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Ghaziabad News: दिल की बीमारी का सरकारी इलाज बंद
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गाजियाबाद। दिल की बीमारी का इलाज सरकारी अस्पतालों में बंद हो गया है क्योंकि किसी भी सरकारी अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। रक्तचाप संबंधित मरीजों का इलाज फिलहाल फिजिशियन कर रहे हैं, अन्य मरीजों को दिल्ली रेफर किया जा रहा है। इसके अलावा चेस्ट फिजिशियन, त्वचा रोग विशेषज्ञ और सर्जन के पद पर भी एक भी डॉक्टर नहीं हैं। एक महीने में एमएमजी और संयुक्त अस्पताल से 108 एंबुलेंस से से 150 से 170 हृदय रोगियों को दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है।
सरकारी अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं होने से मरीजों को निजी अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञों के पास जाना पड़ रहा है। मरीजों को डॉक्टर की फीस एक हजार से ढाई हजार रुपये तक देनी पड़ रही है जबकि जांच और ऑपरेशन कराने पर ढाई से पांच लाख रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। कार्डियोलॉजी एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष व हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आसित खन्ना का कहना है कि दूषित खानपान, शारीरिक श्रम की कमी, बॉडी बनाने में प्रोटीन पाउडर के अनावश्यक सेवन से हर 12वां युवा वर्ग हृदय रोग से ग्रसित हो रहा है। कई युवाओं को 16 से 18 वर्ष की उम्र में भी हृदयाघात हो रहा है। उन्होंने बताया कि आठ से दस वर्ष के बच्चों में भी हृदय की बीमारियां पाई जा रही है लेकिन उनमें वंशानुगत होती हैं। उन्होंने बताया कि जिले में हृदय रोगियों की संख्या बढ़ने का सबसे बड़ा कारण प्रदूषण भी है। इससे बचाव के लिए दैनिक योग और शारीरिक श्रम करने की आवश्यकता है।
अस्पताल में चिकित्सकों का हाल
एमएमजी अस्पताल में पद - 30 कार्यरत - 24
चेस्ट फिजिशियन, ईएमओ, हृदय और अस्थि रोग विशेषज्ञ
महिला अस्पताल पद - 17
कार्यरत - 09
अस्पताल में महिला सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट और ईएमओ नहीं हैं।
संयुक्त अस्पताल में डॉक्टरों के पद - 38
डॉक्टर कार्यरत - 15
पीकू सेंटर पर जरूरत - छह बाल रोग विशेषज्ञ - कार्यरत एक भी नहीं
फिजिशियन - चार - एक भी नहीं
चेस्ट फिजिशियन - चार - एक
कार्डियोलॉजिस्ट - दो - एक भी नहीं
वेंटिलेटर विशेषज्ञ - दो - एक भी नहीं
ईसीजी टेक्नीशियन - छह - एक
महिला रोग विशेषज्ञ - छह - दो कार्यरत
ट्रॉमा सेंटर
एक न्यूरो सर्जन, दो जनरल सर्जन, दो आर्थोपेडिक सर्जन, दो कार्डियोलॉजिस्ट, दो एनेस्थेटिस्ट, दो ओटी टेक्नीशियन, दो ईएमओ, स्टाफ नर्स और वार्ड ब्वाय का पद। अस्पताल में डीएनबी कोर्स शुरू होने पर ट्रामा सेंटर को 12 के स्थान पर 50 बेड का किया जाएगा तो पद भी बढ़ेंगे
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बयान
जहां पर डॉक्टरों के पद रिक्त हैं, वहां संविदा और दोबारा ज्वाइन करने वाले डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। आचार संहिता खत्म होने के बाद शासन स्तर से हृदय रोग विशेषज्ञ सहित अन्य डॉक्टरों की नियुक्ति की संभावना है। - डॉ. भवतोष शंखधार, सीएमओ
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सरकारी अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं होने से मरीजों को निजी अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञों के पास जाना पड़ रहा है। मरीजों को डॉक्टर की फीस एक हजार से ढाई हजार रुपये तक देनी पड़ रही है जबकि जांच और ऑपरेशन कराने पर ढाई से पांच लाख रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। कार्डियोलॉजी एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष व हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आसित खन्ना का कहना है कि दूषित खानपान, शारीरिक श्रम की कमी, बॉडी बनाने में प्रोटीन पाउडर के अनावश्यक सेवन से हर 12वां युवा वर्ग हृदय रोग से ग्रसित हो रहा है। कई युवाओं को 16 से 18 वर्ष की उम्र में भी हृदयाघात हो रहा है। उन्होंने बताया कि आठ से दस वर्ष के बच्चों में भी हृदय की बीमारियां पाई जा रही है लेकिन उनमें वंशानुगत होती हैं। उन्होंने बताया कि जिले में हृदय रोगियों की संख्या बढ़ने का सबसे बड़ा कारण प्रदूषण भी है। इससे बचाव के लिए दैनिक योग और शारीरिक श्रम करने की आवश्यकता है।
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अस्पताल में चिकित्सकों का हाल
एमएमजी अस्पताल में पद - 30 कार्यरत - 24
चेस्ट फिजिशियन, ईएमओ, हृदय और अस्थि रोग विशेषज्ञ
महिला अस्पताल पद - 17
कार्यरत - 09
अस्पताल में महिला सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट और ईएमओ नहीं हैं।
संयुक्त अस्पताल में डॉक्टरों के पद - 38
डॉक्टर कार्यरत - 15
पीकू सेंटर पर जरूरत - छह बाल रोग विशेषज्ञ - कार्यरत एक भी नहीं
फिजिशियन - चार - एक भी नहीं
चेस्ट फिजिशियन - चार - एक
कार्डियोलॉजिस्ट - दो - एक भी नहीं
वेंटिलेटर विशेषज्ञ - दो - एक भी नहीं
ईसीजी टेक्नीशियन - छह - एक
महिला रोग विशेषज्ञ - छह - दो कार्यरत
ट्रॉमा सेंटर
एक न्यूरो सर्जन, दो जनरल सर्जन, दो आर्थोपेडिक सर्जन, दो कार्डियोलॉजिस्ट, दो एनेस्थेटिस्ट, दो ओटी टेक्नीशियन, दो ईएमओ, स्टाफ नर्स और वार्ड ब्वाय का पद। अस्पताल में डीएनबी कोर्स शुरू होने पर ट्रामा सेंटर को 12 के स्थान पर 50 बेड का किया जाएगा तो पद भी बढ़ेंगे
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जहां पर डॉक्टरों के पद रिक्त हैं, वहां संविदा और दोबारा ज्वाइन करने वाले डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। आचार संहिता खत्म होने के बाद शासन स्तर से हृदय रोग विशेषज्ञ सहित अन्य डॉक्टरों की नियुक्ति की संभावना है। - डॉ. भवतोष शंखधार, सीएमओ