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Ghaziabad News: असुरक्षा के घेरे में सुरक्षा के पहरेदार

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jun 2026 12:06 AM IST
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Guardians of security amidst a circle of insecurity.
गाजियाबाद। दिल्ली और लखनऊ में हाल में हुए अग्निकांडों के बाद सरकारी तंत्र कोचिंग सेंटर, होटल, अस्पताल और औद्योगिक इकाइयों में अग्नि सुरक्षा मानकों की पड़ताल में जुटा है। नियमों के पालन में हीलाहवाली पर नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई भी की जा रही है। इस काम में पुलिस विभाग भी बराबर हाथ बंटा रहा है, लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि सुरक्षा के ये पहरेदार खुद असुरक्षा के घेरे में हैं। शहर के कई पुलिस थानों में आग से बचाव के बुनियादी संसाधन तक उपलब्ध नहीं हैं। कई भवनों में फायर एक्सटिंग्विशर, फायर अलार्म, हाईड्रेंट सिस्टम और फायर स्प्रिंकलर जैसी व्यवस्थाएं नहीं हैं। कुछ स्थानों पर रेत से भरी बाल्टियां तक नहीं दिखाई देतीं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जिस व्यवस्था के कंधे पर पूरे समाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वह अपने घर की सलामती के लिए गंभीर क्यों नहीं है? अगर यहां कोई हादसा होता है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
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साइबर थाने में फायर स्प्रिंकलर न रेत की बाल्टियां
शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे साइबर थाने के भूतल पर नगर कोतवाली महिला सशक्तीकरण की टीम पीड़िताओं की फरियाद सुनती नजर आई। मुंशी कार्य में व्यस्त दिखे। प्रथम तल पर शिकायत प्रकोष्ठ समेत कई कार्यालय हैं, जहां 40 से 50 कर्मचारी और सात-आठ फरियादी मौजूद थे। पड़ताल करने पर थाना परिसर में कई खामियां दिखीं। तीन मंजिला भवन में ऊपर जाने के लिए करीब ढाई फीट चौड़ी एकमात्र सीढ़ी है, जिसमें तीन मोड़ हैं। इसी रास्ते से पुलिसकर्मी और शिकायत लेकर आने वाले लोगों की आवाजाही होती है। भवन में आग से बचाव के लिए फायर स्प्रिंकलर तो दूर रेत से भरी बाल्टियां तक दिखाई नहीं दीं। यह स्थिति तब है, जब यहां बरामदे में पुराने वाहनों का ढेर लगा हुआ है।
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कविनगर थाने में साज-सज्जा पर जोर, सुरक्षा इंतजाम कमजोर
दोपहर करीब डेढ़ बजे कविनगर थाने की दो मंजिलों में स्टाफ कार्य में व्यस्त दिखा। थाने का भवन पुनरुद्धार के बाद आधुनिक स्वरूप में दिखाई देता है। चमकदार टाइल्स और साज-सज्जा भवन की पहचान जरूर बढ़ा रही हैं, लेकिन आग से बचाव के पर्याप्त संसाधन यहां भी नजर नहीं आए। प्राथमिक स्तर के स्थानीय संसाधनों का अभाव भी दिखाई दिया। हालांकि, थाने के पीछे बने आवासीय भवनों में अग्निशामक यंत्र लगे मिले।
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पुराने थाना भवनों में भी सुरक्षा व्यवस्था का अभाव
मोदीनगर, मुरादनगर, विजयनगर, नगर कोतवाली, नंदग्राम, सिहानी गेट और भोजपुर सहित कई पुराने थाना भवनों में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं मिले। कई स्थानों पर पोर्टेबल अग्निशामक यंत्र, स्मोक डिटेक्टर, फायर हाईड्रेंट सिस्टम और स्प्रिंकलर व्यवस्था मौजूद नहीं है।


कार्यवाहक डीसीपी पुलिस लाइन धवल जायसवाल ने बताया कि इंदिरापुरम, खोड़ा, अंकुर विहार और मधुबन बापूधाम जैसे नए थाना भवनों में अग्नि सुरक्षा यंत्र लगाए गए हैं। पुराने भवनों के लिए फायर सिलिंडर, हाईड्रेंट सिस्टम और अन्य उपकरणों की मांग शासन से की गई है। यहां जल्द व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
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