{"_id":"618acb91d558c81f0b210c90","slug":"ghaziyabad-ghaziabad-news-gbd2290433151","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना रजिस्टर्ड एग्रीमेंट किराए पर दी सपंत्ति तो फंस सकते हैं स्टांप चोरी में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना रजिस्टर्ड एग्रीमेंट किराए पर दी सपंत्ति तो फंस सकते हैं स्टांप चोरी में
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिना रजिस्टर्ड एग्रीमेंट किराए पर दी संपत्ति तो हो सकता है स्टांप शुल्क चोरी का केस
- किराएदारी के नए नियमों को लागू कराने के लिए स्टांप विभाग ने जिले में शुरू किया सर्वे
- एआईजी स्टांप ने सभी सब-रजिस्ट्रार से मांगी रिपोर्ट
- बिना स्टांप शुल्क चुकाए संपत्ति किराए पर देने वालों को जारी होंगे नोटिस
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। अब आवासीय या व्यावसायिक संपत्ति किराए पर दी तो रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराना जरूरी होगा। बिना स्टांप शुल्क चुकाए संपत्ति किराए पर दी तो स्टांप चोरी का केस दर्ज होगा। स्टांप विभाग ने जिले के सभी जोन में सर्वे शुरू करा दिया है। सर्वे के दौरान सबसे पहले ऐसे लोगों की लिस्ट तैयार की जाएगी, जिन्होंने बिना एग्रीमेंट के दुकान, इंडस्ट्री, फार्म हाउस, बैंक्वेट हॉल आदि व्यावसायिक संपत्तियां किराए पर दी होगी। केस दर्ज होने से पहले ऐसे भवन मालिकों को नोटिस जारी किए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश किराएदारी कानून के प्रावधानों को गाजियाबाद में लागू करने के लिए प्रशासन और स्टांप विभाग ने सर्वे की यह कवायद शुरू की है। नए किराएदारी कानून के मुताबिक किसी भी संपत्ति को किराए पर देने के लिए रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराना अनिवार्य होगा। किराए से होने वाली आमदनी की चार फीसदी रकम एग्रीमेंट के दौरान स्टांप शुल्क के रूप में देनी होगी। पहले से किराए पर दी गई संपत्तियों का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराने के लिए दो माह की मोहलत दी जाएगी। बीते दिनों स्टांप विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी जिलों के अधिकारियों की बैठक लेकर इसे लागू कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद डीएम आरके सिंह ने स्टांप विभाग के सहायक आयुक्त को पत्र भेजकर इसे लागू कराने के निर्देश दिए हैं। उनके निर्देश पर एआईजी स्टांप ने सभी जोन के उप निबंधकों को सर्वे कराकर किराए पर उठाए गए भवनों की सूची तैयार कराने के निर्देश दिए हैं।
-----
दो लाख से ज्यादा संपत्तियां आएंगी दायरे में
गाजियाबाद जिले के नगरीय क्षेत्रों में करीब दो लाख से ज्यादा संपत्तियां ऐसी हैं जो किराए पर चल रही हैं। इनमें आवासीय फ्लैट और भवनों से लेकर दुकानें, मॉल्स के स्टोर, शॉपिंग कांप्लेक्स, बैंक्वेट हॉल, फार्म हाउस, गोदाम, उद्योग और सरकारी संपत्तियां हैं। किराएदारी का नया कानून लागू होने से अब इन संपत्तियों का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराना होगा।
विज्ञापन
----
स्टांप विभाग की आमदनी बढ़ेगी
इन नए नियमों को लागू कर किराएदारी का अनुबंध अनिवार्य किए जाने से स्टांप विभाग की आमदनी बढ़ेगी। पहले भी किराएदारी के नियम लागू हैं, लेकिन महज 8 से 10 फीसदी लोग ही एग्रीमेंट कराते हैं। बाकी 90 फीसदी आपसी सहमति से संपत्ति किराए पर दे देते हैं। इससे स्टांप विभाग को राजस्व का नुकसान हो रहा है। यूपी में किराएदारी अधिनियम पहले से भी लागू था, लेकिन प्रदेश सरकार ने इसमें संशोधन कर 2021 में नए प्रावधान शामिल किए हैं। किराएदारी के झगड़ों को निबटाने के लिए ट्रिब्युनल भी गठित होंगे।
---
किराएदारी के लिए प्रचलित तरीके
1. आपसी सहमति पर संपत्ति किराए पर दी जा रही है।
2. महज 10 रुपये के स्टांप पर नोटरी के आधार पर किराएदारी।
3. 100 रुपये के स्टांप पर 11 माह का एग्रीमेंट कराकर किराए पर दे रहे संपत्ति।
4. अधिकांश बड़ी फर्म रजिस्टर्ड विधिवत एग्रीमेंट कराती हैं।
---
सही तरीका
संपत्ति किराए पर देने के दौरान 11 माह या आपसी समिति से तय अवधि के लिए एग्रीमेंट कराया जाता है। निर्धारित अवधि में किराए से होने वाली आमदनी की 4 फीसदी रकम स्टांप शुल्क के रूप में चुकानी होगी। इसके बाद आपसी विवाद होने पर यह अनुबंध फैसले में अहम होगा।
----
व्यापारी बोले
दिल्ली में किराएदारी पर एक फीसदी स्टांप शुल्क लिया जाता है। जब प्रधानमंत्री एक देश एक टैक्स प्रणाली की बात करते हैं तो हर प्रदेश में अलग-अलग नियम नियम क्यों लागू किए जा रहे हैं। चार फीसदी स्टांप शुल्क का बोझ डालकर लोगों को परेशान किया जाएगा। - तिलकराज अरोड़ा, प्रदेश महामंत्री प.उप्र संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल
लोगों पर पहले ही तरह-तरह के आर्थिक बोझ लाद दिए गए हैं, अब किराएदारी पर स्टांप शुल्क अनिवार्य कर एक ओर बोझ डालना गलत है। एग्रीमेंट अनिवार्य किया जाना तो सही है, लेकिन स्टांप शुल्क 4 फीसदी से घाटकर एक फीसदी किया जाना चाहिए। इससे स्टांप की चोरी रुकेगी और सरकार का राजस्व बढ़ेगा। - गोपीचंद, अध्यक्ष महानगर उद्योग व्यापार मंडल
------
अधिकारी बोले
रजिस्टर्ड एग्रीमेंट अनिवार्य
किराएदारी का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराना अनिवार्य है। सभी सब-रजिस्ट्रार को उनके क्षेत्र में सर्वे कराकर ऐसी संपत्तियों की रिपोर्ट मांगी गई है जो किराए पर हैं, लेकिन अनुबंध नहीं कराया गया है। बिना रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के संपत्ति किराए पर देने वाले लोगों को नोटिस जारी कर एग्रीमेंट कराने की मोहलत दी जाएगी। - केके मिश्रा, एआईजी स्टांप
विज्ञापन
- किराएदारी के नए नियमों को लागू कराने के लिए स्टांप विभाग ने जिले में शुरू किया सर्वे
- एआईजी स्टांप ने सभी सब-रजिस्ट्रार से मांगी रिपोर्ट
- बिना स्टांप शुल्क चुकाए संपत्ति किराए पर देने वालों को जारी होंगे नोटिस
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। अब आवासीय या व्यावसायिक संपत्ति किराए पर दी तो रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराना जरूरी होगा। बिना स्टांप शुल्क चुकाए संपत्ति किराए पर दी तो स्टांप चोरी का केस दर्ज होगा। स्टांप विभाग ने जिले के सभी जोन में सर्वे शुरू करा दिया है। सर्वे के दौरान सबसे पहले ऐसे लोगों की लिस्ट तैयार की जाएगी, जिन्होंने बिना एग्रीमेंट के दुकान, इंडस्ट्री, फार्म हाउस, बैंक्वेट हॉल आदि व्यावसायिक संपत्तियां किराए पर दी होगी। केस दर्ज होने से पहले ऐसे भवन मालिकों को नोटिस जारी किए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश किराएदारी कानून के प्रावधानों को गाजियाबाद में लागू करने के लिए प्रशासन और स्टांप विभाग ने सर्वे की यह कवायद शुरू की है। नए किराएदारी कानून के मुताबिक किसी भी संपत्ति को किराए पर देने के लिए रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराना अनिवार्य होगा। किराए से होने वाली आमदनी की चार फीसदी रकम एग्रीमेंट के दौरान स्टांप शुल्क के रूप में देनी होगी। पहले से किराए पर दी गई संपत्तियों का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराने के लिए दो माह की मोहलत दी जाएगी। बीते दिनों स्टांप विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी जिलों के अधिकारियों की बैठक लेकर इसे लागू कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद डीएम आरके सिंह ने स्टांप विभाग के सहायक आयुक्त को पत्र भेजकर इसे लागू कराने के निर्देश दिए हैं। उनके निर्देश पर एआईजी स्टांप ने सभी जोन के उप निबंधकों को सर्वे कराकर किराए पर उठाए गए भवनों की सूची तैयार कराने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
-----
दो लाख से ज्यादा संपत्तियां आएंगी दायरे में
गाजियाबाद जिले के नगरीय क्षेत्रों में करीब दो लाख से ज्यादा संपत्तियां ऐसी हैं जो किराए पर चल रही हैं। इनमें आवासीय फ्लैट और भवनों से लेकर दुकानें, मॉल्स के स्टोर, शॉपिंग कांप्लेक्स, बैंक्वेट हॉल, फार्म हाउस, गोदाम, उद्योग और सरकारी संपत्तियां हैं। किराएदारी का नया कानून लागू होने से अब इन संपत्तियों का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराना होगा।
विज्ञापन
----
स्टांप विभाग की आमदनी बढ़ेगी
इन नए नियमों को लागू कर किराएदारी का अनुबंध अनिवार्य किए जाने से स्टांप विभाग की आमदनी बढ़ेगी। पहले भी किराएदारी के नियम लागू हैं, लेकिन महज 8 से 10 फीसदी लोग ही एग्रीमेंट कराते हैं। बाकी 90 फीसदी आपसी सहमति से संपत्ति किराए पर दे देते हैं। इससे स्टांप विभाग को राजस्व का नुकसान हो रहा है। यूपी में किराएदारी अधिनियम पहले से भी लागू था, लेकिन प्रदेश सरकार ने इसमें संशोधन कर 2021 में नए प्रावधान शामिल किए हैं। किराएदारी के झगड़ों को निबटाने के लिए ट्रिब्युनल भी गठित होंगे।
---
किराएदारी के लिए प्रचलित तरीके
1. आपसी सहमति पर संपत्ति किराए पर दी जा रही है।
2. महज 10 रुपये के स्टांप पर नोटरी के आधार पर किराएदारी।
3. 100 रुपये के स्टांप पर 11 माह का एग्रीमेंट कराकर किराए पर दे रहे संपत्ति।
4. अधिकांश बड़ी फर्म रजिस्टर्ड विधिवत एग्रीमेंट कराती हैं।
---
सही तरीका
संपत्ति किराए पर देने के दौरान 11 माह या आपसी समिति से तय अवधि के लिए एग्रीमेंट कराया जाता है। निर्धारित अवधि में किराए से होने वाली आमदनी की 4 फीसदी रकम स्टांप शुल्क के रूप में चुकानी होगी। इसके बाद आपसी विवाद होने पर यह अनुबंध फैसले में अहम होगा।
----
व्यापारी बोले
दिल्ली में किराएदारी पर एक फीसदी स्टांप शुल्क लिया जाता है। जब प्रधानमंत्री एक देश एक टैक्स प्रणाली की बात करते हैं तो हर प्रदेश में अलग-अलग नियम नियम क्यों लागू किए जा रहे हैं। चार फीसदी स्टांप शुल्क का बोझ डालकर लोगों को परेशान किया जाएगा। - तिलकराज अरोड़ा, प्रदेश महामंत्री प.उप्र संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल
लोगों पर पहले ही तरह-तरह के आर्थिक बोझ लाद दिए गए हैं, अब किराएदारी पर स्टांप शुल्क अनिवार्य कर एक ओर बोझ डालना गलत है। एग्रीमेंट अनिवार्य किया जाना तो सही है, लेकिन स्टांप शुल्क 4 फीसदी से घाटकर एक फीसदी किया जाना चाहिए। इससे स्टांप की चोरी रुकेगी और सरकार का राजस्व बढ़ेगा। - गोपीचंद, अध्यक्ष महानगर उद्योग व्यापार मंडल
------
अधिकारी बोले
रजिस्टर्ड एग्रीमेंट अनिवार्य
किराएदारी का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराना अनिवार्य है। सभी सब-रजिस्ट्रार को उनके क्षेत्र में सर्वे कराकर ऐसी संपत्तियों की रिपोर्ट मांगी गई है जो किराए पर हैं, लेकिन अनुबंध नहीं कराया गया है। बिना रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के संपत्ति किराए पर देने वाले लोगों को नोटिस जारी कर एग्रीमेंट कराने की मोहलत दी जाएगी। - केके मिश्रा, एआईजी स्टांप