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Ghaziabad News: समय से पहले बंद हुआ अस्पताल, घायल परेशान
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गाजियाबाद। स्टाफकर्मी की माता का निधन होने से सोमवार को एमएमजी अस्पताल में शोकावकाश घोषित कर दिया गया था। इस वजह से अस्पताल समय से पहले बंद हो गया। इससे मरीजों को परेशानी हुई। विशेष तौर पर एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) सेंटर बंद होने से जानवरों के काटने से घायल और उनके परिजनों को काफी परेशानी हुई। वैक्सीन लगवाने पहुंचे मरीजों को सेंटर बंद मिला तो वे इमरजेंसी, ओपीडी और अन्य विभागों में जानकारी लेने के लिए भटकते रहे। कई मरीजों ने अस्पताल प्रशासन से शिकायत भी की। बाद में मरीजों को इमरजेंसी में भेजकर वैक्सीनेशन और उपचार की व्यवस्था कराई गई।
अस्पताल में एक दिन की छुट्टी और दूसरे दिन हड़ताल के बाद सोमवार को मरीजों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही। अस्पताल प्रशासन के अनुसार करीब 2600 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचे। सुबह से ही पंजीकरण काउंटर, दवा वितरण केंद्र, ओपीडी और जांच केंद्रों पर लंबी कतारें लगी रहीं। दोपहर करीब एक बजे कई विभागों की सेवाएं बंद होने के बाद मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को हुई, जिन्हें डॉग बाइट के बाद एंटी रैबीज वैक्सीन लगवानी थी।
मरीजों और उनके परिजनों का कहना था कि एआरवी सेंटर बंद मिलने के बाद उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे तत्काल बात नहीं हो सकी। इसके बाद मरीज इमरजेंसी विभाग पहुंचे, जहां मौजूद डॉक्टरों और कर्मचारियों से वैक्सीन लगाने के संबंध में जानकारी लेते रहे। इससे कुछ समय के लिए इमरजेंसी में भी मरीजों की भीड़ बढ़ गई।
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नोएडा सेक्टर-62 से आई अनु ने बताया कि रविवार को उन्हें कुत्ते ने काट लिया था। सोमवार को वह पहले जीटीबी अस्पताल दिल्ली गईं, वहां पर यह कहकर वापस कर दिया गया कि नोएडा या गाजियाबाद में लगवाओ। गूगल पर सर्च करने पर एमएमजी अस्पताल नजदीक बताया। वैक्सीनेशन सेंटर पहुंचे तो वहां सेवाएं बंद मिलीं। उनका आरोप है कि स्टाफ ने संतोषजनक जानकारी नहीं दी और उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किया। वहीं विजयनगर निवासी प्रदीप ने बताया कि उन्हें डॉग बाइट की दूसरी डोज लगवानी थी, लेकिन इमरजेंसी में उन्हें पहले सीएमएस की अनुमति या मुहर लाने के लिए कहा गया। इससे उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।
सोमवार को फिजिशियन, ऑर्थोपेडिक, साइकियाट्रिस्ट, सर्जरी और स्किन ओपीडी के अलावा 18 नंबर दवा काउंटर और लैब-1 जैसी सेवाएं भी समय से पहले बंद होने से मरीजों को परेशानी हुई। कई मरीजों को इलाज और जांच के लिए एक विभाग से दूसरे विभाग जाना पड़ा। इमरजेंसी में अचानक मरीजों का दबाव बढ़ने से वहां भी भीड़ की स्थिति बन गई।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि अस्पताल के स्टाफ की माता का निधन होने से शोकावकाश घोषित कर दिया गया था। ओपीडी एक बजे बंद हो गई थी। उन्होंने कहा कि जिन मरीजों को परेशानी हुई, उन्हें इमरजेंसी में भेजकर आवश्यक उपचार और वैक्सीन की व्यवस्था कराई गई। अस्पताल प्रशासन ने भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात भी कही
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अस्पताल में एक दिन की छुट्टी और दूसरे दिन हड़ताल के बाद सोमवार को मरीजों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही। अस्पताल प्रशासन के अनुसार करीब 2600 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचे। सुबह से ही पंजीकरण काउंटर, दवा वितरण केंद्र, ओपीडी और जांच केंद्रों पर लंबी कतारें लगी रहीं। दोपहर करीब एक बजे कई विभागों की सेवाएं बंद होने के बाद मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को हुई, जिन्हें डॉग बाइट के बाद एंटी रैबीज वैक्सीन लगवानी थी।
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मरीजों और उनके परिजनों का कहना था कि एआरवी सेंटर बंद मिलने के बाद उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे तत्काल बात नहीं हो सकी। इसके बाद मरीज इमरजेंसी विभाग पहुंचे, जहां मौजूद डॉक्टरों और कर्मचारियों से वैक्सीन लगाने के संबंध में जानकारी लेते रहे। इससे कुछ समय के लिए इमरजेंसी में भी मरीजों की भीड़ बढ़ गई।
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नोएडा सेक्टर-62 से आई अनु ने बताया कि रविवार को उन्हें कुत्ते ने काट लिया था। सोमवार को वह पहले जीटीबी अस्पताल दिल्ली गईं, वहां पर यह कहकर वापस कर दिया गया कि नोएडा या गाजियाबाद में लगवाओ। गूगल पर सर्च करने पर एमएमजी अस्पताल नजदीक बताया। वैक्सीनेशन सेंटर पहुंचे तो वहां सेवाएं बंद मिलीं। उनका आरोप है कि स्टाफ ने संतोषजनक जानकारी नहीं दी और उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किया। वहीं विजयनगर निवासी प्रदीप ने बताया कि उन्हें डॉग बाइट की दूसरी डोज लगवानी थी, लेकिन इमरजेंसी में उन्हें पहले सीएमएस की अनुमति या मुहर लाने के लिए कहा गया। इससे उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।
सोमवार को फिजिशियन, ऑर्थोपेडिक, साइकियाट्रिस्ट, सर्जरी और स्किन ओपीडी के अलावा 18 नंबर दवा काउंटर और लैब-1 जैसी सेवाएं भी समय से पहले बंद होने से मरीजों को परेशानी हुई। कई मरीजों को इलाज और जांच के लिए एक विभाग से दूसरे विभाग जाना पड़ा। इमरजेंसी में अचानक मरीजों का दबाव बढ़ने से वहां भी भीड़ की स्थिति बन गई।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि अस्पताल के स्टाफ की माता का निधन होने से शोकावकाश घोषित कर दिया गया था। ओपीडी एक बजे बंद हो गई थी। उन्होंने कहा कि जिन मरीजों को परेशानी हुई, उन्हें इमरजेंसी में भेजकर आवश्यक उपचार और वैक्सीन की व्यवस्था कराई गई। अस्पताल प्रशासन ने भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात भी कही