फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   ghaziyabad

सर्दी और प्रदूषण से बच्चों में भी बढ़े डिप्रेशन के मामले

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 22 Nov 2021 12:54 AM IST
विज्ञापन
ghaziyabad
सर्दी और प्रदूषण से 20 प्रतिशत बढ़े अवसाद के मामले
विज्ञापन

गाजियाबाद। ठंड के मौसम में तापमान में गिरावट आने और प्रदूषण के कारण डिप्रेशन के 20 फीसदी मामले बढ़ गए हैं। इस मौसम में हार्मोन असंतुलन के कारण परेशानी बढ़ जाती है। खानपान में सावधानी और नियमित योग करके स्वस्थ रह सकते हैं। सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ रहा है। बच्चों में चिड़चिड़ापन, झगड़ा करना, रोना, बात-बात पर चिल्लाने की शिकायत बढ़ रही है। बड़ी उम्र के लोगों में उदासी और हताशा सामन आ रही है।
मनोचिकित्सक डॉ. हेमिका अग्रवाल का कहना है कि सर्दी में सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर भी हो जाता है। इस बार विशेष प्रदूषण के कारण परेशानी और बढ़ गई है। डॉ. हेमिका ने बताया कि पांच से दस फीसदी पोस्ट मेनोपॉज वाली महिलाओं में सर्दी के मौसम में चिड़चिड़ापन और तनाव के कारण डिप्रेशन बढ़ जाता है। इस बार बच्चों में डिप्रेशन के भी मामले सामने आ रहे हैं। पहले 50 वर्ष से अधिक उम्र वालों को परेशानी होती थी।
विज्ञापन

सिरोटोनिन का स्तर हो जाता है कम
मनोचिकित्सक डॉ. एके विश्वकर्मा का कहना है कि धूप की कमी से दिमाग में सिरोटोनिन रसायन का स्तर कम हो जाता है। इससे दिमाग में बदलाव होता है। सर्दियों में दिन छोटे होते हैं। जिससे हार्मोन में असंतुलन पैदा होता है और शरीर में विटामिन डी की कमी आती है। इससे दिल और दिमाग पर प्रभाव पड़ता है। सर्दी के मौसम में खासकर उम्र दराज लोगों को अवसाद घेर लेता है। जिससे तनाव व हाईपरटेंशन काफी बढ़ जाता है। सर्दियों में अवसाद से पीड़ित लोग अक्सर ज्यादा चीनी, सोडियम व ज्यादा कैलोरी वाला भोजन खाने लगते हैं। ऐसे में मधुमेह व हाईपरटेंशन से पीड़ित लोगों की समस्या बढ़ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

धूप में बैठें
मनोचिकित्सक डॉ. साकेत तिवारी का कहना है कि सर्दियों में धूप कम होने से यह दिक्कत बढ़ रही है। शरीर की जैविक घड़ी (बॉडी क्लॉक) धूप कम मिलने से प्रभावित होती है और इससे व्यक्ति को डिप्रेशन महसूस होता है। सेरोटोनिन एक शक्तिशाली न्यूरो ट्रांसमीटर है जो शरीर के महत्वपूर्ण कार्यों के लिए जरूरी होता है, यह मूड को नियंत्रित करने और अन्य शारीरिक प्रक्रियाओं के साथ नींद के पैटर्न भूख और पाचन को भी प्रभावित करता है, इसकी कमी से थकान और वजन बढ़ने के लक्षणों के साथ डिप्रेशन हो सकता है
सावधानी ही बचाव
अवसाद हाइपोथर्मिया व ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव समेत अन्य बीमारियां रोकी जा सकती हैं। इसके लिए जीवन शैली की कुछ आदतों में थोड़ा सा बदलाव एवं सावधानी बेहद जरूरी है। गर्मियों की अपेक्षा सर्दियों में ब्लड प्रेशर की समस्या ज्यादा होती है। सर्दियों में अवसाद से बचने के लिए रोजाना लंबे समय तक धूप में बैठकर शरीर की सिकाई करें।

इस तरह कर सकते हैं बचाव
डिसऑर्डर से छुटकारा पाने के लिए मुख्य उपचार लाइट थेरेपी है, सर्दियों में प्राकृतिक रोशनी की कमी की वजह से यह डिसऑर्डर हो सकता है, इसलिए शरीर को पर्याप्त धूप में रखना जरूरी है, इससे विटामिन डी की कमी भी पूरी होती है।
- धूप से शरीर में सेरोटोनिन का स्तर भी बढ़ता है जो कि मूड को नियंत्रित करने वाला एक रसायन है।
- धूप की कमी के कारण होने वाले इस डिसऑर्डर को दूर करने के लिए कृत्रिम रोशनी के साथ लाइट थेरेपी दी जाती है।
- सुबह के समय लाइट बॉक्स के सामने बैठने से लक्षणों से आराम मिलता है।
-----------
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed