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कॉलेज बनकर तैयार सांसद -विधायक का इंतजार
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स्कूल-कॉलेज बनकर तैयार, शिक्षकों का इंतजार
गाजियाबाद। बालिका शिक्षा के बारे में हर सरकार बड़े-बड़े दावे तो करती है लेकिन धरातल पर कुछ दिखाई नहीं देता। जिले में बालिका शिक्षा को लेकर विधायकों और सांसदों की उदासीनता सामने आई है। बालिका शिक्षा के लिए नए कॉलेज बनाना तो दूर, जो निर्माणाधीन हैं या जिनका निर्माण पूरा हो चुका है उसको संचालित करने के लिए भी कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। अल्पसंख्यक विभाग द्वारा जिले में लगभग 15 करोड़ की लागत से बने इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज शिक्षकों की नियुक्ति ना होने की वजह से शोपीस बने हुए हैं। जिला योजना की बैठक में शिक्षकों की नियुक्ति का मुद्दा उठा था जिसमें जल्द तैनाती का आश्वासन मिला, लेकिन इस बात को भी चार महीने बीत गए अभी तक तैनाती नहीं हुई।
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अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने एजुकेशनल हब योजना के तहत भोजपुर ब्लाक के मछेरी गांव में एक राजकीय इंटर कालेज का निर्माण कराया था जिसकी लागत लगभग चार करोड़ 51 लाख थी। इनके प्रस्ताव 2014-15 में आए थे पास होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया गया था। वर्ष 2019 में यह बनकर तैयार हुआ और शिक्षा विभाग को हैंडओवर भी कर दिया गया लेकिन अभी तक इसमें बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पाई है।
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मुस्तफाबाद बस्ती में भी एजुकेशनल हब के तहत मॉडल इंटर कॉलेज बालकों के लिए बनाया गया था। इसकी लागत तीन करोड़ दो लाख की थी। प्रस्ताव पास होने के बाद वर्ष 2015 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था। कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) ने 2019 में इस कॉलेज को शिक्षा विभाग ने हैंडओवर कर दिया गया था। पहली किश्त जारी होने के बाद बजट ना मिलने की वजह से इसका कार्य लगभग डेढ़ साल तक अटका हुआ था। 2018 में बजट मिलने के बाद इसका निर्माण पूरा होने में छह साल लगे थे और पिछले तीन साल से इस पर ताला लटका हुआ है।
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एक तरफ बालिकाओं और महिला को सशक्त बनाने के लिए मिशन शक्ति अभियान चलाया जा रहा है वहीं अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं को उच्च शिक्षा की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। लोनी के प्रेम नगर में मॉडल इंटर कॉलेज बालिकाओं के लिए बनाया है। इसका भी प्रस्ताव 2015 में पास हुआ था और निर्माण 2019 में पूरा होकर शिक्षा विभाग को हैंडओवर कर दिया गया था। इसकी लागत तीन करोड़ दो लाख थी। तीन साल बाद भी अभी इस पर ताला ही लगा हुआ है।
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रजापुर ब्लॉक स्थित राजकीय महिला डिग्री कॉलेज, डासना का भी यही हाल है। इस क्षेत्र में 20 किलोमीटर के दायरे में कोई भी डिग्री कॉलेज नहीं है। डासना में करीब सात वर्ष पहले चार करोड़ 77 लाख की लागत से डिग्री कॉलेज का निर्माण हुआ था लेकिन निर्माण लागत बढ़ने के कारण 80 फीसदी कार्य होने के बाद बजट के अभाव में धूल फांक रहा है। वर्ष 2018 से इसका कार्य बंद पड़ा हुआ है। निर्माणकारी कंपनी ने संशोधित बजट में चार करोड़ 44 लाख की मांग की है।
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पद सृजित ना होने की वजह से इन कॉलेजों का संचालन नहीं हो पाया है। इस तरह के चार भवन हैं इसमें राजकीय हाई स्कूल हुसैनपुर डीलना भी शामिल है। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है। इन दोनों कॉलेज में प्रिंसिपल सहित शिक्षक और अन्य स्टाफ को मिलाकर 25-25 स्टाफ की नियुक्ति होनी है।
पीकेद्विवेदी, डीआईओएस
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डासना डिग्री कॉलेज के पुनरीक्षित बजट के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। बाकी लोनी के कॉलेजों को शिक्षा विभाग को हैंडओवर कर दिया गया है। इसको संचालित करने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की है। शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति और पद सृृजन आदि को लेकर शासन को पत्र लिखा गया है।
अमृता सिंह, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी
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विधायक सांसद के बयान
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मैं लगातार कार्य के प्रगति की जानकारी लेता रहा हूं। एक दिन पहले ही मेरी बात उप मुख्यमंत्री से हुई थी उन्होंने जानकारी दी है कि पद सृजित हो गए हैं। जल्द ही इन कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति हो जाएगी और कॉलेज संचालित हो जाएगा।
नंद किशोर गुर्जर, विधायक, लोनी
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डिग्री कॉलेज के निर्माण के लिए भारत सरकार से पूरा बजट मिल चुका था लेकिन बाद में इसकी लागत बढ़ने की वजह से पुनरीक्षित बजट की मांग की गई थी। बजट के लिए दो बार पत्र लिखा गया है। अबकी बार अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को भी पत्र लिखा गया है। जल्द ही पुनरीक्षित बजट मिल जाएगा।
वीके सिंह, सांसद व केंद्रीय मंत्री
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गाजियाबाद। बालिका शिक्षा के बारे में हर सरकार बड़े-बड़े दावे तो करती है लेकिन धरातल पर कुछ दिखाई नहीं देता। जिले में बालिका शिक्षा को लेकर विधायकों और सांसदों की उदासीनता सामने आई है। बालिका शिक्षा के लिए नए कॉलेज बनाना तो दूर, जो निर्माणाधीन हैं या जिनका निर्माण पूरा हो चुका है उसको संचालित करने के लिए भी कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। अल्पसंख्यक विभाग द्वारा जिले में लगभग 15 करोड़ की लागत से बने इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज शिक्षकों की नियुक्ति ना होने की वजह से शोपीस बने हुए हैं। जिला योजना की बैठक में शिक्षकों की नियुक्ति का मुद्दा उठा था जिसमें जल्द तैनाती का आश्वासन मिला, लेकिन इस बात को भी चार महीने बीत गए अभी तक तैनाती नहीं हुई।
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अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने एजुकेशनल हब योजना के तहत भोजपुर ब्लाक के मछेरी गांव में एक राजकीय इंटर कालेज का निर्माण कराया था जिसकी लागत लगभग चार करोड़ 51 लाख थी। इनके प्रस्ताव 2014-15 में आए थे पास होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया गया था। वर्ष 2019 में यह बनकर तैयार हुआ और शिक्षा विभाग को हैंडओवर भी कर दिया गया लेकिन अभी तक इसमें बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पाई है।
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मुस्तफाबाद बस्ती में भी एजुकेशनल हब के तहत मॉडल इंटर कॉलेज बालकों के लिए बनाया गया था। इसकी लागत तीन करोड़ दो लाख की थी। प्रस्ताव पास होने के बाद वर्ष 2015 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था। कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) ने 2019 में इस कॉलेज को शिक्षा विभाग ने हैंडओवर कर दिया गया था। पहली किश्त जारी होने के बाद बजट ना मिलने की वजह से इसका कार्य लगभग डेढ़ साल तक अटका हुआ था। 2018 में बजट मिलने के बाद इसका निर्माण पूरा होने में छह साल लगे थे और पिछले तीन साल से इस पर ताला लटका हुआ है।
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एक तरफ बालिकाओं और महिला को सशक्त बनाने के लिए मिशन शक्ति अभियान चलाया जा रहा है वहीं अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं को उच्च शिक्षा की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। लोनी के प्रेम नगर में मॉडल इंटर कॉलेज बालिकाओं के लिए बनाया है। इसका भी प्रस्ताव 2015 में पास हुआ था और निर्माण 2019 में पूरा होकर शिक्षा विभाग को हैंडओवर कर दिया गया था। इसकी लागत तीन करोड़ दो लाख थी। तीन साल बाद भी अभी इस पर ताला ही लगा हुआ है।
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रजापुर ब्लॉक स्थित राजकीय महिला डिग्री कॉलेज, डासना का भी यही हाल है। इस क्षेत्र में 20 किलोमीटर के दायरे में कोई भी डिग्री कॉलेज नहीं है। डासना में करीब सात वर्ष पहले चार करोड़ 77 लाख की लागत से डिग्री कॉलेज का निर्माण हुआ था लेकिन निर्माण लागत बढ़ने के कारण 80 फीसदी कार्य होने के बाद बजट के अभाव में धूल फांक रहा है। वर्ष 2018 से इसका कार्य बंद पड़ा हुआ है। निर्माणकारी कंपनी ने संशोधित बजट में चार करोड़ 44 लाख की मांग की है।
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पद सृजित ना होने की वजह से इन कॉलेजों का संचालन नहीं हो पाया है। इस तरह के चार भवन हैं इसमें राजकीय हाई स्कूल हुसैनपुर डीलना भी शामिल है। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है। इन दोनों कॉलेज में प्रिंसिपल सहित शिक्षक और अन्य स्टाफ को मिलाकर 25-25 स्टाफ की नियुक्ति होनी है।
पीकेद्विवेदी, डीआईओएस
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डासना डिग्री कॉलेज के पुनरीक्षित बजट के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। बाकी लोनी के कॉलेजों को शिक्षा विभाग को हैंडओवर कर दिया गया है। इसको संचालित करने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की है। शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति और पद सृृजन आदि को लेकर शासन को पत्र लिखा गया है।
अमृता सिंह, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी
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विधायक सांसद के बयान
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मैं लगातार कार्य के प्रगति की जानकारी लेता रहा हूं। एक दिन पहले ही मेरी बात उप मुख्यमंत्री से हुई थी उन्होंने जानकारी दी है कि पद सृजित हो गए हैं। जल्द ही इन कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति हो जाएगी और कॉलेज संचालित हो जाएगा।
नंद किशोर गुर्जर, विधायक, लोनी
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डिग्री कॉलेज के निर्माण के लिए भारत सरकार से पूरा बजट मिल चुका था लेकिन बाद में इसकी लागत बढ़ने की वजह से पुनरीक्षित बजट की मांग की गई थी। बजट के लिए दो बार पत्र लिखा गया है। अबकी बार अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को भी पत्र लिखा गया है। जल्द ही पुनरीक्षित बजट मिल जाएगा।
वीके सिंह, सांसद व केंद्रीय मंत्री