{"_id":"575878474f1c1b6e409c5704","slug":"hereafter-are-captive-swanr-sentence-at-home","type":"story","status":"publish","title_hn":"सजा की सरजमीं पर आखिरत सवांर रहे बंदी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सजा की सरजमीं पर आखिरत सवांर रहे बंदी
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Thu, 09 Jun 2016 01:25 AM IST
विज्ञापन
डासना जेल की सलाखों में 651 बंदी रख रहे रोजे, कर रहे सवाब की कमाई
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वह कुसूरवार हैं या बेकुसूर, यह तो कोर्ट तय करेगा।मगर सजा की सरजमीं जेल में बंदी रोजे रखकर अपनी आखिरत जरूर संवार रहे हैं। वह खुदा के लिए दिनभर भूखे-प्यासे रहकर सवाब की कमाई कर रहे हैं।
विज्ञापन
रमजान के पाक महीने में डासना जेल में 651 मुस्लिम बंदी रोजे रख रहे हैं, इनमें 49 महिला बंदी हैं। पांचों टाइम नमाज अदा करते हैं। दुआएं मांगते हैं। जुमे के दिन रोजे रखने वाले सभी बंदियों के लिए एक साथ इफ्तार करने की व्यवस्था की जाएगी।
विज्ञापन
जेल प्रशासन ने उनके लिए सहरी और इफ्तार की व्यवस्था की हुई है। इसके अलावा बंदियों के परिवारवाले भी उनके लिए सहरी और इफ्तार का सामान लाते हैं। जेल में पांचों टाइम अजान हो रही है।
विज्ञापन
यह बंदी हत्या, दहेज हत्या, लूट, धोखाधड़ी और चोरी आदि आरोपों में बंद हैं। अल-सुबह ढाई बजे से जेल में सहरी की तैयारी शुरू हो जाती है। जेल प्रशासन की तरफ से बंदियों को सहरी में दही या दूध और पाव रोटी दी जाती है।
शाम को इफ्तार में पिंड खुजूर, फ्रूट्स, बिस्किट और खाना दिया जाता है। कितना खाना खाना है, इसकी पाबंदी उन्हें नहीं है। जेल अधीक्षक शिव प्रकाश यादव ने बताया कि सहरी और इफ्तार के वक्त अन्य धर्मों के लोग भी उनकी मदद करते हैं, जिससे सौहार्द का माहौल बन जाता है।
ईद पर नमाज के लिए होंगे खास इंतजाम
जेल अधीक्षक ने बताया कि बंदी जुमे में एक साथ नमाज अदा करेंगे। बाकी नमाजें अपने बैरकों में ही पढ़ते हैं। ईद की नमाज के लिए जेल में खास इंतजाम किए जाएंगे। ईद पर सिवैये और पकवान आदि की व्यवस्था भी की जाएगी।