{"_id":"6215280d6693e54c1e58b738","slug":"ghaziyabad-ghaziabad-news-gbd2344548144","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोनी सीएचसी पर 20 साल से भर्ती नहीं हुआ मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोनी सीएचसी पर 20 साल से भर्ती नहीं हुआ मरीज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोनी सीएचसी पर 20 साल से भर्ती नहीं हुआ मरीज
गाजियाबाद। लोनी सीएचसी पर 20 साल से कोई मरीज भर्ती नहीं हुआ है। डासना सीएचसी पर भी 14 साल से कोई मरीज भर्ती नहीं हुआ है। इसी तरह मोदीनगर सीएचसी पर पिछले 11 साल में भर्ती कर किसी मरीज का इलाज नहीं किया गया है। मुरादनगर सीएचसी पर आखिरी मरीज चार साल पहले भर्ती हुआ था। यह हाल तब है जब हर सीएचसी पर 30 बेड की व्यवस्था की गई है। मरीज भर्ती नहीं होने की वजह डॉक्टर के उपलब्ध न होने और रेफर किया जाना है। यह हाल जिले की सभी सीएचसी का है। इस वजह से जिले के सरकारी अस्पतालों पर दबाव बढ़ता है। मरीजों को 20 से 30 किमी दूर जिला अस्पताल में जाना पड़ता है।
दो सीएचसी पर सिर्फ सिजेरियन प्रसव की सुविधा
जिले में ब्लॉक स्तरीय चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लोनी, मोदीनगर, मुरादनगर और डासना संचालित हैं। इनमें से सिर्फ दो सीएचसी लोनी और मुरादनगर में सिजेरियन प्रसव कराए जाते हैं। डासना और मोदीनगर में यह व्यवस्था भी नहीं है। तर्क दिया जाता है कि दोनों केंद्रों पर महिला डॉक्टर न होने से परेशानी आती है। डासना और मोदीनगर क्षेत्र में लगभग दस लाख आबादी के इलाज की जिम्मेदारी है। अगर किसी गर्भवती को प्रसव पीड़ा शुरू होती है तो प्राइवेट अस्पताल में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता क्योंकि मोदीनगर से जिला महिला अस्पताल की दूरी 25 किमी और डासना क्षेत्र के नाहल गांव से 22 किमी है।
ओपीडी में ही मिलता है इलाज
चारों सीएचसी पर सात सौ से आठ मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। ओपीडी में सर्दी, जुकाम और बुखार का ही इलाज हो पाता है, अगर किसी मरीज को भर्ती करने की जरूरत पड़ती है तो कभी रेफर कर तो कभी बहाने बनाकर रास्ता दिखा दिया जाता है। खास बात यह है कि सभी सीएचसी पर 30 बेड की व्यवस्था की गई है। सांस संबंधित गंभीर मरीजों के लिए ऑक्सीजन प्लांट के अलावा ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर भी उपलब्ध कराया गया है।
विज्ञापन
केंद्रों पर ऑक्सीजन प्लांट लगाने के नाम पर खर्च हुए 50 से 55 लाख
कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमित मरीजों की सांस फूलने पर आने वाले समय में मरीजों को परेशानी न हो, इसलिए सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 330 क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए। इन्हें लगाने में अलग-अलग कंपनियों ने 40 से 42 लाख रुपये प्लांट लगाने और 12 से 13 लाख रुपये प्लांट संचालित करने के लिए व्यवस्था बनाने और जनरेटर सेट लगाने में खर्च कर दिया। नियमित संचालन के लिए बिजली का लोड बढ़ाने और ट्रांसफार्मर लगाने में स्वास्थ्य विभाग को दो से ढाई लाख खर्च करने पड़े थे। केंद्र पर मरीज भर्ती न होने से किसी भी प्लांट का संचालन नहीं हुआ, सभी शोपीस बनकर रह गए हैं।
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि डासना और मोदीनगर को जल्द ही फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) बनाया जाएगा, इसके बाद महिला रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति होने पर मरीज भर्ती होने शुरू हो जाएंगे।
ऑपरेशन खर्च (हजार में)
सिजेरियन 35 से 75
सामान्य प्रसव 15 से 17
प्रोस्टेट 30 से 35
पित्त की पथरी 30 से 35
अपेंडिक्स 32से 35
गुर्दे की पथरी 40 से 42
हार्निया 30 से 35
पाइल्स 25से 27
नोट : अलग -अलग अस्पताल में खर्च अलग भी हो सकते हैं।
विज्ञापन
गाजियाबाद। लोनी सीएचसी पर 20 साल से कोई मरीज भर्ती नहीं हुआ है। डासना सीएचसी पर भी 14 साल से कोई मरीज भर्ती नहीं हुआ है। इसी तरह मोदीनगर सीएचसी पर पिछले 11 साल में भर्ती कर किसी मरीज का इलाज नहीं किया गया है। मुरादनगर सीएचसी पर आखिरी मरीज चार साल पहले भर्ती हुआ था। यह हाल तब है जब हर सीएचसी पर 30 बेड की व्यवस्था की गई है। मरीज भर्ती नहीं होने की वजह डॉक्टर के उपलब्ध न होने और रेफर किया जाना है। यह हाल जिले की सभी सीएचसी का है। इस वजह से जिले के सरकारी अस्पतालों पर दबाव बढ़ता है। मरीजों को 20 से 30 किमी दूर जिला अस्पताल में जाना पड़ता है।
दो सीएचसी पर सिर्फ सिजेरियन प्रसव की सुविधा
जिले में ब्लॉक स्तरीय चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लोनी, मोदीनगर, मुरादनगर और डासना संचालित हैं। इनमें से सिर्फ दो सीएचसी लोनी और मुरादनगर में सिजेरियन प्रसव कराए जाते हैं। डासना और मोदीनगर में यह व्यवस्था भी नहीं है। तर्क दिया जाता है कि दोनों केंद्रों पर महिला डॉक्टर न होने से परेशानी आती है। डासना और मोदीनगर क्षेत्र में लगभग दस लाख आबादी के इलाज की जिम्मेदारी है। अगर किसी गर्भवती को प्रसव पीड़ा शुरू होती है तो प्राइवेट अस्पताल में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता क्योंकि मोदीनगर से जिला महिला अस्पताल की दूरी 25 किमी और डासना क्षेत्र के नाहल गांव से 22 किमी है।
विज्ञापन
ओपीडी में ही मिलता है इलाज
चारों सीएचसी पर सात सौ से आठ मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। ओपीडी में सर्दी, जुकाम और बुखार का ही इलाज हो पाता है, अगर किसी मरीज को भर्ती करने की जरूरत पड़ती है तो कभी रेफर कर तो कभी बहाने बनाकर रास्ता दिखा दिया जाता है। खास बात यह है कि सभी सीएचसी पर 30 बेड की व्यवस्था की गई है। सांस संबंधित गंभीर मरीजों के लिए ऑक्सीजन प्लांट के अलावा ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर भी उपलब्ध कराया गया है।
विज्ञापन
केंद्रों पर ऑक्सीजन प्लांट लगाने के नाम पर खर्च हुए 50 से 55 लाख
कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमित मरीजों की सांस फूलने पर आने वाले समय में मरीजों को परेशानी न हो, इसलिए सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 330 क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए। इन्हें लगाने में अलग-अलग कंपनियों ने 40 से 42 लाख रुपये प्लांट लगाने और 12 से 13 लाख रुपये प्लांट संचालित करने के लिए व्यवस्था बनाने और जनरेटर सेट लगाने में खर्च कर दिया। नियमित संचालन के लिए बिजली का लोड बढ़ाने और ट्रांसफार्मर लगाने में स्वास्थ्य विभाग को दो से ढाई लाख खर्च करने पड़े थे। केंद्र पर मरीज भर्ती न होने से किसी भी प्लांट का संचालन नहीं हुआ, सभी शोपीस बनकर रह गए हैं।
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि डासना और मोदीनगर को जल्द ही फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) बनाया जाएगा, इसके बाद महिला रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति होने पर मरीज भर्ती होने शुरू हो जाएंगे।
ऑपरेशन खर्च (हजार में)
सिजेरियन 35 से 75
सामान्य प्रसव 15 से 17
प्रोस्टेट 30 से 35
पित्त की पथरी 30 से 35
अपेंडिक्स 32से 35
गुर्दे की पथरी 40 से 42
हार्निया 30 से 35
पाइल्स 25से 27
नोट : अलग -अलग अस्पताल में खर्च अलग भी हो सकते हैं।