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सालभर किसने दी शरण, कहां छिपे...रिमांड पर पूछेगी पुलिस
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सालभर किसने दी शरण, कहां छिपे...रिमांड पर पूछेगी पुलिस
गाजियाबाद। मामा नरेश त्यागी की हत्या में समर्पण करने वाले विधायक के भाई गिरीश पाल त्यागी को पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। गिरीश के जेल जाने के बाद सिहानी गेट पुलिस उसे रिमांड लेने ले लिए कोई आधार न होने की बात कह रही थी, लेकिन पीड़ित परिवार ने मजबूत आधार बताया तो पुलिस भी उससे इंकार नहीं कर सकी। 13 महीने फरार रहने के दौरान उसे किस-किसने शरण दी, इसका पता लगाने के लिए गिरीश को रिमांड पर लिया जाएगा।
9 अक्तूबर 2020 को लोहिया नहर में मॉर्निंग वॉक के दौरान भाजपा विधायक अजीत पाल त्यागी के मामा नरेश त्यागी की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई थी। 20 नवंबर 2020 में पुलिस ने खुलासा किया कि विधायक के भाई गिरीश पाल त्यागी ने ही भाड़े के शूटर्स से मामा की हत्या कराई थी। जितेंद्र त्यागी ने शूटर मुहैया कराए थे। पुलिस ने सद्दीक नगर निवासी जितेंद्र त्यागी और मनोज कुमार के अलावा डिफेंस कॉलोनी मोदीनगर निवासी अर्पण चौधरी तथा सौंदा रोड मोदीनगर निवासी विपिन शर्मा को गिरफ्तार किया था। जबकि लोहियानगर निवासी गिरीश पाल त्यागी घटना के बाद से ही फरार चल रहा था। मृतक के परिजनों द्वारा मोर्चा खोलने पर गिरीश पाल त्यागी दो महीने की मोहलत मांगने के लिए हाईकोर्ट पहुंचा था, लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली थी। हाईकोर्ट ने उसे निचली अदालत में जाने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद गिरीश पाल त्यागी ने 8 नवंबर को 200 वकीलों के घेरे में सीजेएम कोर्ट में सरेंडर किया था। कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजा था।
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पीड़ित परिवार की मांग और पुलिस की दलील
पीसीआर : नरेश त्यागी के परिजनों ने सिहानी गेट पुलिस से गिरीश को पुलिस कस्टडी रिमांड (पीसीआर) पर लेने की मांग की थी। इस पर पुलिस ने दलील दी थी कि पुलिस हत्या में प्रयुक्त असलहा पहले ही बरामद कर चुकी है। साथ ही जेल जाकर गिरीश त्यागी के बयान भी दर्ज कर लिए हैं। लिहाजा पीसीआर लेने का कोई आधार नहीं बचा।
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गुंडा एक्ट : पीड़ित परिवार ने गिरीश पाल त्यागी पर गुंडा एक्ट लगाने का हवाला दिया। जिस पर पुलिस ने कहा कि गुंडा एक्ट जेल से बाहर लोगों पर लगाया जाता है। जबकि गिरीश जेल में बंद है।
हिस्ट्री शीट : नरेश त्यागी के बेटे अभिषेक त्यागी ने गिरीश त्यागी की हिस्ट्री शीट खोलने की मांग की। इस पर पुलिस ने कहा कि किसी की हिस्ट्री शीट उसकी निगरानी के लिए खोली जाती है। गिरीश त्यागी न्यायिक हिरासत में है।
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परिजनों ने पुलिस को दिखाई राह
पीसीआर पर लेने के लिए कोई आधार न होेने की बात कहने पर नरेश त्यागी के परिजनों ने पुलिस को राह दिखाई। नरेश त्यागी के बेटे अभिषेक त्यागी का कहना है कि गिरीश पाल त्यागी करीब 13 महीने फरार रहा। वह इस दौरान कहां-कहां छिपा और किस-किसने उसे संरक्षण दिया। यह जानना जरूरी है। क्योंकि, अपराधी को संरक्षण देने वाला भी अपराधी होता है। शरण देने वालों के नाम जानने के लिए गिरीश को रिमांड पर लिया जाना जरूरी है।
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विधिक राय ले रही पुलिस
गिरीश त्यागी को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने से पहले पुलिस विधिक राय ले रही है। इसके बाद पीसीआर की फाइल को अंतिम रूप देकर कोर्ट में अर्जी लगाई जाएगी। केस के विवेचक देवपाल पुंडीर ने बताया कि पीड़ित पक्ष द्वारा गिरीश पाल त्यागी को पीसीआर पर लेने की मांग की जा रही है। मजबूत आधार तैयार होने पर अर्जी कोर्ट में लगा दी जाएगी।
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सालभर किसने दी शरण, कहां छिपे...रिमांड पर पूछेगी पुलिस
गाजियाबाद। मामा नरेश त्यागी की हत्या में समर्पण करने वाले विधायक के भाई गिरीश पाल त्यागी को पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। गिरीश के जेल जाने के बाद सिहानी गेट पुलिस उसे रिमांड लेने ले लिए कोई आधार न होने की बात कह रही थी, लेकिन पीड़ित परिवार ने मजबूत आधार बताया तो पुलिस भी उससे इंकार नहीं कर सकी। 13 महीने फरार रहने के दौरान उसे किस-किसने शरण दी, इसका पता लगाने के लिए गिरीश को रिमांड पर लिया जाएगा।
9 अक्तूबर 2020 को लोहिया नहर में मॉर्निंग वॉक के दौरान भाजपा विधायक अजीत पाल त्यागी के मामा नरेश त्यागी की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई थी। 20 नवंबर 2020 में पुलिस ने खुलासा किया कि विधायक के भाई गिरीश पाल त्यागी ने ही भाड़े के शूटर्स से मामा की हत्या कराई थी। जितेंद्र त्यागी ने शूटर मुहैया कराए थे। पुलिस ने सद्दीक नगर निवासी जितेंद्र त्यागी और मनोज कुमार के अलावा डिफेंस कॉलोनी मोदीनगर निवासी अर्पण चौधरी तथा सौंदा रोड मोदीनगर निवासी विपिन शर्मा को गिरफ्तार किया था। जबकि लोहियानगर निवासी गिरीश पाल त्यागी घटना के बाद से ही फरार चल रहा था। मृतक के परिजनों द्वारा मोर्चा खोलने पर गिरीश पाल त्यागी दो महीने की मोहलत मांगने के लिए हाईकोर्ट पहुंचा था, लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली थी। हाईकोर्ट ने उसे निचली अदालत में जाने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद गिरीश पाल त्यागी ने 8 नवंबर को 200 वकीलों के घेरे में सीजेएम कोर्ट में सरेंडर किया था। कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजा था।
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पीड़ित परिवार की मांग और पुलिस की दलील
पीसीआर : नरेश त्यागी के परिजनों ने सिहानी गेट पुलिस से गिरीश को पुलिस कस्टडी रिमांड (पीसीआर) पर लेने की मांग की थी। इस पर पुलिस ने दलील दी थी कि पुलिस हत्या में प्रयुक्त असलहा पहले ही बरामद कर चुकी है। साथ ही जेल जाकर गिरीश त्यागी के बयान भी दर्ज कर लिए हैं। लिहाजा पीसीआर लेने का कोई आधार नहीं बचा।
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गुंडा एक्ट : पीड़ित परिवार ने गिरीश पाल त्यागी पर गुंडा एक्ट लगाने का हवाला दिया। जिस पर पुलिस ने कहा कि गुंडा एक्ट जेल से बाहर लोगों पर लगाया जाता है। जबकि गिरीश जेल में बंद है।
हिस्ट्री शीट : नरेश त्यागी के बेटे अभिषेक त्यागी ने गिरीश त्यागी की हिस्ट्री शीट खोलने की मांग की। इस पर पुलिस ने कहा कि किसी की हिस्ट्री शीट उसकी निगरानी के लिए खोली जाती है। गिरीश त्यागी न्यायिक हिरासत में है।
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परिजनों ने पुलिस को दिखाई राह
पीसीआर पर लेने के लिए कोई आधार न होेने की बात कहने पर नरेश त्यागी के परिजनों ने पुलिस को राह दिखाई। नरेश त्यागी के बेटे अभिषेक त्यागी का कहना है कि गिरीश पाल त्यागी करीब 13 महीने फरार रहा। वह इस दौरान कहां-कहां छिपा और किस-किसने उसे संरक्षण दिया। यह जानना जरूरी है। क्योंकि, अपराधी को संरक्षण देने वाला भी अपराधी होता है। शरण देने वालों के नाम जानने के लिए गिरीश को रिमांड पर लिया जाना जरूरी है।
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विधिक राय ले रही पुलिस
गिरीश त्यागी को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने से पहले पुलिस विधिक राय ले रही है। इसके बाद पीसीआर की फाइल को अंतिम रूप देकर कोर्ट में अर्जी लगाई जाएगी। केस के विवेचक देवपाल पुंडीर ने बताया कि पीड़ित पक्ष द्वारा गिरीश पाल त्यागी को पीसीआर पर लेने की मांग की जा रही है। मजबूत आधार तैयार होने पर अर्जी कोर्ट में लगा दी जाएगी।