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दो साल में 136 करोड़ खर्च करने पर भी सिर्फ 134 दिन मिली ताजी हवा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 13 Nov 2022 07:00 AM IST
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दो साल में 136 करोड़ खर्च करने पर भी सिर्फ 134 दिन मिली ताजी हवा
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साहिबाबाद। दो साल में प्रदूषण कम करने के लिए 136 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद लोगों को सिर्फ 134 दिन ही ताजी हवा मिल सकी है। नगर निगम को वायु गुणवत्ता पर काम करने के लिए सबसे ज्यादा 121 करोड़ रुपये 2020-21 में मिले थे, लेकिन अधिकारी कार्यों को समय पर पूरा नहीं कर सके। वहीं, पीसीबी ने 10 इलाकों में विभिन्न विभागों को प्रदूषण फैलने के 29 कारण बताए थे, उनमें सुधार करने में भी लापरवाही बरती जा रही है।
आंकड़े बताते हैं कि दो साल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सिफारिश पर 3.83 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुर्माने के रूप में वसूली गई। पीसीबी की मॉनिटरिंग साइट के आंकड़े बताते हैं कि 2021 में लोगों को शहर में सिर्फ 10 दिन सबसे अच्छी हवा मिली जबकि 58 दिन संतोषजनक रही । उसके बाद हवा की गुणवत्ता बिगड़ती गई और सर्वाधिक 297 दिन खराब एक्यूआई की वजह से लोगों की सांसों पर संकट बना रहा। इसी तरह 2022 में 12 दिन हवा अच्छी, 54 दिन संतोषजनक और 249 दिन खराब, सबसे खराब व गंभीर श्रेणी में रही। प्रदूषण कम करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की ओर से दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप के चार चरण लागू किए जाते हैं, लेकिन इसमें भी लोगों को कोई राहत नहीं मिलती। प्रदूषण कम होने के लिए अधिकारी सिर्फ हवा की गति बढ़ने का इंतजार करते रहते हैं।
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उधर, 15वें वित्त आयोग की संस्तुति पर 2020-21 में शहर की वायु गुणवत्ता की सुधार के लिए 121 करोड़ रुपये का बजट मंजूर हुआ था। इसमें 60.50 करोड़ रुपये कूड़ा निस्तारण और मैनेजमेंट ऑफ वाटर के लिए मिले थे, जबकि इतनी ही रकम वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए मिली थी। 2022 में मेयर आशा शर्मा ने निगम की बैठक में विभिन्न विभाग के अधिकारियों को प्रदूषण पर काम करने के लिए 15 करोड़ रुपये का बजट आवंटन किया था, इसमें काम तो हुए लेकिन हवा की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ा।
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स्वास्थ्य विभाग ने खरीदे संसाधन :
नगर निगम स्वास्थ्य विभाग ने सड़कों पर पानी का छिड़काव कराने के लिए छह एंटी स्मॉग गन खरीदीं। मेन सड़कों से पॉलिथीन और गिलास हटाने के लिए 10 वैक्यूम मशीनें खरीदीं। डिवाइडरों की सफाई के लिए 10 जेटिंग मशीन, जबकि 30 एयर फिल्टर नहीं खरीदे गए। इनका फंड निगम को लौटाना पड़ा था। डीजल से संचालित वाहनों को भी सीएनजी में नहीं बदला गया।
10 करोड़ से हटी सड़कों की धूल:
निर्माण विभाग को शहर की मुख्य सड़कों की धूल हटाने के लिए करीब 10 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसमें सड़क, डिवाइडर और पटरी निर्माण कार्य हुआ। वहीं, सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए नगर निगम ने 129 करोड़ रुपये मांगे थे। उसमें से 15 करोड़ का बजट औद्योगिक क्षेत्र की 13 सड़कों को बनाने के लिए मंजूर हुआ है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई 2021-22
3.83 करोड़ रुपये का जुर्माना प्रदूषण फैलाने वालों पर लगाया
- 28 उद्योग प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करते मिले
- 62 साइट पर धूल उड़ती मिली
- 18 अवैध फैक्टरियों को प्रदूषण फैलाने पर बंद कराया
पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी उत्सव शर्मा का कहना है कि ग्रैप के तहत काम करने के लिए नगर निगम का बजट होता है। सड़क निर्माण, धूल हटाना, कूड़ा निस्तारण, पानी का छिड़काव करते हैं। अधिकारियों के साथ तालमेल बनाकर काम होता है। हवा की गति कम होने से प्रदूषण के कण तेजी से बढ़ते हैं।

नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मिथलेश का कहना है कि प्रदूषण रोकने के लिए बजट होता है लेकिन किसमें कितना पैसा खर्च होता है। वो फाइल से पता लगेगा। प्रदूषण कम करने के लिए सभी काम किए जा रहे हैं।
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