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ग्यारहवीं में विषय देने से पहले पूछे जा रहे सपने तो कहीं हो रहा मौखिक टेस्ट
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ग्यारहवीं में विषय देने से पहले पूछे जा रहे सपने तो कहीं हो रहा मौखिक टेस्ट
साहिबाबाद। कोरोना काल में सबसे अधिक प्रभावित शिक्षा प्रणाली हुई है। इस बार दसवीं की बोर्ड परीक्षा न होने की वजह से एक बड़ी दिक्कत बच्चों के बीच विषय विभाजित करने में आ रही है। बच्चों को मन मुताबिक विषय दिलाने के लिए कई अभिभावक तो सिफारिश भी लगवा रहे हैं। ज्यादातर पैरेंट्स और बच्चे पीसीएम ही लेना चाहते हैैं। ऐसे में स्कूलों ने बच्चों और अभिभावकों को तसल्ली देने और उनके मन मुताबिक विषय देने के लिए बीच का रास्ता निकाल लिया है। मौखिक टेस्ट ले रहे हैं।
ज्यादातर बच्चे और अभिभावक चाहते है साइंस साइड लेना
हम बच्चों के बीच विषय विभाजित करने से पूर्व उनकी काउंसिलिंग कर रहे हैं। विषय देने से पूर्व बच्चों से उनका कॅरिअर प्लान पूछा जा रहा है। कई बच्चे जो क्लास में अच्छे नहीं हैं फिर भी वह और उनके अभिभावक पीसीएम ही लेना चाहते हैं तो उनकी जिद पर पीसीएम दिया जा रहा है लेकिन इसके लिए एक टाइम लिमिट बना दिया है। शुरू के दो माह में पढ़ाई के साथ ही दो से तीन यूनिट टेस्ट होंगे, जिसमें सफल होना अनिवार्य है। यदि बच्चे इस टेस्ट में सफल नहीं होते तो उनका विषय बदल दिया जाएगा। इस पर अभिभावकों ने भी अपनी सहमति दी है। - मंजू राणा, प्रिंसिपल सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल
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अधिकतर अभिभावक चाहते हैं कि उनका बच्चा पीसीएम ही पढ़े लेकिन स्कूल टीचर प्रत्येक बच्चों की क्वालिटी को बेहतर जानता है। ऐसे में बाद में बच्चों का रिजल्ट खराब न हो इसके लिए विषय देने से पूर्व बच्चों का ओरल टेस्ट तय किया गया है। यह टेस्ट ऑनलाइन होगा, जिसमें विद्यार्थी के साथ ही उनके अभिभावक भी शामिल होंगे। बच्चे टेस्ट में सफल हो जाते हैं तो उन्हें मन मुताबिक विषय दिया जा रहा है। - प्रीति गोयल, सनवैली स्कूल वैशाली
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बच्चों पर अभिभावकों द्वारा जबरन कोई विषय थोपा न जाए और स्कूल का भविष्य में रिजल्ट भी खराब न हो, इसके लिए ग्यारहवीं में बच्चों को मन मुताबिक विषय देने से पहले उनका टेस्ट कराया जा रहा है। दरअसल बच्चे बोर्ड परीक्षा की तो पूरी तैयारी कर ही चुके थे ऐसे में तैयारियों के आधार पर ही बच्चों की परीक्षा ली जा रही है। परीक्षा में जो रिजल्ट होता है अभिभावकों को दिखाया जाता है और बच्चों की क्षमता के मुताबिक उन्हें विषय दिया जा रहा है। - प्रीति शर्मा, एवरेस्ट पब्लिक स्कूल
इनसेट
क्षमता जांचने से सहमत हैं अभिभावक
मुझे भी लगता है कि स्कूलों द्वारा ओरल टेस्ट या फिर लिखित परीक्षा लेना ही उचित है। बच्चों में यदि पीसीएम में बेहतर करने की क्षमता है तो उन्हें वही विषय मिलना चाहिए लेकिन उससे पहले टेस्ट भी जरूरी है ताकि क्वालिटी मेंटेन रहे। - रश्मि सिंह
परीक्षा न होने से बच्चे भी काफी परेशान हैं लेकिन अब स्कूल में पफॉर्मेंस के आधार पर ही सब कुछ तय होना है इसलिए मेरा मानना है कि ग्यारहवीं में विषय देने से पहले स्कूलों द्वारा टेस्ट लिया जाए। यह एक बेहतर प्रक्रिया है बच्चों को विषय दिलाने की। - मनीला गुप्ता
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साहिबाबाद। कोरोना काल में सबसे अधिक प्रभावित शिक्षा प्रणाली हुई है। इस बार दसवीं की बोर्ड परीक्षा न होने की वजह से एक बड़ी दिक्कत बच्चों के बीच विषय विभाजित करने में आ रही है। बच्चों को मन मुताबिक विषय दिलाने के लिए कई अभिभावक तो सिफारिश भी लगवा रहे हैं। ज्यादातर पैरेंट्स और बच्चे पीसीएम ही लेना चाहते हैैं। ऐसे में स्कूलों ने बच्चों और अभिभावकों को तसल्ली देने और उनके मन मुताबिक विषय देने के लिए बीच का रास्ता निकाल लिया है। मौखिक टेस्ट ले रहे हैं।
ज्यादातर बच्चे और अभिभावक चाहते है साइंस साइड लेना
हम बच्चों के बीच विषय विभाजित करने से पूर्व उनकी काउंसिलिंग कर रहे हैं। विषय देने से पूर्व बच्चों से उनका कॅरिअर प्लान पूछा जा रहा है। कई बच्चे जो क्लास में अच्छे नहीं हैं फिर भी वह और उनके अभिभावक पीसीएम ही लेना चाहते हैं तो उनकी जिद पर पीसीएम दिया जा रहा है लेकिन इसके लिए एक टाइम लिमिट बना दिया है। शुरू के दो माह में पढ़ाई के साथ ही दो से तीन यूनिट टेस्ट होंगे, जिसमें सफल होना अनिवार्य है। यदि बच्चे इस टेस्ट में सफल नहीं होते तो उनका विषय बदल दिया जाएगा। इस पर अभिभावकों ने भी अपनी सहमति दी है। - मंजू राणा, प्रिंसिपल सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल
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अधिकतर अभिभावक चाहते हैं कि उनका बच्चा पीसीएम ही पढ़े लेकिन स्कूल टीचर प्रत्येक बच्चों की क्वालिटी को बेहतर जानता है। ऐसे में बाद में बच्चों का रिजल्ट खराब न हो इसके लिए विषय देने से पूर्व बच्चों का ओरल टेस्ट तय किया गया है। यह टेस्ट ऑनलाइन होगा, जिसमें विद्यार्थी के साथ ही उनके अभिभावक भी शामिल होंगे। बच्चे टेस्ट में सफल हो जाते हैं तो उन्हें मन मुताबिक विषय दिया जा रहा है। - प्रीति गोयल, सनवैली स्कूल वैशाली
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बच्चों पर अभिभावकों द्वारा जबरन कोई विषय थोपा न जाए और स्कूल का भविष्य में रिजल्ट भी खराब न हो, इसके लिए ग्यारहवीं में बच्चों को मन मुताबिक विषय देने से पहले उनका टेस्ट कराया जा रहा है। दरअसल बच्चे बोर्ड परीक्षा की तो पूरी तैयारी कर ही चुके थे ऐसे में तैयारियों के आधार पर ही बच्चों की परीक्षा ली जा रही है। परीक्षा में जो रिजल्ट होता है अभिभावकों को दिखाया जाता है और बच्चों की क्षमता के मुताबिक उन्हें विषय दिया जा रहा है। - प्रीति शर्मा, एवरेस्ट पब्लिक स्कूल
इनसेट
क्षमता जांचने से सहमत हैं अभिभावक
मुझे भी लगता है कि स्कूलों द्वारा ओरल टेस्ट या फिर लिखित परीक्षा लेना ही उचित है। बच्चों में यदि पीसीएम में बेहतर करने की क्षमता है तो उन्हें वही विषय मिलना चाहिए लेकिन उससे पहले टेस्ट भी जरूरी है ताकि क्वालिटी मेंटेन रहे। - रश्मि सिंह
परीक्षा न होने से बच्चे भी काफी परेशान हैं लेकिन अब स्कूल में पफॉर्मेंस के आधार पर ही सब कुछ तय होना है इसलिए मेरा मानना है कि ग्यारहवीं में विषय देने से पहले स्कूलों द्वारा टेस्ट लिया जाए। यह एक बेहतर प्रक्रिया है बच्चों को विषय दिलाने की। - मनीला गुप्ता