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Ghaziabad News: ग्रेप चार की पाबंदियां बेअसर... सांसों में घुल रहा जहर, एक्यूआई 425
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साहिबाबाद। ग्रेप चार की पाबंदियां भी बेअसर हो रही हैं। लगातार दूसरे दिन शहर का एक्यूआई गंभीर श्रेणी में बना रहा। चौबीस घंटे के अंतराल में महज 33 अंकों की कमी हुई और 425 एक्यूआई के साथ गाजियाबाद सोमवार को भी देश का पहला सबसे प्रदूषित शहर रहा।
बढ़ते एक्यूआई के बाद शनिवार रात से ग्रेप चार की पाबंदियां शहर में लागू हैं। बावजूद इसके शहर में ग्रेप प्रथम श्रेणी की पाबंदी भी अधिकारी नहीं लगा पा रहे। ग्रेप चार की पाबंदियों के तहत निर्माण कार्य पर रोक के साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में चिमनी भट्टी पर होने वाले काम पर भी रोक है। वहीं शहर में न तो कूड़े में आग लगाने की प्रक्रिया ही थमी है और न ही निर्माण कार्य। नतीजा प्रतिदिन शाम चार बजे जारी बढ़ा हुआ एक्यूआई बुलेटिन आ रहा है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अंकित सिंह का कहना है कि पाबंदियों को लागू कराना सभी विभागों की जिम्मेदारी बनती है। हालांकि संयुक्त टीम काम कर रही है लेकिन तापमान गिरने और शहर में वाहनों के दबाव व निर्माण साइट होने की वजह से परेशानी बढ़ी है। इसके लिए नगर निगम पानी का छिड़काव करा रहा है।
इनसेट
देश के पांच सर्वाधिक प्रदूषित शहर
गाजियाबाद 425
नोएडा 412
दिल्ली 410
गुरुग्राम 379
ग्रेटर नोएडा 375
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -
चारों स्टेशनों का हाल
इंदिरापुरम-435
लोनी-464
संजयनगर-376
वसुंधरा-426
-- -- -- -- -- -- -- -- -
ओसीईएमएस न लगाने वाले 62 उद्यमियों को नोटिस
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने सीपीसीबी के निर्देश पर औद्योगिक इकाइयों को ओसीईएमएस लगाने के आदेश जारी किए थे। इसे लगाने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर रखी गई थी। बावजूद इसके 62 उद्यमियों ने यह सिस्टम अपने यहां नहीं लगवाया है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली सिस्टम (ओसीईएमएस) नहीं लगाने वाले 62 उद्यमियों को यूपीपीसीबी की तरफ से अब नोटिस जारी किए गए हैं। इनकी रिपोर्ट बनाकर लखनऊ मुख्यालय भी भेज दी गई है। अंकित सिंह ने बताया कि सभी उद्यमियों को बोर्ड की ओर से विक्रेताओं की सूची भी उपलब्ध कराई गई थी जहां से ओसीईएमएस मिल सकता है। उन्होंने बताया कि जांच में पता चला है कि इन इंडस्टि्यलों ने अभी तक ऑर्डर भी नहीं किया है। दरअसल यह औद्योगिक इकाइयों (जैसे चिमनियों) से निकलने वाले प्रदूषण (गैस और धूल के कणों) को 24 घंटे और रीयल-टाइम (तत्काल) मापने की एक आधुनिक तकनीक है।
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इनसेट
लोनी में सील की गई 12 औद्योगिक इकाई
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सोमवार को भी लोनी में बड़ी कार्रवाई की गई है। वायु प्रदूषण और जल प्रदूषित करने वाले 12 औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इन सभी को सील कर दिया गया है। यह सभी फैक्ट्रियां टैक्सटाइल, डाइंग, पैकेजिंग इत्यादि काम से जुड़ी हुईं थीं जो अवैध तौर संचालित की जा रही थीं।
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बढ़ते एक्यूआई के बाद शनिवार रात से ग्रेप चार की पाबंदियां शहर में लागू हैं। बावजूद इसके शहर में ग्रेप प्रथम श्रेणी की पाबंदी भी अधिकारी नहीं लगा पा रहे। ग्रेप चार की पाबंदियों के तहत निर्माण कार्य पर रोक के साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में चिमनी भट्टी पर होने वाले काम पर भी रोक है। वहीं शहर में न तो कूड़े में आग लगाने की प्रक्रिया ही थमी है और न ही निर्माण कार्य। नतीजा प्रतिदिन शाम चार बजे जारी बढ़ा हुआ एक्यूआई बुलेटिन आ रहा है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अंकित सिंह का कहना है कि पाबंदियों को लागू कराना सभी विभागों की जिम्मेदारी बनती है। हालांकि संयुक्त टीम काम कर रही है लेकिन तापमान गिरने और शहर में वाहनों के दबाव व निर्माण साइट होने की वजह से परेशानी बढ़ी है। इसके लिए नगर निगम पानी का छिड़काव करा रहा है।
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देश के पांच सर्वाधिक प्रदूषित शहर
गाजियाबाद 425
नोएडा 412
दिल्ली 410
गुरुग्राम 379
ग्रेटर नोएडा 375
चारों स्टेशनों का हाल
इंदिरापुरम-435
लोनी-464
संजयनगर-376
वसुंधरा-426
ओसीईएमएस न लगाने वाले 62 उद्यमियों को नोटिस
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने सीपीसीबी के निर्देश पर औद्योगिक इकाइयों को ओसीईएमएस लगाने के आदेश जारी किए थे। इसे लगाने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर रखी गई थी। बावजूद इसके 62 उद्यमियों ने यह सिस्टम अपने यहां नहीं लगवाया है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली सिस्टम (ओसीईएमएस) नहीं लगाने वाले 62 उद्यमियों को यूपीपीसीबी की तरफ से अब नोटिस जारी किए गए हैं। इनकी रिपोर्ट बनाकर लखनऊ मुख्यालय भी भेज दी गई है। अंकित सिंह ने बताया कि सभी उद्यमियों को बोर्ड की ओर से विक्रेताओं की सूची भी उपलब्ध कराई गई थी जहां से ओसीईएमएस मिल सकता है। उन्होंने बताया कि जांच में पता चला है कि इन इंडस्टि्यलों ने अभी तक ऑर्डर भी नहीं किया है। दरअसल यह औद्योगिक इकाइयों (जैसे चिमनियों) से निकलने वाले प्रदूषण (गैस और धूल के कणों) को 24 घंटे और रीयल-टाइम (तत्काल) मापने की एक आधुनिक तकनीक है।
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लोनी में सील की गई 12 औद्योगिक इकाई
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सोमवार को भी लोनी में बड़ी कार्रवाई की गई है। वायु प्रदूषण और जल प्रदूषित करने वाले 12 औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इन सभी को सील कर दिया गया है। यह सभी फैक्ट्रियां टैक्सटाइल, डाइंग, पैकेजिंग इत्यादि काम से जुड़ी हुईं थीं जो अवैध तौर संचालित की जा रही थीं।