दिवाली से पहले शहर की हवा ‘सेहत’ को दे रही झटका, खराब जोन में पहुंचा एक्यूआई

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 14 Oct 2021 01:06 AM IST
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दिवाली से पहले शहर की हवा सेहत के लिए हुई खराब
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साहिबाबाद। शहर का प्रदूषण लेवल दिवाली से पहले ही सेहत के लिए खराब हो चुका है। बुधवार को एक्यूआई लेवल 200 के स्तर को पार करते हुए 223 पर रिकॉर्ड हुआ। वहीं, सितंबर में लोगों को सबसे स्वच्छ हवा मिलने के बाद अक्तूबर माह के आठ दिनों में प्रदूषण की गुणवत्ता लगातार येलो जोन में दर्ज हो रही थी जो अब ऑरेंज जोन में पहुंच गई है। इससे सांस के मरीजों को ज्यादा दिक्कत महसूस होने लगी है। हालांकि, पिछले 73 दिनों की बात करें तो लोगों को 36 दिन शुद्ध हवा मिली, जबकि 37 दिन वायु गुणवत्ता सबसे खराब रिकॉर्ड हुई है।
पीसीबी के रिकॉर्ड के अनुसार, गाजियाबाद का एक्यूआई ऑरेंज जोन में पहुंच गया है। जहां एक्यूआई 223 होने पर एनसीआर के इलाकों में सबसे ज्यादा मापा गया। शहर के चार स्टेशनों पर भी हालात लगातार खराब हो रहे हैं। यहां भी एक्यूआई लेवल 200 के पार दर्ज हुआ है। आंकड़ों को देखें तो बुधवार को इंदिरापुरम में एक्यूआई 223, लोनी में 239 और वसुंधरा में सर्वाधिक 255 पर वायु गुणवत्ता सूचकांक दर्ज हुआ। जबकि संजय नगर में 204 एक्यूआई मापा गया। पीसीबी अधिकारी का कहना है कि वायुमंडल में हवा की गति धीमी होने से प्रदूषण के कण नीचे जमीन पर नहीं पहुंच रहे हैं। इससे धूल और मिट्टी के कणों के अलावा वाहनों का धुआं वायुमंडल में ही घूम रहा है। जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। अक्तूबर के अभी 13 दिन ही बीते हैं, जिसमें शहर का प्रदूषण स्तर ऑरेंज जोन में दर्ज हुआ है।

पीसीबी अधिकारियों का कहना है कि अगस्त व सितंबर में भरपूर बारिश और हवा की गति अच्छी रहने के कारण एक्यूआई ग्रीन जोन में ज्यादा रहा। अक्तूबर शुरुआत से ही हवा की गति कमजोर पड़ गई है। पांच किलोमीटर की रफ्तार से भी हवा नहीं बह रही है। इससे एक्यूआई में इजाफा हुआ है। प्रदूूषण बढ़ने का सबसे बड़ा कारण वाहन माना जा रहा है। वाहन, टूटी सड़क, सड़कों पर जलता कूड़ा और जगह-जगह फैली गंदगी व निर्माणाधीन साइटों से उड़ती धूल के कारण प्रदूषण का ग्राफ बढ़ने लगता है। पीसीबी ने हाल ही आवासीय क्षेत्रों में कंस्ट्रक्शन साइट से उड़ती धूल, धुआं और गंदगी के कारण भोपुरा, संजय नगर, वसुंधरा, कौशांबी को हॉट स्पॉट में शामिल किया है। वहीं, औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले प्रदूषण को लेकर भी कार्रवाई धीमी गति से चल रही है। वर्ष 2018 में प्रदूषण फैलाने वाली करीब 400 इकाइयों को पीसीबी ने रेड कैटेगरी में रखा था। जबकि वर्ष 2020 में 300 और इस साल 100 इकाइयों को रेड कैटेगरी में रखा गया है।
500 रुपये से लेकर दस हजार तक का जुर्माना
पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी उत्सव शर्मा ने बताया कि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होती रहती है। इसमें 500 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक का जुर्माने का प्रावधान है। छोटी निर्माण साइटों पर धूल उड़ते पाए जाने पर 500 रुपये से कार्रवाई शुरू होती है। अक्सर ज्यादातर शिकायत किसी न किसी कारण से धूल उड़ने की रहती है। इससे पीएम 10 की मात्रा बढ़ती है जो सांस रोगियों के लिए खतरनाक है।
प्रदूषण के हालात :
- अगस्त में 9 दिन हवा की गुणवत्ता अच्छी, जबकि 2 सबसे अच्छी हवा मिली। वहीं, 20 दिन एक्यूआई येलो जोन में दर्ज हुआ।
- सितंबर माह में 22 दिन हवा अच्छी मिली, सिर्फ तीन दिन प्रदूषण स्तर सबसे अच्छा था। अन्य पांच दिन में हवा की गुणवत्ता खराब रही।
- अक्तूबर माह में वायु गुणवत्ता सूचकांक बारह दिनों बाद ऑरेंग जोन में रिकॉर्ड हो रहा है।

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