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प्रदूषण की बढ़ी ऊंचाई, 20वीं मंजिल वाले भी परेशान
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प्रदूषण की बढ़ी ऊंचाई, 20वीं मंजिल वाले भी परेशान
साहिबाबाद। प्रदूषण सिर्फ एक्यूआई में ऊपर नहीं चढ़ रहा बल्कि उसकी ऊंचाई भी बढ़ रही है। बहुमंजिला इमारतों में अब 20वीं मंजिल पर भी प्रदूषण की वही मार है जो नीचे रहने वालों पर पड़ रही है। यह बात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वे में सामने आई है। जानकारों के मुताबिक हवा थम जाने और नमी बढ़ने से प्रदूषित कण अब हाईराइज वालों को भी परेशान कर रहे हैं। बचाव के लिए कोई एयर प्यूरीफायर लगा रहा है तो किसी ने मिनी गार्डन बनाया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी उत्सव शर्मा ने बताया कि प्रदूषण को लेकर हाल में एक सर्वे किया था। जिसमें पाया कि प्रदूषण ग्राउंड फ्लोर पर जितना परेशान कर रहा है उतना ही 20वीं मंजिल पर भी हानिकारक है। उनका कहना है कि हाईराइज वालों को रात में अधिक परेशानी हो रही है। रात में हवा रुक जा रही है। ऐसे में जो ऊपर प्रदूषण के कण होते हैं वो चारों और फैलने लगते हैं। रात में वेंटिलेशन प्रोसेसिंग यानी मिक्सिंग हाइट 1100 और 1400 मीटर से नीचे गिर जाती है। इसका मुख्य कारण तापमान में नमी और हवा की गति रुकना माना गया है। इसका कारण ऊपरी मंजिलों में लोगों का सांस लेना दूभर हो जाता है। साल दर साल यह समस्या बढ़ती जा रही है। अगले पांच दिनों तक हालात ऐसे ही रहने का अनुमान है।
बालकनी और छत पर बनाया मिनी गार्डन
हाईराइज सोसायटी में लोगों ने प्रदूषण से बचाव के लिए बालकनी और घर की छत पर मिनी गार्डन बना लिया है। इसमें हवा में ऑक्सीजन के लेवल को बढ़ाने वाले पौधे भी लगाए हैं। एटीएस सोसायटी निवासी दीपाली सिन्हा ने बताया कि उन्होंने छत पर मिनी गार्डन में 150 से ज्यादा पौधे लगाए हैं। इनमें सबसे ज्यादा अरेका पाम, स्नेक प्लांट और मनी प्लांट हैं। यह तीनों प्लांट हवा में ऑक्सीजन को बढ़ाते हैं। इतना ही नहीं, अब पौधारोपण कार्यक्रम में अधिकांश लोग हिस्सा लेने लगे हैं। जो समय-दर समय सभी को पौधारोपण के लिए जागरूक करते हैं।
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एयर प्यूरीफायर से मिलती है राहत
- 16वीं मंजिल पर रहने के दौरान मुझे ताजी हवा नहीं मिलने पर परेशानी होती है। बालकनी की खिड़कियां-दरवाजे खुले रखते हैं तो प्रदूषण का प्रभाव अंदर तक आता है। लेकिन धुंध की वजह से अब बंद रखना पड़ रहा है। एयर प्यूरीफायर चलाने पर थोड़ी राहत मिल जाती है। - प्रेमलता सिन्हा
आंखों में जलन
घरों के अंदर आंखों में जलन लगातार बनी है। यहां तक कि धुंधला दिखने लगा है। मुझे लगता था कि शायद मुझे ही यह परेशानी हो रही है, लेकिन सोसायटी में जब बात की तो सभी को यही परेशानी हो रही है। - माधुरी श्रीवास्तव
सांस लेने में दिक्कत
प्रदूषण की वजह से लगातार सांस लेने में परेशानी आ रही है। मैंने घर में मिनी गार्डन बना लिया है। जिसमें ऑक्सीजन देने वाले कई पौधे लगाए हैं। इनसे ही राहत की अपेक्षा रखते हैं। - सुमिता भट्टाचार्य
एक्यूआई का सेहत पर असर
एक्यूआई स्थिति सेहत पर प्रभाव
0-50 बेहतर बहुत कम प्रभाव
51-100 संतोषजनक संवेदनशील, हवा शुद्ध नहीं मिलती
101-200 मध्यम अस्थमा और हृदय रोगियों के सांस लेने में परेशानी
201-300 खराब ज्यादातर लोगों को सांस लेने में परेशानी
301-400 बहुत खराब श्वास संबंधी बीमारी
401-500 खतरनाक स्वस्थ व्यक्ति भी बीमारियों की चपेट में आएगा
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साहिबाबाद। प्रदूषण सिर्फ एक्यूआई में ऊपर नहीं चढ़ रहा बल्कि उसकी ऊंचाई भी बढ़ रही है। बहुमंजिला इमारतों में अब 20वीं मंजिल पर भी प्रदूषण की वही मार है जो नीचे रहने वालों पर पड़ रही है। यह बात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वे में सामने आई है। जानकारों के मुताबिक हवा थम जाने और नमी बढ़ने से प्रदूषित कण अब हाईराइज वालों को भी परेशान कर रहे हैं। बचाव के लिए कोई एयर प्यूरीफायर लगा रहा है तो किसी ने मिनी गार्डन बनाया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी उत्सव शर्मा ने बताया कि प्रदूषण को लेकर हाल में एक सर्वे किया था। जिसमें पाया कि प्रदूषण ग्राउंड फ्लोर पर जितना परेशान कर रहा है उतना ही 20वीं मंजिल पर भी हानिकारक है। उनका कहना है कि हाईराइज वालों को रात में अधिक परेशानी हो रही है। रात में हवा रुक जा रही है। ऐसे में जो ऊपर प्रदूषण के कण होते हैं वो चारों और फैलने लगते हैं। रात में वेंटिलेशन प्रोसेसिंग यानी मिक्सिंग हाइट 1100 और 1400 मीटर से नीचे गिर जाती है। इसका मुख्य कारण तापमान में नमी और हवा की गति रुकना माना गया है। इसका कारण ऊपरी मंजिलों में लोगों का सांस लेना दूभर हो जाता है। साल दर साल यह समस्या बढ़ती जा रही है। अगले पांच दिनों तक हालात ऐसे ही रहने का अनुमान है।
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बालकनी और छत पर बनाया मिनी गार्डन
हाईराइज सोसायटी में लोगों ने प्रदूषण से बचाव के लिए बालकनी और घर की छत पर मिनी गार्डन बना लिया है। इसमें हवा में ऑक्सीजन के लेवल को बढ़ाने वाले पौधे भी लगाए हैं। एटीएस सोसायटी निवासी दीपाली सिन्हा ने बताया कि उन्होंने छत पर मिनी गार्डन में 150 से ज्यादा पौधे लगाए हैं। इनमें सबसे ज्यादा अरेका पाम, स्नेक प्लांट और मनी प्लांट हैं। यह तीनों प्लांट हवा में ऑक्सीजन को बढ़ाते हैं। इतना ही नहीं, अब पौधारोपण कार्यक्रम में अधिकांश लोग हिस्सा लेने लगे हैं। जो समय-दर समय सभी को पौधारोपण के लिए जागरूक करते हैं।
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एयर प्यूरीफायर से मिलती है राहत
- 16वीं मंजिल पर रहने के दौरान मुझे ताजी हवा नहीं मिलने पर परेशानी होती है। बालकनी की खिड़कियां-दरवाजे खुले रखते हैं तो प्रदूषण का प्रभाव अंदर तक आता है। लेकिन धुंध की वजह से अब बंद रखना पड़ रहा है। एयर प्यूरीफायर चलाने पर थोड़ी राहत मिल जाती है। - प्रेमलता सिन्हा
आंखों में जलन
घरों के अंदर आंखों में जलन लगातार बनी है। यहां तक कि धुंधला दिखने लगा है। मुझे लगता था कि शायद मुझे ही यह परेशानी हो रही है, लेकिन सोसायटी में जब बात की तो सभी को यही परेशानी हो रही है। - माधुरी श्रीवास्तव
सांस लेने में दिक्कत
प्रदूषण की वजह से लगातार सांस लेने में परेशानी आ रही है। मैंने घर में मिनी गार्डन बना लिया है। जिसमें ऑक्सीजन देने वाले कई पौधे लगाए हैं। इनसे ही राहत की अपेक्षा रखते हैं। - सुमिता भट्टाचार्य
एक्यूआई का सेहत पर असर
एक्यूआई स्थिति सेहत पर प्रभाव
0-50 बेहतर बहुत कम प्रभाव
51-100 संतोषजनक संवेदनशील, हवा शुद्ध नहीं मिलती
101-200 मध्यम अस्थमा और हृदय रोगियों के सांस लेने में परेशानी
201-300 खराब ज्यादातर लोगों को सांस लेने में परेशानी
301-400 बहुत खराब श्वास संबंधी बीमारी
401-500 खतरनाक स्वस्थ व्यक्ति भी बीमारियों की चपेट में आएगा