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बिल्ली, सियार, नील गाय के पग चिन्ह मिले, तेंदुए के नहीं ढूंढ़ पाए
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बिल्ली, सियार, नीलगाय के मिले पग चिन्ह, तेंदुए के नहीं ढूंढ पाए
गाजियाबाद। वन विभाग और आगरा से आई वाइल्ड लाइफ एसओएस की टीम को बिल्ली, सियार, नीलगाय और जंगली सुअर के पग चिन्ह मिले हैं, लेकिन वह तेंदुए के पंजे के निशान नहीं ढूंढ पाए हैं। लोगों में इतना डर है कि कोई भी जानवर उन्हें तेंदुआ दिख रहा है। मसूरी और नाहल क्षेत्र में दो युवकों ने तेंदुआ देखने की बात कही। पुलिस दोनों युवकों को लेकर वन विभाग के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंची तो जांच के बाद पता चला कि वह नीलगाय के बच्चे के पग चिन्ह हैं।
16 नवंबर की रात करीब दो बजे राजनगर सेक्टर-13 में सीसीटीवी में तेंदुआ कैद हुआ। इसके बाद शनिवार दोपहर 12:30 बजे डासना के अध्यात्मिक नगर में वनकर्मी समेत दो लोगों पर तेंदुए ने हमला कर घायल कर दिया। छह दिन में लोगों ने चार स्थानों पर तेंदुआ देखने की बात कही है। रविवार रात मसूरी नहर और नाहल गांव के पास तेंदुआ देखने की बात सामने आई। नाहल चौकी इंचार्ज ने वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। उसके बाद वाइल्ड लाइफ के टीम के साथ रातभर सर्च अभियान चलाया गया। सोमवार दिन में पता चला कि वह तेंदुए को छोड़कर अन्य जंगली पशुओं के पग चिन्ह हैं।
सील कर दिया क्षेत्र
वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने बताया कि युवकों के तेंदुआ देखने के बाद मसूरी नहर और नाहल गांव के आसपास का क्षेत्र सील कर दिया गया था। वहां पर पग चिन्हों की पहचान करने की कोशिश की गई। अगर, जानवर देखने वाले स्थानों को सील नहीं किया जाता तो पहचान नहीं हो पाती।
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पांच किलोमीटर तक नहर के आसपास चलाया सर्च अभियान
वन विभाग और वाइल्ड लाइफ के पदाधिकारियों ने बताया कि डासना, मसूरी, नाहल, अध्यात्मिक नगर, राजनगर, संजयनगर, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, एएलटी के आसपास अभियान चलाया गया। जबकि मसूरी नहर के आसपास झाड़ियों में पांच किलोमीटर तक सर्च किया गया। इस दौरान झाड़ियों में पत्थर भी फेंके गए, जिससे कोई पशु हो तो बाहर आ सके।
रेलवे ट्रैक के सहारे घूम रहा तेंदुआ
डासना, अध्यात्मिक नगर और मसूरी के रहने वाले आस मोहम्मद, भूरा, शनि, राजकुमार ने बताया कि वन विभाग के अधिकारी और अन्य टीमें तेंदुए को झाड़ियों में देख रहे हैं। जबकि तेंदुआ रेलवे ट्रैक के सहारे कहीं घूम रहा है। इसलिए उन्हें पग चिन्हों के निशान नहीं मिल पा रहे हैं। उन्हें रेलवे ट्रैक के आसपास भी अभियान चलाना चाहिए।
नहर के आसपास करेंगे सर्च
वाइल्डलाइफ एसओएस के प्रेस आफिसर श्रेष्ठ पचौरी ने बताया कि नहर के आसपास के क्षेत्र को सर्च किया जाएगा। यहां कहीं तेंदुआ हो सकता है। इसके अलावा शहर के कुछ स्थानों को भी सर्च किया जा रहा है। पग चिन्ह नहीं मिलने के कारण वह किधर गया है पता नहीं चल पा रहा है।
हर जानवर को न समझें तेंदुआ
लोगों से अपील है कि डर का माहौल न बताएं। हर जानवर को तेंदुआ न समझें। जब तक उसका सही पता नहीं चल जाता है तब तक सावधानी बरतने की जरूरत है।
अशोक गुप्ता, क्षेत्रीय वन अधिकारी
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गाजियाबाद। वन विभाग और आगरा से आई वाइल्ड लाइफ एसओएस की टीम को बिल्ली, सियार, नीलगाय और जंगली सुअर के पग चिन्ह मिले हैं, लेकिन वह तेंदुए के पंजे के निशान नहीं ढूंढ पाए हैं। लोगों में इतना डर है कि कोई भी जानवर उन्हें तेंदुआ दिख रहा है। मसूरी और नाहल क्षेत्र में दो युवकों ने तेंदुआ देखने की बात कही। पुलिस दोनों युवकों को लेकर वन विभाग के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंची तो जांच के बाद पता चला कि वह नीलगाय के बच्चे के पग चिन्ह हैं।
16 नवंबर की रात करीब दो बजे राजनगर सेक्टर-13 में सीसीटीवी में तेंदुआ कैद हुआ। इसके बाद शनिवार दोपहर 12:30 बजे डासना के अध्यात्मिक नगर में वनकर्मी समेत दो लोगों पर तेंदुए ने हमला कर घायल कर दिया। छह दिन में लोगों ने चार स्थानों पर तेंदुआ देखने की बात कही है। रविवार रात मसूरी नहर और नाहल गांव के पास तेंदुआ देखने की बात सामने आई। नाहल चौकी इंचार्ज ने वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। उसके बाद वाइल्ड लाइफ के टीम के साथ रातभर सर्च अभियान चलाया गया। सोमवार दिन में पता चला कि वह तेंदुए को छोड़कर अन्य जंगली पशुओं के पग चिन्ह हैं।
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सील कर दिया क्षेत्र
वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने बताया कि युवकों के तेंदुआ देखने के बाद मसूरी नहर और नाहल गांव के आसपास का क्षेत्र सील कर दिया गया था। वहां पर पग चिन्हों की पहचान करने की कोशिश की गई। अगर, जानवर देखने वाले स्थानों को सील नहीं किया जाता तो पहचान नहीं हो पाती।
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पांच किलोमीटर तक नहर के आसपास चलाया सर्च अभियान
वन विभाग और वाइल्ड लाइफ के पदाधिकारियों ने बताया कि डासना, मसूरी, नाहल, अध्यात्मिक नगर, राजनगर, संजयनगर, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, एएलटी के आसपास अभियान चलाया गया। जबकि मसूरी नहर के आसपास झाड़ियों में पांच किलोमीटर तक सर्च किया गया। इस दौरान झाड़ियों में पत्थर भी फेंके गए, जिससे कोई पशु हो तो बाहर आ सके।
रेलवे ट्रैक के सहारे घूम रहा तेंदुआ
डासना, अध्यात्मिक नगर और मसूरी के रहने वाले आस मोहम्मद, भूरा, शनि, राजकुमार ने बताया कि वन विभाग के अधिकारी और अन्य टीमें तेंदुए को झाड़ियों में देख रहे हैं। जबकि तेंदुआ रेलवे ट्रैक के सहारे कहीं घूम रहा है। इसलिए उन्हें पग चिन्हों के निशान नहीं मिल पा रहे हैं। उन्हें रेलवे ट्रैक के आसपास भी अभियान चलाना चाहिए।
नहर के आसपास करेंगे सर्च
वाइल्डलाइफ एसओएस के प्रेस आफिसर श्रेष्ठ पचौरी ने बताया कि नहर के आसपास के क्षेत्र को सर्च किया जाएगा। यहां कहीं तेंदुआ हो सकता है। इसके अलावा शहर के कुछ स्थानों को भी सर्च किया जा रहा है। पग चिन्ह नहीं मिलने के कारण वह किधर गया है पता नहीं चल पा रहा है।
हर जानवर को न समझें तेंदुआ
लोगों से अपील है कि डर का माहौल न बताएं। हर जानवर को तेंदुआ न समझें। जब तक उसका सही पता नहीं चल जाता है तब तक सावधानी बरतने की जरूरत है।
अशोक गुप्ता, क्षेत्रीय वन अधिकारी