटॉर्सन का शिकार बनाया जा चुका है।
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