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ब्लैक फंगस ः जरूरत 248 की, मिले सिर्फ इंजेक्शन
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ब्लैक फंगस : जरूरत 248 की, मिले सिर्फ 60 इंजेक्शन
गाजियाबाद। ब्लैक फंगस के मरीजों के इलाज में प्रयोग होने वाला इंजेक्शन सीएमओ कार्यालय से मिलने लगा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण लोगों को पांच से छह घंटे इंजेक्शन इंतजार करना पड़ रहा है। मरीजों की संख्या के अनुसार पर्याप्त एंफेटेरोसिन बी इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। मेरठ से आए इंजेक्शन बृहस्पतिवार को ही खत्म हो गए। शुक्रवार सुबह फिर एंबुलेंस इंजेक्शन लेने मेरठ गई, लेकिन वह सिर्फ 60 इंजेक्शन लेकर आई। जबकि जिले में ब्लैक फंगस के 62 मरीज हैं। इनमें 40 मरीजों का घर से ही इलाज चल रहा है। ऐसे में जिले में एक दिन में करीब 248 इंजेक्शनों की जरूरत है। एक मरीज को चार इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है।
कम इंजेक्शन मिलना विभाग की लापरवाही
मरीजों की पूरी जानकारी न भेजने के कारण मेरठ से भर्ती मरीजों के नाम पर ही इंजेक्शन भेजे जा रहे हैं, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग ने सिर्फ भर्ती मरीजों की सूची भेजी थी। इस समय 40 मरीजों का इलाज घर से चल रहा है, उन्हें भी प्रतिदिन इंजेक्शन लगवाने की जरूरत पड़ रही है। नोडल डॉ सुनील त्यागी का कहना है कि घर से इलाज कराने वाले मरीजों की जानकारी मिलने पर सूचना शासन को भेजने के साथ ही इंजेक्शन की संख्या बढ़ाने की मांग की है।
अब तक 88 की पुष्टि, 10 की मौत
अब तक पोस्ट कोविड डायबिटिक 88 मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हो चुकी है। उन मरीजों में 10 की मौत हो चुकी है। इस समय अलग-अलग अस्पतालों में 16 मरीजों का इलाज अस्पतालों में चल रहा है। अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा चुके 62 में से लगभग 40 मरीजों का अभी भी ओपीडी के जरिये उपचार चल रहा है। भर्ती हर मरीज को 4 से 6 इंजेक्शन की प्रितिदिन जरूरत पड़ रही है। इसके अनुसार प्रतिदिन 248 से ज्यादा इंजेक्शन की जरूरत है। शासन स्तर से सिर्फ 60 इंजेक्शन प्रतिदिन मिल रहे हैं।
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मैं अपने ससुर को गाजीपुर से लाकर हर्ष ईएनटी अस्पताल में इलाज करा रहा हूं। इंजेक्शन लेने के लिए सुबह 11 बजे सीएमओ कार्यालय आ गया था। शाम को चार बजे सिर्फ दो इंजेक्शन मिले हैं, जबकि चार इंजेक्शन एक दिन में जरूरत पड़ती है।
अमित
मैं पिता को लखनऊ से लाकर भर्ती कराया हूं। अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिए हैं, अभी 15 दिन रोज चार इंजेक्शन लगना है, लेकिन दो ही इंजेक्शन मिल पाते हैं। अगर इंजेक्शन मिल जाए तो रोज-रोज भागना न पड़े।
हिमांशु, यादव
कोट
शासन को सभी मरीजों की सूचना भेजी जा चुकी है। जल्द ही इंजेक्शन की संख्या बढ़ सकती है। अभी मेरठ के मेडिकल कॉलेज में 100 से अधिक मरीज भर्ती हैं। शासन से जो इंजेक्शन आता है, उसमें आधा मेडिकल कॉलेज को चला जाता है, इसके बाद अन्य जिलों को इंजेक्शन भेजा जाता है।
डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ
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गाजियाबाद। ब्लैक फंगस के मरीजों के इलाज में प्रयोग होने वाला इंजेक्शन सीएमओ कार्यालय से मिलने लगा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण लोगों को पांच से छह घंटे इंजेक्शन इंतजार करना पड़ रहा है। मरीजों की संख्या के अनुसार पर्याप्त एंफेटेरोसिन बी इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। मेरठ से आए इंजेक्शन बृहस्पतिवार को ही खत्म हो गए। शुक्रवार सुबह फिर एंबुलेंस इंजेक्शन लेने मेरठ गई, लेकिन वह सिर्फ 60 इंजेक्शन लेकर आई। जबकि जिले में ब्लैक फंगस के 62 मरीज हैं। इनमें 40 मरीजों का घर से ही इलाज चल रहा है। ऐसे में जिले में एक दिन में करीब 248 इंजेक्शनों की जरूरत है। एक मरीज को चार इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है।
कम इंजेक्शन मिलना विभाग की लापरवाही
मरीजों की पूरी जानकारी न भेजने के कारण मेरठ से भर्ती मरीजों के नाम पर ही इंजेक्शन भेजे जा रहे हैं, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग ने सिर्फ भर्ती मरीजों की सूची भेजी थी। इस समय 40 मरीजों का इलाज घर से चल रहा है, उन्हें भी प्रतिदिन इंजेक्शन लगवाने की जरूरत पड़ रही है। नोडल डॉ सुनील त्यागी का कहना है कि घर से इलाज कराने वाले मरीजों की जानकारी मिलने पर सूचना शासन को भेजने के साथ ही इंजेक्शन की संख्या बढ़ाने की मांग की है।
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अब तक 88 की पुष्टि, 10 की मौत
अब तक पोस्ट कोविड डायबिटिक 88 मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हो चुकी है। उन मरीजों में 10 की मौत हो चुकी है। इस समय अलग-अलग अस्पतालों में 16 मरीजों का इलाज अस्पतालों में चल रहा है। अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा चुके 62 में से लगभग 40 मरीजों का अभी भी ओपीडी के जरिये उपचार चल रहा है। भर्ती हर मरीज को 4 से 6 इंजेक्शन की प्रितिदिन जरूरत पड़ रही है। इसके अनुसार प्रतिदिन 248 से ज्यादा इंजेक्शन की जरूरत है। शासन स्तर से सिर्फ 60 इंजेक्शन प्रतिदिन मिल रहे हैं।
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मैं अपने ससुर को गाजीपुर से लाकर हर्ष ईएनटी अस्पताल में इलाज करा रहा हूं। इंजेक्शन लेने के लिए सुबह 11 बजे सीएमओ कार्यालय आ गया था। शाम को चार बजे सिर्फ दो इंजेक्शन मिले हैं, जबकि चार इंजेक्शन एक दिन में जरूरत पड़ती है।
अमित
मैं पिता को लखनऊ से लाकर भर्ती कराया हूं। अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिए हैं, अभी 15 दिन रोज चार इंजेक्शन लगना है, लेकिन दो ही इंजेक्शन मिल पाते हैं। अगर इंजेक्शन मिल जाए तो रोज-रोज भागना न पड़े।
हिमांशु, यादव
कोट
शासन को सभी मरीजों की सूचना भेजी जा चुकी है। जल्द ही इंजेक्शन की संख्या बढ़ सकती है। अभी मेरठ के मेडिकल कॉलेज में 100 से अधिक मरीज भर्ती हैं। शासन से जो इंजेक्शन आता है, उसमें आधा मेडिकल कॉलेज को चला जाता है, इसके बाद अन्य जिलों को इंजेक्शन भेजा जाता है।
डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ