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महर्षि दयानंद विद्यापीठ वार्षिकोत्सव: गाजियाबाद में राज्यपाल देवव्रत का संबोधन, दिए संस्कार के संदेश
Sun, 26 Apr 2026 08:43 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद
माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Sun, 26 Apr 2026 08:43 PM IST
सार
गाजियाबाद के महर्षि दयानंद विद्यापीठ के वार्षिकोत्सव में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने विद्यार्थियों को संस्कार, नैतिकता और वेदों के महत्व पर संदेश दिया। कार्यक्रम में दीप प्रज्वलन, पत्रिका विमोचन हुआ और मेधावी छात्रों को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
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हर्षि दयानंद विद्यापीठ वार्षिकोत्सव में राज्यपाल देवव्रत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गाजियाबाद में गोविंदपुरम स्थित महर्षि दयानंद विद्यापीठ के वार्षिकोत्सव में रविवार को मुख्य अतिथि के रूप में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत पहुंचे। उन्होंने छात्रों व आयोजन में आए हुए शिकक्षों, परिजनों व अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में देश के विद्याथियों को धर्मात्मा, जितेंद्रकारी व परोपकारी बनने की बहुत जरूरत है। विद्यार्थी देश की नींव हैं, जब देश की नींव मजबूत होगी तो देश का विकास अपने आप होगा।
कार्यक्रम की शुरूआत उन्होंने यूपी के कैबिनेट मंत्री सुनील कुमार शर्मा, पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी व स्कूल समिति के अध्यक्ष सुभाष त्यागी के साथ दीप प्रज्वलित कर की। आचार्य देवब्रत ने वैदिक शिक्षा और नैतिकता पर कहा कि भारत की पहचान उसके वेद हैं। भारत की वेदों की पढ़ाई के दौरान भारत को विश्व में सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। यहां हर जाति का व्यक्ति अपने हिसाब से व्यापार करता था। इसके कारण भारत की जीडीपी उस समय सबसे अधिक थी।
गुरुकुलों में छात्रों को वेद की पढ़ाई कराई जाती थी। इसके बाद अंग्रेज भारत में आ गए, जिन्होंने सबसे पहले भारत की संस्कृति की विरासत को समाप्त करने का काम किया। अंग्रेजों ने धर्म के नाम पर अंधविश्वास फैलाया, जिससे जातपात को बढ़ावा मिला। उन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने 40 ग्रंथों की रचना की थी, जिसके जरिए शिक्षा पर विशेष जोर देने का काम किया था। आज देश में एक हजार से अधिक विद्यालय उनके नाम से चल रहे हैं।
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राज्यपाल ने कहा कि अब समय बदल गया है। आज की माताएं अपने बच्चों को संस्कारी बनाने से बचती हैं और उनके हाथ में मोबाइल फोन थाम देती हैं, जिससे बच्चा वैसे ही संस्कार ले रहा है। इसका ही कारण है कि बच्चे पायलट, अफसर बनने के बाद भी अपने बुढ़े माता पिता की ओर ध्यान नहीं देते हैं। माता पिता अब वृद्धाश्रम में रहते हैं। अब माता पिता को जरूरत है कि वह बच्चों के साथ गहराई से जुड़ाव रखें, जिससे उनकी नैतिक उन्नति हो सके।
इन बच्चों को किया गया सम्मानित
विद्यालय के 25 साल पूरे होने पर रजत जयंती और वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान स्कूल की वार्षिक पत्रिका ऋषिकुल का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। इस दौरान अनस खान, कपिल कुमार, आकाश, केश्व अग्रवाल को रत्न सिंह पुरुस्कार से सम्मानित किया गया। अपर्णा, जारा, खुशी, करुणा को राजकली देवी सम्मान से दिया गया।
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कार्यक्रम की शुरूआत उन्होंने यूपी के कैबिनेट मंत्री सुनील कुमार शर्मा, पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी व स्कूल समिति के अध्यक्ष सुभाष त्यागी के साथ दीप प्रज्वलित कर की। आचार्य देवब्रत ने वैदिक शिक्षा और नैतिकता पर कहा कि भारत की पहचान उसके वेद हैं। भारत की वेदों की पढ़ाई के दौरान भारत को विश्व में सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। यहां हर जाति का व्यक्ति अपने हिसाब से व्यापार करता था। इसके कारण भारत की जीडीपी उस समय सबसे अधिक थी।
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गुरुकुलों में छात्रों को वेद की पढ़ाई कराई जाती थी। इसके बाद अंग्रेज भारत में आ गए, जिन्होंने सबसे पहले भारत की संस्कृति की विरासत को समाप्त करने का काम किया। अंग्रेजों ने धर्म के नाम पर अंधविश्वास फैलाया, जिससे जातपात को बढ़ावा मिला। उन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने 40 ग्रंथों की रचना की थी, जिसके जरिए शिक्षा पर विशेष जोर देने का काम किया था। आज देश में एक हजार से अधिक विद्यालय उनके नाम से चल रहे हैं।
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राज्यपाल ने कहा कि अब समय बदल गया है। आज की माताएं अपने बच्चों को संस्कारी बनाने से बचती हैं और उनके हाथ में मोबाइल फोन थाम देती हैं, जिससे बच्चा वैसे ही संस्कार ले रहा है। इसका ही कारण है कि बच्चे पायलट, अफसर बनने के बाद भी अपने बुढ़े माता पिता की ओर ध्यान नहीं देते हैं। माता पिता अब वृद्धाश्रम में रहते हैं। अब माता पिता को जरूरत है कि वह बच्चों के साथ गहराई से जुड़ाव रखें, जिससे उनकी नैतिक उन्नति हो सके।
इन बच्चों को किया गया सम्मानित
विद्यालय के 25 साल पूरे होने पर रजत जयंती और वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान स्कूल की वार्षिक पत्रिका ऋषिकुल का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। इस दौरान अनस खान, कपिल कुमार, आकाश, केश्व अग्रवाल को रत्न सिंह पुरुस्कार से सम्मानित किया गया। अपर्णा, जारा, खुशी, करुणा को राजकली देवी सम्मान से दिया गया।