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नहीं दिखाई दे रही निगरानी समिति की कोई निगरानी
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नहीं दिखाई दे रही निगरानी समिति की कोई निगरानी
गाजियाबाद। जिले में कोरोना संक्रमण के नियंत्रण के लिए बनाई गई निगरानी समिति न तो कहीं दिखाई देती है और न ही बाहर से आने वालों की कहीं पर भी कोरोना की रिपोर्ट की जांच की जा रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया था कि बाहर या अन्य प्रांतों से आने वालों को प्रदेश या जिले में आने पर कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट दिखानी होगी। लेकिन कुछ क्षेत्रों में कोरोना की जांच के अलावा रेलवे स्टेशन व बस अड्डे पर कोई जांच नहीं की जा रही है। शहर के बाजारों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में भी किसी तरह की सख्ती या सतर्कता नहीं बरती जा रही है।
रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर कोई निगरानी नहीं हैं। मेट्रो स्टेशन पर भी कोरोना जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। प्रतिदिन सैकड़ों लोग जहाज के जरिए दूसरे देश या प्रदेशों से आते हैं, लेकिन उनकी भी किसी तरह की निगरानी नहीं की जा रही है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग निगरानी के लिए केवल मोहल्ला और ग्राम निगरानी समितियों के भरोसे ही बैठा है।
प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को दी थी जिम्मेदारी
प्लेन, ट्रेन और बसों के जरिए विदेश या दूसरे प्रदेशों से आने वालों की कोरोना जांच करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग को सौंपी गई थी। विदेश से आने से आने वालों की जांच के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी से संपर्क कर आने वालों की जांच की जानी थी। रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस स्टैंड पर रैंडम चेकिंग की जानी थी। स्टेशन और बस स्टैंड पर किसी तरह की जांच नहीं की जा रही है। प्लेन से आने वालों की निगरानी की कोई व्यवस्था ना पहले की गई थी और ना ही अब की गई है।
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पहले भी निष्क्रिय रही समितियां
पहली लहर के दौरान ही प्रशासन ने सजगता बरतते हुए 400 से ज्यादा निगरानी समितियों का गठन किया था, लेकिन निष्क्रियता के चलते देर से सूचनाएं मिल पाती थीं। जब तक मोहल्ला निगरानी समिति इसकी सूचना देती थीं तब तक हालात काफी बिगड़ चुके होते थे। कई मामलों तो यह भी देखने को मिला कि होम आइसोलेशन वाले संक्रमित और उनके परिजन खुलेआम घूम रहे थे, लेकिन निगरानी समितियों की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई। ऐसे लोगों के कारण संक्रमण फैलने का खतरा भी बना रहता है।
बाजार में भीड़ के लिए नहीं है कोई व्यवस्था
प्रमुख बाजारों में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कराने की कोई व्यवस्था नहीं है। इस समय अधिकांश दुकानदार दुकानदार मास्क का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। मुख्य बाजारों में उमड़ने वाली भीड़ में 60 से 70 फीसदी लोगों के चेहरे पर मास्क नजर नहीं आता। मॉल्स में मास्क और सैनेटाइजर तो नजर आता है, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग नहीं दिख रही।
नौकरी, परीक्षा और बाहर घूमने के लिए करा रहे जांच
कोरोना पीक पर होने के दौरान लोग लक्षण के आधार पर जांच कराते थे, लेकिन अब सिर्फ वही लोग जांच करा रहे हैं जिनको निगेटिव रिपोर्ट की जरूरत होती है। यानि जिसको कार्यालय, बाहर घूमने के लिए जाना हो या किसी प्रतियोगी परीक्षा में हिस्सा ले रहे हों। हालांकि इस समय संक्रमितों की संख्या भी बहुत कम है।
निगरानी समितियां कोरोना कंट्रोल रूम और स्वास्थ्य विभाग दोनों को सूचना देती हैं। पिछले एक महीने में लगभग 75 सूचनाएं मिली हैं, सभी की जांच भी कराई गई है। इनमें कोई गंभीर मामला नहीं मिला।
डॉ. आरके गुप्ता, सर्विलांस अधिकारी
अभी चार्ज लिया है। सर्विलांस अधिकारी ने बताया है कि निगरानी समिति काम कर रही हैं। बृहस्पतिवार को बैठक कर पूरी जानकारी लूंगा कि अभी तक टीम ने क्या काम किया है।
डा.ॅ भवतोष शंखधर, सीएमओ
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गाजियाबाद। जिले में कोरोना संक्रमण के नियंत्रण के लिए बनाई गई निगरानी समिति न तो कहीं दिखाई देती है और न ही बाहर से आने वालों की कहीं पर भी कोरोना की रिपोर्ट की जांच की जा रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया था कि बाहर या अन्य प्रांतों से आने वालों को प्रदेश या जिले में आने पर कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट दिखानी होगी। लेकिन कुछ क्षेत्रों में कोरोना की जांच के अलावा रेलवे स्टेशन व बस अड्डे पर कोई जांच नहीं की जा रही है। शहर के बाजारों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में भी किसी तरह की सख्ती या सतर्कता नहीं बरती जा रही है।
रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर कोई निगरानी नहीं हैं। मेट्रो स्टेशन पर भी कोरोना जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। प्रतिदिन सैकड़ों लोग जहाज के जरिए दूसरे देश या प्रदेशों से आते हैं, लेकिन उनकी भी किसी तरह की निगरानी नहीं की जा रही है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग निगरानी के लिए केवल मोहल्ला और ग्राम निगरानी समितियों के भरोसे ही बैठा है।
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प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को दी थी जिम्मेदारी
प्लेन, ट्रेन और बसों के जरिए विदेश या दूसरे प्रदेशों से आने वालों की कोरोना जांच करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग को सौंपी गई थी। विदेश से आने से आने वालों की जांच के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी से संपर्क कर आने वालों की जांच की जानी थी। रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस स्टैंड पर रैंडम चेकिंग की जानी थी। स्टेशन और बस स्टैंड पर किसी तरह की जांच नहीं की जा रही है। प्लेन से आने वालों की निगरानी की कोई व्यवस्था ना पहले की गई थी और ना ही अब की गई है।
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पहले भी निष्क्रिय रही समितियां
पहली लहर के दौरान ही प्रशासन ने सजगता बरतते हुए 400 से ज्यादा निगरानी समितियों का गठन किया था, लेकिन निष्क्रियता के चलते देर से सूचनाएं मिल पाती थीं। जब तक मोहल्ला निगरानी समिति इसकी सूचना देती थीं तब तक हालात काफी बिगड़ चुके होते थे। कई मामलों तो यह भी देखने को मिला कि होम आइसोलेशन वाले संक्रमित और उनके परिजन खुलेआम घूम रहे थे, लेकिन निगरानी समितियों की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई। ऐसे लोगों के कारण संक्रमण फैलने का खतरा भी बना रहता है।
बाजार में भीड़ के लिए नहीं है कोई व्यवस्था
प्रमुख बाजारों में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कराने की कोई व्यवस्था नहीं है। इस समय अधिकांश दुकानदार दुकानदार मास्क का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। मुख्य बाजारों में उमड़ने वाली भीड़ में 60 से 70 फीसदी लोगों के चेहरे पर मास्क नजर नहीं आता। मॉल्स में मास्क और सैनेटाइजर तो नजर आता है, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग नहीं दिख रही।
नौकरी, परीक्षा और बाहर घूमने के लिए करा रहे जांच
कोरोना पीक पर होने के दौरान लोग लक्षण के आधार पर जांच कराते थे, लेकिन अब सिर्फ वही लोग जांच करा रहे हैं जिनको निगेटिव रिपोर्ट की जरूरत होती है। यानि जिसको कार्यालय, बाहर घूमने के लिए जाना हो या किसी प्रतियोगी परीक्षा में हिस्सा ले रहे हों। हालांकि इस समय संक्रमितों की संख्या भी बहुत कम है।
निगरानी समितियां कोरोना कंट्रोल रूम और स्वास्थ्य विभाग दोनों को सूचना देती हैं। पिछले एक महीने में लगभग 75 सूचनाएं मिली हैं, सभी की जांच भी कराई गई है। इनमें कोई गंभीर मामला नहीं मिला।
डॉ. आरके गुप्ता, सर्विलांस अधिकारी
अभी चार्ज लिया है। सर्विलांस अधिकारी ने बताया है कि निगरानी समिति काम कर रही हैं। बृहस्पतिवार को बैठक कर पूरी जानकारी लूंगा कि अभी तक टीम ने क्या काम किया है।
डा.ॅ भवतोष शंखधर, सीएमओ