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बच्चों में डेंगू, वायरल, डायररि और निमोनिया का संक्रमण
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डेंगू, वायरल, डायरिया और निमोनिया की चपेट में आ रहे बच्चे
गाजियाबाद। बरसात और नमी के कारण बच्चे डेंगू, डायरिया, निमोनिया और वायरल की चपेट में आ रहे हैं। जिला एमएमजी अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 250 से तीन सौ बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें से 40 से 50 बच्चे निमोनिया, 120 से 140 बच्चे वायरल, चार से पांच डेंगू और 25 से 30 बच्चे डायरिया से पीड़ित हैं। प्राइवेट अस्पतालों में भी मरीज पहुंच रहे हैं।
बच्चों में हल्का निमोनिया
एमएमजी अस्पताल की वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी तिवारी का कहना है कि माइकोप्लाज्मा निमोनी और क्लैमिडोफिला निमोनी जैसे बैक्टीरिया की वजह से निमोनिया होने पर आमतौर पर बच्चों में बीमारी के हल्के लक्षण दिखते हैं। इसे वॉकिंग निमोनिया भी कहा जाता है। डॉ. तिवारी ने बताया कि निमोनिया पैदा करने वाला वायरस ज्यादातर चार से पांच साल की उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। गले में खराश, खांसी, हल्का बुखार, नाक में कफ जमना, दस्त, भूख कम लगना और थकान या एनर्जी कम महसूस होना इसके लक्षणों में शामिल हैं।
निमोनिया के गंभीर लक्षण
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र आनंद का कहना है कि बच्चों में बैक्टीरियल निमोनिया बहुत आम बात है। अक्सर इस प्रकार का निमोनिया जुकाम या वायरस से कई ज्यादा होता है और इसके लक्षणों को भी समझना मुश्किल होता है। इसके लक्षण हैं तेज बुखार, पसीना आना या ठंड लगना, नाखूनों या होठों का नीला पड़ना, सीने में घरघराहट महसूस होना और सांस लेने में दिक्कत महसूस होना।
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डायरिया और वायरल से भी ग्रसित
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव सिरोही का कहना है कि वातावरण में नमी होने से खाने-पीने की चीजों में फंगल इंफेक्शन हो जाता है जो सामान्य तौर पर पता नहीं चलता और बच्चे उसे खाते ही डायरिया की चपेट में आ जाते हैं। घर के अंदर की नमी और गंदगी वायरल का कारण बनती है। इसलिए बरसात में घर के अंदर की भी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। डॉ. सिरोही ने बताया कि बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए वह संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं।
25 बच्चे हो चुके हैं डेंगू संक्रमित
इस बार दो वर्ष से 8 साल तक के 25 बच्चे डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। डॉ. शालिनी तिवारी का कहना है कि अधिकांश बच्चे कपड़े पहनने में दिक्कत करते हैं। वह खेलने के बाद पसीना होने पर कपड़े निकाल देते हैं। इससे मच्छर काट लेते हैं। वह डेंगू, मलेरिया बुखार की चपेट में आ जाते हैं।
बृहस्पतिवार को एमएमजी अस्पताल में इलाज के लिए आए बच्चे
ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे - 265
डायरिया से संक्रमित - 28
निमोनिया से संक्रमित - 47
वायरल - 127
डेंगू अब तक - 25
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गाजियाबाद। बरसात और नमी के कारण बच्चे डेंगू, डायरिया, निमोनिया और वायरल की चपेट में आ रहे हैं। जिला एमएमजी अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 250 से तीन सौ बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें से 40 से 50 बच्चे निमोनिया, 120 से 140 बच्चे वायरल, चार से पांच डेंगू और 25 से 30 बच्चे डायरिया से पीड़ित हैं। प्राइवेट अस्पतालों में भी मरीज पहुंच रहे हैं।
बच्चों में हल्का निमोनिया
एमएमजी अस्पताल की वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी तिवारी का कहना है कि माइकोप्लाज्मा निमोनी और क्लैमिडोफिला निमोनी जैसे बैक्टीरिया की वजह से निमोनिया होने पर आमतौर पर बच्चों में बीमारी के हल्के लक्षण दिखते हैं। इसे वॉकिंग निमोनिया भी कहा जाता है। डॉ. तिवारी ने बताया कि निमोनिया पैदा करने वाला वायरस ज्यादातर चार से पांच साल की उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। गले में खराश, खांसी, हल्का बुखार, नाक में कफ जमना, दस्त, भूख कम लगना और थकान या एनर्जी कम महसूस होना इसके लक्षणों में शामिल हैं।
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निमोनिया के गंभीर लक्षण
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र आनंद का कहना है कि बच्चों में बैक्टीरियल निमोनिया बहुत आम बात है। अक्सर इस प्रकार का निमोनिया जुकाम या वायरस से कई ज्यादा होता है और इसके लक्षणों को भी समझना मुश्किल होता है। इसके लक्षण हैं तेज बुखार, पसीना आना या ठंड लगना, नाखूनों या होठों का नीला पड़ना, सीने में घरघराहट महसूस होना और सांस लेने में दिक्कत महसूस होना।
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डायरिया और वायरल से भी ग्रसित
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव सिरोही का कहना है कि वातावरण में नमी होने से खाने-पीने की चीजों में फंगल इंफेक्शन हो जाता है जो सामान्य तौर पर पता नहीं चलता और बच्चे उसे खाते ही डायरिया की चपेट में आ जाते हैं। घर के अंदर की नमी और गंदगी वायरल का कारण बनती है। इसलिए बरसात में घर के अंदर की भी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। डॉ. सिरोही ने बताया कि बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए वह संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं।
25 बच्चे हो चुके हैं डेंगू संक्रमित
इस बार दो वर्ष से 8 साल तक के 25 बच्चे डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। डॉ. शालिनी तिवारी का कहना है कि अधिकांश बच्चे कपड़े पहनने में दिक्कत करते हैं। वह खेलने के बाद पसीना होने पर कपड़े निकाल देते हैं। इससे मच्छर काट लेते हैं। वह डेंगू, मलेरिया बुखार की चपेट में आ जाते हैं।
बृहस्पतिवार को एमएमजी अस्पताल में इलाज के लिए आए बच्चे
ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे - 265
डायरिया से संक्रमित - 28
निमोनिया से संक्रमित - 47
वायरल - 127
डेंगू अब तक - 25