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डेंगू के दो मरीज मिले, अब तक नौ मामले
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डेंगू के दो मरीज मिले, अब तक नौ मामले
गाजियाबाद। डेंगू के केस बढ़ने लगे हैं। शुक्रवार को दो नए केस सामने आए। शांति नगर और आर्य नगर मेरठ रोड निवासी दो लोगों को डेंगू होने की पुष्टि हुई है। इनका घर पर ही इलाज चल रहा है। अब तक जिले में 62 संदिग्ध मरीजों की जांच में डेंगू के नौ मरीजों की पुष्टि हुई है। चार मरीज दूसरे जिलों के हैं। इनमें गौतमबुद्धनगर, फिरोजाबाबाद, मथुरा और मेरठ शामिल है। स्वास्थ्य विभाग का एक फार्मासिस्ट भी डेंगू की चपेट में आया है। जिला मलेरिया अधिकारी ज्ञानेंद्र मिश्रा का कहना है कि निगरानी की जा रही है।
जिले में पांच साल में सबसे अधिक डेंगू के 621 मामले 2016 में सामने आए थे। तब मलेरिया के 128 केस मिले थे। 2017 में डेंगू के 232 व 293 मलेरिया के मरीज मिले। 2018 में डेंगू के 68 व मलेरिया के 150 मरीज सामने आए। 2019 में डेंगू के मामले एक बार फिर बढ़कर 88 तक पहुंच गए और मलेरिया के 142 रहे। वहीं 2020 में कोरोना काल में डेंगू के 15 व मलेरिया के 13 मरीजों की पुष्टि हुई थी।
रोज हो रहीं 10 से 12 जांच
आईडीएसपी लैब प्रभारी डॉ. सुरुचि सैनी के अनुसार जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में लिए जाने वाले मलेरिया और डेंगू के सैंपल जांच के लिए लैब में भेजे जाते हैं। लैब में डेंगू की एलाइजा के जरिए जांच की जाती है। इस साल में अब तक उनके पास डेंगू के 62 और मलेरिया के 100 से ज्यादा सैंपल जांच के लिए आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 10 से 12 मरीजों की प्रतिदिन जांच की जा रही है।
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प्राइवेट अस्पतालों को सूचित करने के निर्देश
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार ने संक्रामक रोग विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ बैठक करने के निर्देश दिए हैं। सीएमओ ने निर्देश दिया कि जलभराव वाले स्थानों व बीते 5 साल में सबसे अधिक मिलने वाले स्थानों पर सर्विलांस, जांच व उपचार की कार्रवाई की जाए। संक्रामक रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि जिले के सभी प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों को मलेरिया और डेंगू का कोई भी केस आने पर स्वास्थ्य विभाग को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए कोरोना की तर्ज पर ही कार्य योजना बनाई है।
विशेषज्ञ नहीं कर रहे ओपीडी
जिले में लगातार वायरल और संक्रामक रोगों के मरीज बढ़ने के साथ ही संयुक्त अस्पताल में मरीजों की परेशानी बनी है। इसके बावजूद सीएमओ कार्यालय में कार्यरत स्वास्थ्य विशेषज्ञ ओपीडी करने को तैयार नहीं हैं। जबकि इस मामले में शासन सख्त निर्देश जारी कर चुका है। सीएमओ ने इसकी योजना भी बनाई थी। एक महीना बीतने के बाद भी प्रशासनिक पदों पर कार्यरत डॉक्टर ओपीडी नहीं कर रहे हैं। अधिकारियों का तर्क है कि प्रशासनिक कार्यों की अधिकता, डेंगू, मलेरिया पर नियंत्रण पाने के प्रयासों के चलते ओपीडी के लिए समय नहीं मिल पा रहा है। सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि सोमवार को कोरोना टीकाकरण का मेगा अभियान समाप्त होने के बाद डॉक्टरों को ओपीडी में भेजा जाएगा।
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गाजियाबाद। डेंगू के केस बढ़ने लगे हैं। शुक्रवार को दो नए केस सामने आए। शांति नगर और आर्य नगर मेरठ रोड निवासी दो लोगों को डेंगू होने की पुष्टि हुई है। इनका घर पर ही इलाज चल रहा है। अब तक जिले में 62 संदिग्ध मरीजों की जांच में डेंगू के नौ मरीजों की पुष्टि हुई है। चार मरीज दूसरे जिलों के हैं। इनमें गौतमबुद्धनगर, फिरोजाबाबाद, मथुरा और मेरठ शामिल है। स्वास्थ्य विभाग का एक फार्मासिस्ट भी डेंगू की चपेट में आया है। जिला मलेरिया अधिकारी ज्ञानेंद्र मिश्रा का कहना है कि निगरानी की जा रही है।
जिले में पांच साल में सबसे अधिक डेंगू के 621 मामले 2016 में सामने आए थे। तब मलेरिया के 128 केस मिले थे। 2017 में डेंगू के 232 व 293 मलेरिया के मरीज मिले। 2018 में डेंगू के 68 व मलेरिया के 150 मरीज सामने आए। 2019 में डेंगू के मामले एक बार फिर बढ़कर 88 तक पहुंच गए और मलेरिया के 142 रहे। वहीं 2020 में कोरोना काल में डेंगू के 15 व मलेरिया के 13 मरीजों की पुष्टि हुई थी।
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रोज हो रहीं 10 से 12 जांच
आईडीएसपी लैब प्रभारी डॉ. सुरुचि सैनी के अनुसार जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में लिए जाने वाले मलेरिया और डेंगू के सैंपल जांच के लिए लैब में भेजे जाते हैं। लैब में डेंगू की एलाइजा के जरिए जांच की जाती है। इस साल में अब तक उनके पास डेंगू के 62 और मलेरिया के 100 से ज्यादा सैंपल जांच के लिए आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 10 से 12 मरीजों की प्रतिदिन जांच की जा रही है।
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प्राइवेट अस्पतालों को सूचित करने के निर्देश
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार ने संक्रामक रोग विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ बैठक करने के निर्देश दिए हैं। सीएमओ ने निर्देश दिया कि जलभराव वाले स्थानों व बीते 5 साल में सबसे अधिक मिलने वाले स्थानों पर सर्विलांस, जांच व उपचार की कार्रवाई की जाए। संक्रामक रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि जिले के सभी प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों को मलेरिया और डेंगू का कोई भी केस आने पर स्वास्थ्य विभाग को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए कोरोना की तर्ज पर ही कार्य योजना बनाई है।
विशेषज्ञ नहीं कर रहे ओपीडी
जिले में लगातार वायरल और संक्रामक रोगों के मरीज बढ़ने के साथ ही संयुक्त अस्पताल में मरीजों की परेशानी बनी है। इसके बावजूद सीएमओ कार्यालय में कार्यरत स्वास्थ्य विशेषज्ञ ओपीडी करने को तैयार नहीं हैं। जबकि इस मामले में शासन सख्त निर्देश जारी कर चुका है। सीएमओ ने इसकी योजना भी बनाई थी। एक महीना बीतने के बाद भी प्रशासनिक पदों पर कार्यरत डॉक्टर ओपीडी नहीं कर रहे हैं। अधिकारियों का तर्क है कि प्रशासनिक कार्यों की अधिकता, डेंगू, मलेरिया पर नियंत्रण पाने के प्रयासों के चलते ओपीडी के लिए समय नहीं मिल पा रहा है। सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि सोमवार को कोरोना टीकाकरण का मेगा अभियान समाप्त होने के बाद डॉक्टरों को ओपीडी में भेजा जाएगा।